राशन कार्ड की ऑनलाइन एंट्री, जो कि खाद्य सुरक्षा योजना के तहत लाभार्थियों को समय पर पोषण सहायता प्रदान करने का मुख्य माध्यम है, उसे पिछले दो महीनों में कई बार लक्ष्य से नीचे दर्ज किया गया। डेटा के अनुसार, फरवरी में निर्धारित १,५०,००० एंट्री में से केवल १,०७,४५० एंट्री पूरी हुई, जबकि मार्च में यह प्रतिशत और घटकर ६५ प्रतिशत रह गया। इस गिरावट ने न केवल लाभार्थियों को प्रभावित किया, बल्कि विभागीय रिपोर्टिंग में भी विसंगतियों को उजागर किया।
अनुमंडल के आधिकारिक दस्तावेज़ों के अनुसार, ऑनलाइन एंट्री का लक्ष्य वर्ष में २.५ मिलियन कार्डों की प्रोसेसिंग था, जिसका उद्देश्य डिजिटल रिकॉर्ड को सुदृढ़ करना और कागजी प्रक्रिया को समाप्त करना था। लेकिन पिछले तिमाही में लक्ष्य में ४० प्रतिशत की कमी आई, जिससे लाभार्थियों को आवश्यक रेशन मिलने में देरी का सामना करना पड़ा। इस संदर्भ में, कई सामाजिक संगठनों ने पहले ही विभागीय लापरवाही की आलोचना कर घोषणा की थी कि डिजिटल संक्रमण का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया।
प्रशासनिक आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पाँचों कर्मचारियों को उनके व्यक्तिगत कार्यस्थल पर किए गए कर्तव्यनिष्ठता की कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। वेतन स्थगित करने के अलावा, उन्हें लिखित रूप में अपनी गलती को स्पष्ट करने और भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही न दोहराने के उपाय प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया। आदेश के अनुसार, यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो आगे की अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है।
विभागीय प्रमुख ने बताया कि इस कदम से कर्मचारियों में हड़कंप मचा है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि विभाग की विश्वसनीयता को पुनर्स्थापित करना प्राथमिकता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ऑनलाइन एंट्री प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ी, डेटा एंट्री की कमी, और कर्मचारियों की अनुपस्थिति मुख्य कारण थे। इस संदर्भ में, विभाग ने अतिरिक्त तकनीकी समर्थन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की योजना भी बनाई है।
राष्ट्रपति के कार्यालय ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि डिजिटल पहलों को सख्त निगरानी और पारदर्शिता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही से सार्वजनिक विश्वास में क्षति पहुंचती है और यह सरकार की डिजिटल एजेंडा के विरुद्ध जाता है। साथ ही, उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में दोहराव न हो।
संबंधित राज्य सरकार के सामाजिक कल्याण मंत्री ने भी इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राशन कार्ड की ऑनलाइन एंट्री को सुचारू बनाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इस टास्क फोर्स को तकनीकी विशेषज्ञ, आईटी सलाहकार, और अनुभवी प्रशासकों से मिलाकर कार्य करने का निर्देश दिया गया है। उनका मानना है कि इससे प्रक्रिया में सुधार होगा और लक्ष्य को पुनः हासिल किया जा सकेगा।
विपक्षी दल के प्रमुख सांसद ने इस मुद्दे को लेकर प्रश्न उठाते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक लापरवाही को तुरंत सुधारा नहीं गया, तो यह सामाजिक असमानता को बढ़ा सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले में पारदर्शी जांच प्रक्रिया शुरू की जाए और दोषियों को सख्त दंड दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि लाभार्थियों को समय पर रेशन न मिलने से उनकी जीवनस्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस लापरवाही के कारण कई परिवारों को अपने राशन कार्ड की पुनः जाँच और एंट्री के लिए अतिरिक्त समय और प्रयास करना पड़ा। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी इस प्रक्रिया को जटिल बनाती है। सामाजिक कार्यकर्ता यह मानते हैं कि यदि डिजिटल प्रणाली में बुनियादी समस्याएं बनी रहें, तो लाभार्थियों को वास्तविक मदद नहीं मिल पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश आवश्यक है।
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि राशन कार्ड एंट्री में देरी से खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम की कुल लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है। यदि लाभार्थियों को समय पर र
The pay‑freeze sends a stark signal that Bihar’s digital welfare push will now be judged on delivery, not just rollout, forcing the bureaucracy to treat data entry as a frontline service.
If the new task‑force can bridge the tech‑infrastructure gap, the episode could become a catalyst for tighter oversight
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