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भू-धस्सन के बाद न्यू फरक्का-तिलडांगा रेलखंड में सभी ट्रेन सेवाएं फिर से शुरू

न्यू फरक्का‑तिलडांगा रेलखंड में हुई भू‑धस्सन के बाद, भारतीय रेलवे ने इस मार्ग की पूरी मरम्मत कर ली है और आज सुबह से सामान्य ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू कर दिया है। पूर्वी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि सभी सुरक्षा जांचें पूरी हो चुकी हैं और अब यात्रियों को समय‑सारिणी के अनुसार यात्रा करने की सुविधा मिल जाएगी। यह कदम कई हफ्तों से चल रहे व्यवधान को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे इस क्षेत्र के व्यापारिक और दैनिक आवागमन पर असर पड़ा था।

भू‑धस्सन से पहले, न्यू फरक्का और तिलडांगा के बीच का रेलखंड मालदा जिले के प्रमुख परिवहन धागों में से एक था। सितंबर के प्रारम्भ में लगातार हुई भारी बारिश ने इस क्षेत्र में जलस्तर को असामान्य रूप से बढ़ा दिया, जिससे कई स्थानों पर जल‑संकट उत्पन्न हुआ। विशेषकर 2‑3 सितंबर की रात में तेज़ बाढ़ ने रेललाइन के नीचे स्थित भू‑संरचना को कमजोर कर दिया, जिससे ट्रैक के कई हिस्सों में फटना और बिछड़ना देखा गया।

रेलवे विभाग ने इस आपदा के बाद तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम भेजी, लेकिन प्रारम्भिक जाँच में यह स्पष्ट हुआ कि साधारण मरम्मत से काम नहीं चलेगा। भू‑धस्सन की सीमा विस्तृत थी, जिससे ट्रैक, पिलर और सिग्नल प्रणाली सभी प्रभावित हुए। इस कारण, प्रारम्भिक अनुमान के अनुसार मरम्मत कार्य को कम से कम दो महीने लगेंगे, परन्तु विभाग ने तत्परता से विस्तृत योजना बनाकर कार्य को तेज़ी से आगे बढ़ाया।

मरम्मत कार्य का मुख्य चरण भू‑स्थिरता को सुनिश्चित करना था। इंजीनियरों ने प्रभावित क्षेत्रों में नई ग्रेडियंट‑ड्रेनेज प्रणाली स्थापित की और मिट्टी की स्थिरता बढ़ाने हेतु जियो‑टेक्सटाइल सामग्री का प्रयोग किया। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त रेल ट्रैक को पूरी तरह से बदल दिया गया, जबकि पुल और बंधन बिंदुओं को पुनः सुदृढ़ किया गया। इस प्रक्रिया में लगभग १.५ करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत लगाई गई, जो आपातकालीन निधि से प्रदान की गई।

सुरक्षा जांच के चरण में, स्वतंत्र तकनीकी समिति ने सभी निर्माण कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने ट्रैक के समतलता, सिग्नलिंग प्रणाली और इलेक्ट्रिकल कनेक्शन की पूर्णता की पुष्टि की। साथ ही, नई स्थापित जल निकासी प्रणाली की दक्षता को परखने के लिए सिमुलेशन परीक्षण किए गए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि आगामी वर्षा में भी इस संरचना में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं रहने की संभावना है।

इन सभी कदमों के बाद, पूर्वी रेलवे ने 5 सितंबर को आधिकारिक तौर पर ट्रेन सेवाओं को पुनः आरंभ किया। इस पुनः आरंभ में कई प्रमुख एक्सप्रेस और माल गाड़ियों को शामिल किया गया, जिससे व्यापारिक माल की आवाजाही फिर से सुगम हुई। यात्रियों को भी इस मार्ग के पुनः खुलने की सूचना विभिन्न माध्यमों से दी गई, और टिकट बुकिंग प्रणाली को तुरंत सक्रिय किया गया।

प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय नेताओं ने इस कदम की सराहना की। मालदा जिले के सांसद ने कहा कि रेलवे ने इस आपदा के बाद त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान कम हुआ है। वहीं, न्यू फरक्का के नगर प्रमुख ने कहा कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्र के कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुँच को भी सुदृढ़ करेगा।

रेलवे कर्मचारियों के संघ ने भी इस पुनः आरंभ को सकारात्मक रूप में देखा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मेहनत और तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से इस जटिल कार्य को समय पर पूरा किया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए नियमित निरीक्षण और समय‑समय पर बुनियादी ढाँचे की मजबूती की आवश्यकता है।

वाणिज्य मंडल के प्रमुख ने कहा कि रेलमार्ग के बंद होने से स्थानीय व्यापारियों को बड़ी आर्थिक हानि हुई थी। अब जब मार्ग खुल गया है, तो अपेक्षित है कि वस्तु प्रवाह में सुधार होगा और कीमतों में स्थिरता आएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कई छोटे व्यवसायी इस सुविधा का उपयोग करके अब अपने माल को अधिक दूरस्थ बाजारों तक पहुँचाने की योजना बना रहे हैं।

आर्थिक विश्लेषकों ने इस पुनः आरंभ को क्षेत्रीय विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत माना। उन्होंने कहा कि रेलमार्ग के बिना इस क्षेत्र का आर्थिक विकास काफी हद तक बाधित रहा था, विशेषकर कृषि आधारित उद्योगों के लिए। अब ट्रैक के पूर्ण संचालन से रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है और इससे स्थानीय आय में वृद्धि होगी।

सामाजिक दृष्टिकोण से, इस रेलमार्ग की पुनः सक्रियता ने यात्रियों की दैनिक यात्रा को सरल बनाया है। कई स्कूल‑कॉलेज के छात्र अब समय पर अपने गंतव्य तक पहुँच पाएंगे, जिससे शिक्षा में बाधा नहीं आएगी। साथ ही, आपातकालीन सेवाओं के लिए भी तेज़ पहुँच संभव हो गई है, जिससे चिकित्सा आपातकाल में सहायता पहुँचना आसान रहेगा।

राजनीतिक रूप में, इस कदम ने केंद्र और राज्य

Updated: September 6, 2026

Insight: रेलवे की यह तकनीकी जीत सिर्फ ट्रैक की मरम्मत नहीं, बल्कि बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की लचीलापन लाने की नई दिशा है। यह प्रतिक्रिया क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के सूनेपे को तुर

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