पत्र जमा नहीं किया, जिससे उनका पंजीकरण अधूरा रह गया। इस स्थिति ने परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों में गहरी चिंता उत्पन्न कर दी है, क्योंकि इंटर परीक्षा उनके शैक्षणिक आगे बढ़ने का मुख्य माध्यम है।
इंटरमीडिएट परीक्षा का पंजीकरण प्रक्रिया कई चरणों में
पूरा होता है। सबसे पहले छात्र अपने व्यक्तिगत विवरणों के साथ ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरते हैं, फिर उन्हें राज्य द्वारा जारी डमी सूचीकरण कार्ड प्राप्त होता है। इसके बाद, अभिभावक के हस्ताक्षर वाला घोषणा पत्र जमा करना अनिवार्य होता है, जिसे सत्यापित करने के बाद ही मूल सूचीकरण कार्ड जारी
किया जाता है। यह दो-स्तरीय प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सभी उम्मीदवार योग्य एवं योग्यताप्राप्त हों। इस वर्ष भी वही प्रक्रिया अपनाई गई, पर कुछ कारणों से कई छात्रों ने घोषणा पत्र नहीं भेजा।
मुख्य कारणों में तकनीकी समस्याओं से लेकर अभिभावकों की जागरूकता की कमी तक के कारक
शामिल हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्शन की कमी के कारण छात्र ऑनलाइन फॉर्म भरते समय बाधाओं का सामना कर रहे थे। साथ ही, कुछ अभिभावकों ने घोषणा पत्र के महत्व को नहीं समझा और समय पर जमा नहीं कर पाए। BSEB के प्रतिनिधियों ने बताया कि कुछ मामलों
में दस्तावेज़ों की असंगतियों के कारण भी फॉर्म अस्वीकार हो रहे हैं, जिससे छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई।
पटना जिले के कई स्कूलों में यह स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। प्रदेश के शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पटना में ही लगभग 2 हज़ार छात्रों
ने घोषणा पत्र नहीं जमा किया, जिससे उनका फॉर्म प्रक्रिया में बाधित हो गया। स्कूलों ने अभिभावकों को सूचित करने और फॉर्म पूरा करने के लिए कई बार स्मरण पत्र भेजे, पर जवाब कम ही मिला। इस जिले में शैक्षणिक संस्थानों ने भी छात्रों को सहायता प्रदान करने के प्रयास
किए, पर तकनीकी अड़चनें बनी रहीं।
BSEB ने इस मुद्दे को हल करने के लिए एक आपातकालीन बैठक बुलाई। समिति के चेयरमैन ने कहा कि वह छात्रों की परेशानियों को समझते हुए अतिरिक्त समय प्रदान करने पर विचार करेंगे, परन्तु नियमों के उल्लंघन को नहीं झेलेंगे। उन्होंने यह भी
संकेत दिया कि अगले सप्ताह तक एक विशेष हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी, जिससे छात्र और अभिभावक सीधे संपर्क कर सकें। इस पहल का उद्देश्य जल्द से जल्द सूचीकरण प्रक्रिया को पूरा करना और छात्रों को परीक्षा में भाग लेने का अवसर देना है।
उपरांत, कई छात्र और उनके अभिभावकों
ने शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने कहा कि उन्होंने समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज़ तैयार कर रखे थे, परंतु तकनीकी glitches के कारण फॉर्म नहीं भर सके। कुछ ने यह भी उजागर किया कि शिक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं दिया, जिससे कई परिवारों में
भ्रम बना। इन शिकायतों को देखते हुए, BSEB ने एक विशेष कमेटी गठित की, जो सभी अनुत्तरित फॉर्मों की समीक्षा करेगा और आवश्यकतानुसार फॉर्म को मान्य करने की प्रक्रिया तेज करेगा।
शिक्षा क्षेत्र के विभिन्न संगठनों ने भी इस विकास पर टिप्पणी की। बिहार शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने
कहा कि परीक्षा के दायरे में ऐसी बाधाएं न हों, इसके लिए डिजिटल साक्षरता बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों में इंटरनेट सुविधा के विस्तार को प्राथमिकता दी जाए। इसी बीच, छात्र प्रतिनिधियों ने भी अपनी आवाज़ उठाई, कि उन्हें स्पष्ट दिशा-निर्देशों
के बिना इस प्रक्रिया में कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से इस घटना को देखते हुए, बिहार की मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे को शीघ्रता से सुलझाने के
लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द वैकल्पिक उपाय तैयार करे, जिससे किसी भी छात्र को परीक्षा से बाहर न किया जाए। यह बयान राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में जारी किया गया, जब राज्य में शिक्षा सुधारों की मांग
Updated: September 7, 2026
Bihar’s BSEB has stalled the issuance of original admission cards for thousands of intermediate candidates who failed to submit the parent‑signed declaration form, prompting anxiety among students gearing up for the exams. Authorities are considering extending deadlines and setting up a help‑line to clear pending applications and prevent any aspirant from missing the test.
The BSEB’s paperwork bottleneck reveals how fragile Bihar’s push for digital enrollment is; without robust internet and parent outreach, the “streamlined” system simply re‑creates exclusion.
If the state doesn’t upgrade rural connectivity and simplify verification, each missed declaration will turn into a permanent learning gap
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