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आंध्र प्रदेश में 10-12 सितंबर को IATO का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलन, निवेशकों और टूर ऑपरेटरों को मिलेगा बड़ा मंच

Vizag में 10 से 12 सितंबर तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटन ऑपरेटर (IATO) सम्मेलन को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार ने आधिकारिक घोषणा की है।
पर्यटन मंत्री कंदुला दुर्गेश ने बताया कि इस बैठक में देश‑विदेश के प्रमुख टूर ऑपरेटर, होटलों, रिसॉर्ट्स और पर्यटन स्थल के प्रतिनिधि एकत्रित होंगे, जिससे आंध्र प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने का मंच तैयार होगा। यह पहल राज्य के पर्यटन सेक्टर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से की जा रही है।

आंध्र प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन विकास के लिये कई पहलें शुरू की हैं, जिनमें कोस्टलाइन डिवेलपमेंट, इको‑टूरिज्म और हेरिटेज प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। सरकार ने विशेष रूप से द्वीपसमूह, समुद्र तट और प्राकृतिक अभयारण्यों को प्रमुख आकर्षण बनाते हुए निवेश को प्रोत्साहित किया है। इस संदर्भ में IATO सम्मेलन को एक रणनीतिक अवसर माना जा रहा है, जहाँ विभिन्न स्टेकहोल्डर्स अपने उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित कर सकते हैं।

पिछले दशक में आंध्र प्रदेश की पर्यटन आय में स्थिर वृद्धि देखी गई है, परंतु प्रतिस्पर्धी राज्यों के साथ तुलना करने पर अभी भी अंतर बना हुआ है। विशेष रूप से दक्षिणी भारत में केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे क्षेत्रों ने अधिक विदेशी आगंतुकों को आकर्षित किया है। इस कारण राज्य ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति को सुदृढ़ करने की आवश्यकता महसूस की, और IATO सम्मेलन को इस दिशा में एक प्रमुख कदम के रूप में निर्धारित किया।

सम्मेलन की तैयारियों में राज्य पर्यटन विभाग ने विभिन्न स्थानीय निकायों और निजी कंपनियों के साथ सहयोग स्थापित किया है। विज़ाग के विभिन्न होटल एवं रिसॉर्ट्स को विशेष बुटीक एरिया में सजाया गया है, जहाँ संभावित निवेशकों को स्थल की सुविधाएँ, परिवहन नेटवर्क और बुनियादी ढाँचा दिखाया जाएगा। साथ ही, राज्य ने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर एक इंटरैक्टिव बुकिंग पोर्टल विकसित किया है, जिससे प्रतिभागियों को रीयल‑टाइम में बुकिंग और सहयोग स्थापित करने की सुविधा मिलेगी।

मुख्य एजेंडा में पर्यटन उत्पादों का ब्रांडिंग, स्थायी पर्यटन मॉडल, और नई तकनीकों का उपयोग शामिल है। विशेष सत्रों में वर्चुअल रियलिटी टूर, एआई‑आधारित मार्केटिंग और स्मार्ट सिटी पहल पर चर्चा होगी। इस दौरान राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल जैसे कि अरुणाचल, कृष्णा द्वीप समूह और कोरल रीफ्स को विशेष रूप से उजागर किया जाएगा, जिससे संभावित टूर ऑपरेटर इन स्थलों को अपने पैकेज में शामिल करने की संभावना बढ़ेगी।

सम्मेलन में कई अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटरों ने पहले ही भाग लेने की पुष्टि की है, जिनमें यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इन कंपनियों ने आंध्र प्रदेश के विविध परिदृश्य और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए सहयोग की इच्छा जताई है। इसके अलावा, कुछ अमेरिकी और ब्रिटिश यात्रा एजेंसियों ने भी अपने प्रतिनिधियों को भेजने का इरादा व्यक्त किया है, जिससे वैश्विक बाजार में राज्य की पहुँच में विस्तार की उम्मीद की जा रही है।

आधिकारिक तौर पर आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस मंच से न केवल होटल और रिसॉर्ट्स को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय कारीगर, हस्तशिल्प और खानपान उद्योगों को भी सीधा व्यापार अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उद्यमों को इस सम्मेलन के माध्यम से बड़े टूर पैकेजों में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जिससे रोजगार सृजन और आय वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

राज्य के प्रमुख पर्यटन कंपनियों ने भी इस पहल को सराहा है। विज़ाग के एक प्रमुख होटल समूह के सीईओ ने कहा कि IATO सम्मेलन से उन्हें अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुँचने का एक सुनहरा अवसर मिलेगा और यह निवेशकों के लिये भी आकर्षक मंच सिद्ध होगा। वहीं, एक स्वतंत्र यात्रा एजेंसी के प्रमुख ने उल्लेख किया कि इस प्रकार के कार्यक्रम स्थानीय पर्यटन को व्यवस्थित रूप से प्रमोट करने में सहायक होते हैं और यह क्षेत्रीय विकास के लिये आवश्यक है।

विपक्षी दल के नेता ने इस पहल पर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की। कुछ ने कहा कि पर्यटन में अधिक निवेश से सामाजिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जबकि अन्य ने इस अवसर को राज्य की आर्थिक प्रगति के लिये सकारात्मक माना।

The Vizag IATO summit could turn Andhra Pradesh from a regional beach stop into a curated, tech-driven destination brand, forcing competitors like Kerala to defend their niche with deeper digital experiences.

If the AI-powered booking portal and VR showcases translate into actual tour-package contracts, the ripple effects could extend beyond tourism to hospitality, transport, local handicrafts and other service sectors. The summit could also attract fresh investment and encourage tour operators to build longer, multi-destination itineraries across the state. However, the real measure of success will be whether the technology-led promotion generates sustained visitor growth, higher tourist spending and repeat bookings rather than remaining a one-time showcase for the state’s tourism ambitions.

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