27 अगस्त को शिक्षा विभाग के सचिव के नेतृत्व में आयोजित एक विशेष बैठक में छात्र प्रतिनिधियों ने दस प्रमुख मुद्दों पर अपनी चिंताएँ प्रस्तुत कीं। इन मुद्दों में परीक्षा की तारीखों का स्थिरकरण, आवेदन प्रक्रिया का डिजिटलरण, परीक्षा केन्द्रों की सुलभता, और परिणाम की समयसीमा शामिल थी। प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से एकल चरण परीक्षा की माँग की, जिससे कई बार होने वाले पुनः‑प्रवेश और पुनः‑परिक्षण की झंझट से बचा जा सके। विभाग ने इन सभी बिंदुओं को गौर से सुना और प्रत्येक पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिया, जिससे सभी पक्षों के बीच पारदर्शिता स्थापित हुई।
बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि एकल चरण परीक्षा के तहत सभी चयनात्मक चरण – लिखित परीक्षा, मेरिट लिस्ट, साक्षात्कार और डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन – एक ही सत्र में संपन्न किए जाएंगे। इस नई व्यवस्था में अभ्यर्थी को केवल एक बार ही परीक्षा में बैठना होगा, जिससे उनके समय और आर्थिक संसाधनों की बचत होगी। साथ ही, परीक्षा केन्द्रों की संख्या को भी बढ़ाया जाएगा, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के उम्मीदवारों को भी सुविधाजनक पहुंच मिल सकेगी।
विभाग ने यह भी बताया कि डिजिटल आवेदन पोर्टल को उन्नत किया जाएगा, जिससे तकनीकी glitches की संभावना न्यूनतम रहेगी।
प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने इस नई व्यवस्था को सराहते हुए कहा कि इससे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, क्योंकि अधिक योग्य उम्मीदवार एक बार में ही चयन प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एकल चरण परीक्षा से चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और उम्मीदवारों के मन में विश्वास का संचार होगा। इस बीच, कुछ अभ्यर्थियों ने अभी भी यह चिंता जताई कि एक ही बार में सभी चरणों का संचालन संभावित तकनीकी या प्रबंधकीय चुनौतियों को जन्म दे सकता है, लेकिन विभाग ने आश्वासन दिया कि सभी चरणों के लिए पर्याप्त प्रौद्योगिकी और मानवीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
विपरीत रूप में, छात्र संघ के कुछ वरिष्ठ सदस्य ने यह संकेत दिया कि परीक्षा की एकल चरण व्यवस्था में समय‑सीमा को कड़ाई से पालन किया जाएगा, जिससे उम्मीदवारों को तैयारी के लिये पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अनपेक्षित परिस्थिति उत्पन्न होती है तो विभाग को लचीलापन दिखाते हुए पुनः‑निर्धारण की संभावना रखनी चाहिए। इन बिंदुओं पर चर्चा के बाद सभी पक्षों ने एक सामान्य सहमति पर पहुँचे कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें संभावित जोखिमों का पूर्व‑निर्धारण शामिल होगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस निर्णय को शिक्षा के क्षेत्र में अभ्यर्थियों के हित में एक प्रगतिशील कदम कहा और कहा कि सरकार सभी शैक्षणिक नीतियों को सरल और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि नई व्यवस्था के कार्यान्वयन में सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
इस घोषणा के बाद, कई अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी व्यक्त की, जबकि कुछ ने अभी भी परीक्षा की तैयारी में अतिरिक्त समर्थन की मांग की।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो एकल चरण परीक्षा से परीक्षा संचालन में कुल लागत में कमी आएगी, क्योंकि कई चरणों के लिये अलग‑अलग केंद्रों और स्टाफ की व्यवस्था नहीं करनी पड़ेगी। इससे राज्य के बजट पर दबाव कम होगा और शैक्षिक विकास के लिये अधिक फंड अन्य आवश्यक क्षेत्रों में आवंटित किया जा सकेगा। साथ ही, अभ्यर्थियों को यात्रा और आवास खर्च में भी कमी मिलेगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को भी समान अवसर मिल सकेगा।
Updated: August 27, 2026
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