झारखंड में 2023 में TDPL को पहली बार JSSC (Jharkhand Staff Selection Commission) की परीक्षा का डेटा प्रोसेसिंग कार्य सौंपा गया। उस समय कंपनी ने ऑनलाइन आवेदन पोर्टल, एंट्री वैलिडेशन और उम्मीदवारों के दस्तावेज़ीकरण को संभाला। प्रारम्भिक रिपोर्टों के अनुसार, इस चरण में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं बताई गई थी और कई उम्मीदवारों ने प्रक्रिया को सुगम बताया। फिर भी, 2024 की मध्यावधि में TDPL को JPSC‑JSSC संयुक्त परीक्षा के लिए भी समान कार्यभार दिया गया, जिससे कंपनी की प्रतिष्ठा में एक नई उन्नति देखी गई।
वर्ष 2024 की फरवरी में, JSSC द्वारा आयोजित परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद, कई उम्मीदवारों ने परिणाम में असंगतियों की शिकायत की। कुछ उम्मीदवारों का दावा था कि उनकी प्रविष्टियों में त्रुटि के कारण उनका नाम सूची में नहीं आया, जबकि अन्य ने कहा कि चयनित उम्मीदवारों के अंक तालिकाओं में गलत दिखाए गए। इन शिकायतों को उठाने पर, JSSC ने तुरंत TDPL को सूचना दी और एक आंतरिक जाँच के आदेश को लागू किया।
जाँच में पाया गया कि कुछ डेटा एंट्री मॉड्यूल में सॉफ़्टवेयर बग और मानव त्रुटियों के कारण उम्मीदवारों की जानकारी में गड़बड़ी हुई थी। इसके अलावा, कई दस्तावेज़ों की वैरिफिकेशन प्रक्रिया में देरी और असंगत मानदंडों का प्रयोग हुआ था। इन तथ्यों के सामने, राज्य सरकार ने TDPL के अनुबंध को अस्थायी रूप से निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। इस बीच, TDPL ने अपनी तरफ से कहा कि सभी प्रक्रियाएँ मानक प्रोटोकॉल के अनुसार चल रही थीं और त्रुटियों का कारण बाहरी तकनीकी समस्याएँ थीं।
जारी जांच के दौरान, राज्य के एक तकनीकी विशेषज्ञ टीम ने TDPL के सर्वर लॉग और डेटा बैक‑अप की विस्तृत समीक्षा की। टीम ने पाया कि कुछ मामलों में डेटा ट्रांसफर के दौरान पैकेट लॉस और टाइम‑आउट की घटनाएँ हुई थीं, जिससे डेटा की अखंडता पर प्रश्न उठे। साथ ही, टीम ने यह भी उजागर किया कि TDPL ने कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा पैच को समय पर लागू नहीं किया था, जिससे सिस्टम में संभावित दुरुपयोग की संभावना बनी रही। इन निष्कर्षों ने सरकार को अधिक कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया।
विपरीत पक्षों ने इस मामले पर अलग‑अलग प्रतिक्रियाएँ दीं। JSSC के अध्यक्ष ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं और TDPL के खिलाफ उठाए गए निर्णय का समर्थन किया। वहीं, TDPL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कंपनी की ओर से बयान दिया कि सभी प्रक्रियाएँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप थीं और त्रुटियों को तुरंत सुधारने की योजना तैयार की गई है। उम्मीदवारों के संघ ने भी इस विवाद को लेकर गहरी चिंता जताई, कहता कि कई युवा अभ्यर्थी अपने भविष्य के सपने को टालते हुए निराश हो रहे हैं।
राज्य सरकार ने TDPL के अनुबंध को रद्द करने के साथ ही भविष्य में किसी भी निजी डेटा‑प्रोसेसिंग फर्म को अनुबंधित करने के लिए कड़े मानदंड लागू करने की घोषणा की। इसके तहत सभी फर्मों को ISO 27001 प्रमाणन और स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही, सरकार ने एक नई स्वतंत्र निगरानी बोर्ड की स्थापना की, जो सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगा।
The TDPL fallout exposes how a single tech vendor can become the linchpin of a state’s meritocracy, turning operational glitches into political flashpoints. It also signals a looming shift: governments will increasingly weaponize data‑security standards to re‑assert control over recruitment and curb private‑sector influence.
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