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जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट के प्रथम CEO नियुक्त, जबकि नेपाल में बाढ़ ने 1,200 मौतें और 590 विदेशियों को लापता कर

जितेंद्र मिश्रा, जो पहले ऑपरेशन सिंदूर में वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभालने वाले प्रमुख थे, को अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है।
इस निर्णय से ट्रस्ट के प्रशासनिक ढाँचे में पेशेवर प्रबंधन की उम्मीदें बढ़ी हैं। साथ ही, नेपाल में बाढ़ से हुई विनाशकारी तबाही ने 1,204 की मौत और 3,900 के अनुमानित लापता लोगों की संख्या दर्ज कराई, जिसमें 590 विदेशियों के भी हल नहीं मिल पाए हैं। दोनों घटनाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंताओं को उजागर कर रही हैं।जितेंद्र मिश्रा का करियर भारतीय वायुसेना में रिटायर्ड एयर मार्शल के रूप में शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने कई उच्चस्तरीय ऑपरेशनों में नेतृत्व किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी रणनीतिक सोच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने उन्हें वैश्विक सुरक्षा मंच पर प्रतिष्ठित बनाया। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, राम मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें अपने CEO के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया, जिससे ट्रस्ट के विकास और प्रबंधन में नई ऊर्जा का संचार हो सके।

त्रिपुरारी, उत्तर प्रदेश में स्थित अयोध्या का राम मंदिर प्रोजेक्ट 2020 में शुरू हुआ, और अब तक कई चरणों में कार्यवाही हुई है। ट्रस्ट का गठन 2019 में हुआ, जिसमें विभिन्न सरकारी और धार्मिक निकाय शामिल हैं। CEO की भूमिका में न केवल दैनिक प्रशासनिक कार्य, बल्कि वित्तीय प्रबंधन, सार्वजनिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की देखरेख भी शामिल है। मिश्रा की नियुक्ति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नेपाल में अप्रैल के अंत में शुरू हुई बाढ़ ने देश के दक्षिणी भाग को तबाह कर दिया। जलवायु परिवर्तन के कारण तीव्र बरसात और तेज़ बहाव ने कई गांवों को पानी में डुबो दिया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने बताया कि बाढ़ की तीव्रता पिछले दशकों में सबसे अधिक रही। इस आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में संचार टूट गया, जिससे राहत कार्य में कठिनाइयाँ बढ़ गईं।

बाढ़ के बाद राहत कार्य में सरकारी एजेंसियों, स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों का सहयोग देखा गया। नेपाल सरकार ने आपातकालीन स्थिति घोषित कर, सेना और पुलिस को तैनात किया। हवाई अड्डों से हेलिकॉप्टरों द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति पहुँचाने का प्रयास किया गया। परन्तु बाढ़ के कारण सड़कों का बंटवारा और लैंडलाइन टेलीफोन नेटवर्क टूटने से कार्य में देरी हुई।

विदेशी नागरिकों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही। 34 देशों के कुल 590 विदेशियों की पहचान अभी भी नहीं हो पाई है, जिससे कई देशों की राजनैतिक मिशन ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष कार्रवाई की मांग की। नेपोलियन, यूएसए और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने अपने दूतावासों से मदद की अपील की। इस दौरान, नेपाल की विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की पुकार की।

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर राजनैतिक जगत की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रही हैं। कुछ नेता इस कदम को ट्रस्ट के प्रशासनिक मानकों को उन्नत करने के रूप में सराहते हैं, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताई। भारतीय गृह मंत्रालय ने कहा कि ट्रस्ट का प्रबंधन पूरी तरह से भारतीय कानूनों के तहत होगा, और कोई भी विदेशी प्रभाव नहीं रहेगा। विपक्षी दल ने इस नियुक्ति को धर्म-राजनीति का मिश्रण करार दिया।

वित्तीय क्षेत्र से भी इस निर्णय पर ध्यान गया है। राम मंदिर ट्रस्ट को अब लगभग 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का प्रबंधन करना होगा, जिसमें निर्माण कार्य, पर्यटक सुविधाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि मिश्रा के प्रबंधन कौशल से इन निधियों की पारदर्शिता और कुशल उपयोग सुनिश्चित हो सकता है। साथ ही, उन्हें आयकर विभाग और अन्य नियामक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर वित्तीय रिपोर्टिंग को सुदृढ़ करना होगा।

नेपाल में बाढ़ के सामाजिक प्रभाव गहरे हैं। हजारों परिवारों को अस्थायी शरणस्थल में रहना पड़ा, और कई ने अपना घर-धरोहर खो दिया। स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित रोगों के प्रकोप की चेतावनी जारी की, जबकि शिक्षा विभाग ने प्रभावित विद्यालयों को पुनः खोलने की योजना बनाई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की।

आर्थिक दृष्टि से नेपाल की बाढ़ ने कृषि, व्यापार और पर्यटन पर गंभीर दाग लगाया है। प्रमुख कृषि क्षेत्रों में धान और पिकों का नुकसान हुआ, जिससे किसानों की आय में गिरावट आई। व्यापारिक मार्गों के बंद होने से वस्तु आपूर्ति में बाधा आई, और कई छोटे उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ा। पर्यटन क्षेत्र, जो नेपाल की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बाढ़ के कारण बंद हो गया, जिससे विदेशी मुद्रा आय में गिरावट देखी गई।

 

Updated: September 3, 2026


Former Air Chief Marshal Jitendra Misra has been appointed CEO of the Ayodhya Ram Temple Trust, a move seen as bringing professional, military‑grade management to the temple’s multi‑billion‑rupee operations. Meanwhile, Nepal’s catastrophic floods have left over 1,200 dead and thousands missing, prompting a massive rescue effort and international calls for assistance.

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