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बिहार सरकार ने पीएम आवास योजना के तहत 11 लाख 18 हजार 937 गरीब परिवारों को पक्का घर मिलने की स्वीकृति दी

बिहार सरकार ने आज घोषणा की कि राज्य के 11 लाख 18 हजार 937 से अधिक गरीब परिवारों को पक्का घर मिलने की स्वीकृति दी गई है, जिससे भारत के प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत एक ऐतिहासिक कदम को साकार किया गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर एक मील का पत्थर बताया, साथ ही इस पहल में केन्द्र सरकार के समर्थन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभारी भी रहे। इस घोषणा से सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बिहार का विकास मानचित्र पर नया मोड़ लेगा।

PM Awas Yojana, जो 2015 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी, का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के घरों को पक्के, सुरक्षित और स्वच्छ आवास प्रदान करना है। इस योजना के तहत हर वर्ष लाखों लाभार्थियों को सब्सिडी, ऋण सुलभता और निर्माण तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है। अब तक बिहार में इस योजना के तहत लगभग 12 लाख आवासों का प्रस्ताव था, लेकिन वास्तविक स्वीकृति प्रक्रिया में कई बाधाएँ और देरी रही थीं। राज्य सरकार ने इन बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष कार्यसमिति बनायी, जिससे लाभार्थियों की पहचान, दस्तावेजीकरण और निधि वितरण में तेज़ी लाई गई।

पृष्ठभूमि में देखी जाए तो बिहार का गरीबी स्तर राष्ट्रीय औसत से अधिक रहा है, जहाँ 2022‑23 में ग्रामीण गरीबी दर 33 प्रतिशत के आसपास पाई गई थी। इस संदर्भ में आवास की कमी ने स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला था। पिछले वर्षों में विभिन्न राज्य‑स्तरीय योजनाओं के बावजूद कई परिवारों को स्थायी घर नहीं मिल पाया था। इस कारण से सामाजिक असमानता और शहरी‑ग्रामीण अंतर बढ़ता जा रहा था, जिससे राजनैतिक दबाव भी उत्पन्न हुआ था।

मुख्य घटनाक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित डाटा‑वेरिफिकेशन सेंटर्स ने लाभार्थियों के दस्तावेज़ों का विस्तृत जाँच किया। फिर प्रत्येक जिले के ब्लॉक‑लेवल अधिकारी ने स्वीकृति प्रक्रिया को तेज़ किया, जिससे 2024 के मध्य तक 9 लाख परिवारों को प्राथमिक स्वीकृति मिल गई थी। इस प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके पारदर्शिता बढ़ाई गई और मध्यवर्ती भ्रष्टाचार को न्यूनतम किया गया। आज के दिन मुख्यमंत्री ने यह बताया कि अंतिम चरण में शेष 2 लाख 18 हजार 937 परिवारों को भी स्वीकृति मिल गई है, जिससे कुल लक्ष्य पूरा हो गया।

साथ ही, राज्य ने इस योजना के कार्यान्वयन में कई नई तकनीकों को अपनाया। मोबाइल‑एप्लिकेशन के माध्यम से लाभार्थियों को अपनी आवेदन स्थिति ट्रैक करने की सुविधा दी गई, जबकि ब्लॉक स्तर पर निर्माण मानकों की निगरानी के लिए GIS‑आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया। इन उपायों ने न केवल प्रक्रिया को तेज़ किया, बल्कि योजना के दुरुपयोग को भी रोका।

वित्तीय पहलू पर नजर डालते हुए, केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए लगभग ₹ 2 हजार करोड़ की अनुदान राशि प्रदान की है। राज्य ने अतिरिक्त रूप से ₹ 1 हजार करोड़ का बजट आवास निर्माण में निवेश करने की घोषणा की। इस निवेश के तहत निर्माण सामग्री, श्रम लागत और सब्सिडी को कवर किया जाएगा। वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए राज्य ने स्वतंत्र ऑडिटिंग एजेंसियों को नियुक्त किया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस कदम को ‘बिहार के गरीब परिवारों के अपने पक्के घर के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम’ कहा। उन्होंने ट्वीट किया कि इस योजना से न केवल रहने की स्थिति सुधरेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने इस प्रक्रिया में स्थानीय कारीगरों और निर्माण कंपनियों को प्राथमिकता दी है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्रीय सरकार के प्रतिनिधियों ने भी इस उपलब्धि को सराहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐसी पहलें भारत के ग्रामीण विकास के लक्ष्य के साथ पूरी तरह मेल खाती हैं। गृह मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भविष्य में इस योजना को और अधिक विस्तारित किया जाएगा, जिससे हर गरीब परिवार को सस्ती, सुरक्षित और स्वच्छ आवास मिल सके। दोनों नेताओं ने इस कार्य में बिहार सरकार के सक्रिय सहयोग की प्रशंसा की।

विपरीत रूप में कुछ सामाजिक संगठनों ने योजना के कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि स्वीकृति के बाद वास्तविक निर्माण में देरी, भूमि उपलब्धता और स्थानीय कष्टप्रद परिस्थितियों के कारण समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इन संगठनों ने योजना के सतत मॉनिटरिंग और लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति को ट्रैक करने की माँग की।

राजनीतिक रूप से यह कदम बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों में सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने की आशा रखता है। विपक्षी दल ने कहा कि जबकि स्वीकृति प्रक्रिया में सुधार हुआ है, वास्तविक निर्माण और वितरण की गति अभी भी देखनी बाकी है।

 

Bihar’s government says approval has been secured for over 11.18 million poor families under the PM Awas Yojana, marking a milestone in delivering permanent homes to the state’s most vulnerable. The move, backed by a ₹2,000‑crore central grant and a ₹1,000‑crore state outlay, leverages digital verification and GIS monitoring to speed approvals, though critics warn construction delays may still loom.

The approval grants permanent housing to over 11 million low‑income families in Bihar, completing the state’s target under the nationwide PM Awas Yojana.
It represents a major expansion of subsidised residential infrastructure for economically vulnerable households.

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