करिष्मा फायरवर्क्स, जो श्रीविलिपुत्र के पास स्थित है, पिछले कुछ सालों से विभिन्न सुरक्षा उल्लंघनों के कारण कई बार निरीक्षण के दायरे में आया है। इस इकाई में काम करने वाले कई श्रमिकों ने पहले भी असुरक्षित परिस्थितियों की शिकायत की थी, परंतु सुधारात्मक कदमों की कमी रही। वहीं, मीणम्पत्ति के फायरवर्क्स यूनिट का इतिहास भी कई बार अनियमितताओं से जुड़ा रहा है, जहाँ छोटी‑छोटी दुर्घटनाओं ने कभी‑कभी काम की गति को धीमा किया है।
इन दोनों इकाइयों के पास आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की कमी और उचित प्रशिक्षण की अनुपलब्धता पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय श्रमिक संघों का कहना है कि कई बार कर्मचारियों को बिना उचित सुरक्षा गियर के ही काम पर रखा जाता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। इस संदर्भ में, जिला प्रशासन ने पिछले साल कुछ सुधारात्मक आदेश जारी किए थे, लेकिन उनका पूर्ण कार्यान्वयन नहीं हो पाया।
करिष्मा फायरवर्क्स में आग लगते ही, आसपास के निवासी और कर्मचारी तुरंत स्थान छोड़ने के लिए भागे। धुएँ की चटक धारा ने पूरे क्षेत्र को अंधकार में डुबो दिया, और कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। अग्निशामकों ने कई घंटे तक संघर्ष किया, परंतु आग के तीव्रता और रसायनिक सामग्री के कारण उन्हें काबू में लाना मुश्किल रहा।
मीणम्पत्ति के फायरवर्क्स में भी समान परिस्थितियां उत्पन्न हुईं। अचानक फैली आग ने कारखाने के अंदर काम कर रहे दो श्रमिकों को घेर लिया। स्थानीय लोग और पास के किसान तुरंत मदद के लिए इकट्ठा हुए, लेकिन आग की तेज़ी ने उन्हें रोक दिया। फायरब्रिगेड ने इस इकाई में भी कई घंटे तक फायरफाइटिंग की, और अंततः आग को नियंत्रित किया गया।
स्थानीय प्रशासन ने तुरंत दोनों घटनास्थलों की जांच का आदेश दिया। पुलिस ने दुर्घटना स्थल से जमा साक्ष्य, वीडियो फुटेज और गवाहों के बयानों को संकलित किया, और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की संभावनाओं को उजागर करने का प्रयास किया। साथ ही, जिला स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।
जिला अधिकारी ने कहा कि यह दोहरी दुर्घटना क्षेत्र में फायरवर्क्स उद्योग की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाती है। उन्होंने कहा कि सभी फायरवर्क्स इकाइयों में सुरक्षा मानकों की पुन: जाँच की जाएगी, और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, स्थानीय श्रमिक संघ ने भी मांग की कि सभी कामगारों को उचित सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
विरडुन्नगर के उद्योग मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने पहले भी फायरवर्क्स सेक्टर में सुरक्षा को लेकर कई नीतियों को लागू किया है, लेकिन जमीन पर उनका कार्यान्वयन अधूरा रह गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए नई दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, और प्रत्येक इकाई को अनिवार्य रूप से निरीक्षण में लाया जाएगा।
सरकार ने इस हादसे के बाद तत्काल प्रभाव से सभी फायरवर्क्स इकाइयों में सुरक्षा ऑडिट करवाने का आदेश दिया है। इस प्रक्रिया में रासायनिक भंडारण, बिजली सप्लाई और आपातकालीन निकासी मार्गों की जाँच की जाएगी। यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो तत्काल लाइसेंस निरस्त किया जाएगा और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो, इस क्षेत्र की फायरवर्क्स उद्योग राज्य की आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है, और कई छोटे एवं मध्यम उद्यम इस व्यवसाय पर निर्भर हैं। लेकिन सुरक्षा की उपेक्षा के कारण उत्पन्न हुई यह त्रासदी न केवल मानवीय हानि का कारण बनी, बल्कि उद्योग के प्रति निवेशकों की भरोसे में भी धक्का लगा सकती है।
समाजिक प्रभाव के लिहाज़ से, इस प्रकार की दुर्घटनाएं स्थानीय समुदायों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। कई परिवारों ने अपने
Updated: September 3, 2026
The twin fires highlight systemic safety gaps in the region’s fireworks sector, prompting authorities to order comprehensive audits of all units.
The incidents may affect worker protection standards and investor confidence in a key state industry.
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