मराठी भाषा सीखने को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने 2023 में कठोर नियम लागू किए थे, जिसके तहत सभी सार्वजनिक परिवहन के ड्राइवरों को छह महीने में मराठी का मूलभूत ज्ञान हासिल करना अनिवार्य था। इस कदम का उद्देश्य स्थानीय भाषा को सम्मान देना और यात्रियों के साथ संवाद को आसान बनाना था। हालांकि, कई गैर‑मराठी मूल के चालक इस समयसीमा को पूरा नहीं कर पा रहे थे, जिससे कई मामलों में निलंबन या जुर्माने की धमकी दी जा रही थी।
इन नियमों ने सामाजिक ताने‑बाने में तनाव पैदा किया, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ मराठी‑बोलने वाले और अन्य भाषा‑भाषी लोगों का मिश्रण अधिक था। कई ऑटो चालक संघों ने कहा था कि वे इस नीति को “अधिनियमित” मानते हैं और इसे लागू करने में सरकार की सहायता चाहते हैं। इसी बीच, महाराष्ट्र के कई नागरिक संगठनों ने भाषा अधिकारों की रक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किए थे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद को सुलझाने के लिए आज सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने बताया कि सरकार ने सभी गैर‑मराठी चालक को एक साल की अतिरिक्त अवधि देने का फैसला किया है, ताकि वे बिना किसी दंड के भाषा सीख सकें। इस दौरान, सरकार एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और ऑनलाइन सीखने के मॉड्यूल प्रदान करने की योजना भी बना रही है। फडणवीस ने कहा, “हम सभी नागरिकों की सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करते हैं, लेकिन भाषा का ज्ञान भी सामाजिक एकता का आधार है।”
इस घोषणा के बाद, मुंबई के विभिन्न ठेकेदारों और ड्राइवरों के समूहों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। कई गैर‑मराठी ऑटो चालक ने अपने वाहन को रुकाते हुए कैमरे के सामने खड़े होकर खुशी के आँसू बहाए और मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहा। उन्होंने बताया कि पहले की कठोर समयसीमा के कारण उनका व्यवसाय गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था, और अब उन्हें भविष्य में स्थिरता का भरोसा महसूस हो रहा है।
एक प्रमुख ऑटो चालक संघ के प्रमुख ने कहा, “हमें यह राहत मिलना हमारे लिए एक नई शुरुआत है। हम अब मराठी सीखने में पूरी लगन से कार्य करेंगे और साथ ही यात्रियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करेंगे।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस अवधि में सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण सामग्री और भाषा‑कोर्स को लेकर उन्हें उत्सुकता है।
वहीं, महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग ने बताया कि अतिरिक्त एक साल के दौरान लगभग पाँच हजार प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक सत्र दो घंटे का होगा। विभाग ने कहा कि इन सत्रों में बुनियादी शब्दावली, व्याकरण और रोज़मर्रा की बातचीत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म भी विकसित किया जा रहा है, जिससे चालक अपने समयानुसार सीख सकते हैं।
भाषा‑विशेषज्ञों ने इस कदम को सकारात्मक रूप से सराहा, पर साथ ही यह चेतावनी भी दी कि केवल समय की बढ़ोतरी से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा, “यदि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पहुँच सुनिश्चित नहीं की गई, तो फिर भी कई चालक पीछे रह सकते हैं। इसलिए, सरकार को प्रशिक्षण सामग्री को स्थानीय स्तर पर अनुकूलित करना चाहिए।”
राजनीतिक विश्लेषकों ने इस निर्णय को मौजूदा सामाजिक तनाव को कम करने की दिशा में एक समझदार कदम के रूप में देखा। उन्होंने बताया कि भाषा‑नीति को लागू करने में संतुलन बनाना आवश्यक है, ताकि आर्थिक वर्गों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। इस संदर्भ में, कई सांसदों ने कहा कि यह निर्णय राज्य की बहु‑भाषाई पहचान को सुदृढ़ करेगा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो, गैर‑मराठी चालकों को मिली राहत उनके दैनिक आय में स्थिरता लाएगी। कई चालक ने कहा कि पिछले साल में भाषा‑अनुपालन न करने के कारण उनके लाइसेंस निलंबित हुए, जिससे आय में बड़ी गिरावट आई। अब यह अतिरिक्त समय उन्हें
Updated: August 28, 2026
– The extra one‑year deadline lets non‑Marathi auto and taxi drivers meet language requirements without facing fines or license suspensions.
– By facilitating language acquisition, the measure seeks to ease passenger communication and lessen community friction.