सिंगर की पदस्थापना 2022 में हुई थी, तब से वह बिरु के प्रशासनिक कार्यों तथा परीक्षा प्रणाली के सुधार में सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं। उनके पद पर नियुक्ति के बाद, कई शैक्षिक नीतियों में परिवर्तन हुए, जिनमें डिजिटल परीक्षा प्रणाली का प्रारंभिक कार्यान्वयन और ग्रामीण स्कूलों में शिक्षा पहुँच को बढ़ावा देना शामिल है। हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान ही कई वित्तीय लेन‑देन और संपत्ति के अधिग्रहण को लेकर सवाल उठते रहे, परंतु अब तक कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया था।
ईओयू ने इस मामले को 90.04 प्रतिशत आय से अधिक संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसका अर्थ है कि आरोपित व्यक्ति की आय के मुकाबले उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि पाई गई है। इस वर्गीकरण के आधार पर, जांच टीम ने संपत्ति के स्रोतों का पता लगाने हेतु विभिन्न दस्तावेज़, बैंक स्टेटमेंट, और रियल एस्टेट लेन‑देन की जाँच की। प्रारम्भिक रिपोर्ट में यह संकेत मिला है कि कई संपत्तियों के पंजीकरण में असंगतियाँ पाई गई हैं, जिससे यह संदेह उत्पन्न हुआ कि इनकी खरीदी में अवैध धन प्रवाह हो सकता है।
पिछले महीने बिहार सरकार ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिये नई नीतियाँ लागू की थीं, जिसमें सभी उच्च पदाधिकारियों के वित्तीय विवरणों की सार्वजनिक घोषणा का प्रावधान था। इस संदर्भ में अजय कुमार सिंह की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठना, सरकार की इस पहल के प्रभाव को भी उजागर करता है। सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि यदि कोई उच्च पदाधिकारी भी कानून के दायरे में आता है, तो उसे सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और इस प्रकार सभी को नियमों का पालन करने की चेतावनी दी गई।
छापेमारी के दौरान ईओयू ने सिंह के तीन ठिकानों से विभिन्न दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। इनमें निजी बैंक खाता विवरण, रियल एस्टेट की स्वामित्व प्रमाण पत्र, और विभिन्न कंपनी के शेयर प्रमाणपत्र शामिल हैं। इन दस्तावेज़ों को आगे के विश्लेषण हेतु फोरेंसिक टीम को सौंप दिया गया है। प्रारम्भिक फोरेंसिक रिपोर्ट में यह संकेत मिला है कि कुछ संपत्तियों की खरीदारी में नकद लेन‑देन का प्रयोग किया गया था, जो कि वित्तीय नियमों के विरुद्ध है।
बिहार के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठने वाले भ्रष्टाचार के मामलों के समान महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई से प्रशासनिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व में वृद्धि होगी। न्यायालय ने अभी तक कोई निर्णय नहीं सुनाया है, परंतु शीघ्र ही इस पर सुनवाई का समय निर्धारित किया जाएगा।
राज्य सरकार ने इस मामले पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह ईओयू के कार्य में पूर्ण सहयोग देगा और जांच के परिणामों के अनुसार उचित कार्यवाही करेगा। सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग प्रमुख ने कहा कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित व्यक्ति को कड़ी सजा मिलेगी और साथ ही इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिये नई नीतियां बनाई जाएंगी।
बिरु के अन्य अधिकारियों ने इस खबर पर आश्चर्य व्यक्त किया और कहा कि अजय कुमार सिंह व्यक्तिगत रूप से कई शैक्षिक पहलों के पीछे रहे हैं, परन्तु इस तरह के आरोपों से संस्थान की छवि को नुकसान पहुँच सकता है। उन्होंने कहा कि बोर्ड की कार्यवाही को निरंकुश नहीं किया जाएगा और संस्थान के संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
विपक्षी राजनीतिक दलों ने भी इस मामले पर तीखी आलोचना की है। बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला शासन के भीतर गहरी भ्रष्टाचार की परतें उजागर करता है और सरकार को इस पर शीघ्र और निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह के मामलों को नजरअंदाज किया गया तो सार्वजनिक विश्वास में गिरावट आएगी।
आर्थिक दृष्टिकोण से इस जांच के परिणामों का प्रभाव बिहार की वित्तीय योजना पर भी पड़ सकता है। यदि प्रमुख अधिकारी के खिलाफ धनराशि की जाँच में बड़ी राशि जुड़ी पाई जाती है, तो यह राज्य के बजट और शिक्षा के विकास कार्यक्रमों में संशोधन की मांग कर सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार के मामलों से राज्य की निवेश आकर्षण क्षमता पर भी असर पड़ सकता है, विशेषकर जब विदेशी और निजी निवेशकों की नजर में पारदर्शिता महत्वपूर्ण
Updated: August 20, 2026
This raid shows that even reform‑oriented boards are not immune to the “money‑in‑the‑school” syndrome, risking the credibility of Bihar’s push for digital exams. If the probe proves the suspect’s wealth is ill‑gotten, the state may need to tighten oversight and rethink funding
Be First to Comment