उत्तरी भारत के उत्तराखंड में स्थित चमोली जिले के पीपलकोटी टनल में मंगलवार को हुई दुर्घटना में दस निर्माण श्रमिकों की मौत हो गई। पीटीआई के अनुसार, टनल के भीतर फंसे दो श्रमिकों के शव आज सुबह सुरक्षा बलों ने बरामद कर लिए, जिससे बचाव अभियान का अंतिम चरण पूरा हुआ। दुर्घटना के कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है, पर प्रारंभिक रिपोर्टों में जल भराव और ढहाव को संभावित कारण बताया गया है।
टनल निर्माण कार्य 2022 में शुरू हुआ था, जब से इस परियोजना को राजमार्ग विकास योजना के अंतर्गत प्राथमिकता दी गई थी। टनल के निर्माण में कई निजी ठेकेदारों ने भाग लिया, और काम के दौरान कई बार सुरक्षा जाँचें कराई गई थीं। इस क्षेत्र में भारी बरसात और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण निर्माण कार्य में अक्सर देरी और तकनीकी समस्याएँ सामने आई हैं।
हादसे के पहले दिन, टनल में काम कर रहे श्रमिकों ने अचानक बढ़ते पानी की धारा और ध्वनि से खतरे का संकेत महसूस किया। टनल के भीतर जल स्तर तेज़ी से बढ़ा, जिससे कई श्रमिक फंस गए। स्थानीय मीडिया ने बताया कि टनल के जल निकास प्रणाली में खराबी और अव्यवस्थित मलबा जमा होने से जल बहाव का मार्ग बंद हो गया था, जिससे आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हुई।
दुर्घटना के बाद, राज्य सरकार ने तुरंत बचाव दल को तैनात किया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, उत्तराखंड पुलिस, और टनल प्रबंधन कंपनी की टीमों ने मिलकर कार्य शुरू किया। प्रारंभिक चरण में टनल के भीतर जल निकासी के लिए उच्च शक्ति वाले सक्शन पंप लगाए गए, जबकि मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का उपयोग किया गया।
बचाव दल ने टनल के विभिन्न हिस्सों में संभावित फंसे लोगों की खोज के लिए सघन तलाशी अभियान चलाया। टनल के प्रवेश द्वार पर स्थापित कैमरा सिस्टम और थर्मल इमेजिंग उपकरणों का उपयोग कर संभावित जीवन संकेतों की खोज की गई। हालांकि, कई घंटे तक चलने वाले प्रयासों के बाद केवल दो मृत शरीर ही मिले, जिससे बचाव कार्य को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
स्थिति की त्वरित रिपोर्ट के बाद, उत्तराखंड के मुख्य मंत्री ने टनल के संचालन को तत्काल रोकने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि आगे की जांच के दौरान सभी निर्माण गतिविधियों को निलंबित किया जाएगा। इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद और शोक-संवेदना प्रदान करने का आश्वासन दिया।
रिपोर्टों के अनुसार, टनल निर्माण में शामिल प्रमुख ठेकेदार, इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (IDC), ने दुर्घटना की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की है। कंपनी ने कहा कि वह सभी आवश्यक दस्तावेज़ और तकनीकी डेटा सुरक्षा एजेंसियों को उपलब्ध कराएगी और सहयोग करेगा।
संबंधित सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि टनल में पानी के रिसाव को रोकने के लिए अतिरिक्त निवारक उपायों की आवश्यकता है। उन्होंने टनल के जल निकास पाइपलाइन की नियमित जांच, आपातकालीन पंपिंग सिस्टम की कार्यक्षमता, और मलबा प्रबंधन के नए मानकों को लागू करने का प्रस्ताव रखा।
राजनीतिक स्तर पर, विपक्षी दलों ने इस दुर्घटना को सरकार की असुरक्षित बुनियादी ढांचे की नीति की आलोचना का अवसर माना। कई विधायक इस बात पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है। इसके जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि सभी निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
आर्थिक दृष्टिकोण से, टनल का प्रोजेक्ट उत्तराखंड के पर्यटन और व्यापारिक मार्गों को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था। इस दुर्घटना से परियोजना में संभावित देरी और अतिरिक्त लागतें आ सकती हैं।
Updated: August 19, 2026
The tunnel collapse halted construction on a key infrastructure project, affecting regional transport and economic plans. Investigations and safety reviews are underway to assess causes and prevent future incidents.
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