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चिराग पासवान को लिखित हत्या‑धमकी, गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा स्तर पर त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया।

चिराग पासवान को फिर एक बार जान‑लेवा धमकी प्राप्त हुई, जिसका खुलासा अज्ञात स्रोत से आए पत्र में किया गया है। केंद्रीय मंत्री एवं लखनऊ के सांसद को इस पत्र में स्पष्ट रूप से हत्या की बात लिखी गई थी, जिससे सुरक्षा तंत्र की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगा है। पत्र को प्राप्त

करने के बाद तुरंत मामला गृह मंत्रालय को सौंपा गया, जहाँ इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की गंभीर चुनौती के रूप में वर्गीकृत किया गया। इस घटना ने न केवल केंद्र सरकार बल्कि बिहार की राज्य प्रशासन को भी अचेत कर दिया, क्योंकि पासवन बिहार के राजनैतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

चिराग पासवन का राजनीतिक सफ़र 1996 में शुरू हुआ, जब वे अपने पिता, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामनाथ पासवन के बाद पहली बार संसद के सदस्य बने। तब से वे विभिन्न केंद्रीय पदों पर रह चुके हैं, जिनमें युवा कल्याण और खेल मंत्रालय की अस्थायी देखरेख भी शामिल है। बिहार में उनका प्रभाव

खासकर सामाजिक और आर्थिक विकास के मुद्दों पर केंद्रित रहा है, जिससे उनका राजनीतिक दायरा स्थानीय स्तर पर भी विस्तारित है। पिछले साल के चुनावों में उनके निर्वाचन क्षेत्र में उन्होंने बड़ी जीत हासिल की, जिससे उनकी सुरक्षा व्यवस्था को विशेष महत्व मिला।

पिछले कुछ महीनों में पासवन को कई बार

धमकी भरे संदेशों और फ़ोन कॉलों की सूचना मिली थी, लेकिन उन सभी को तकनीकी रूप से ट्रेस नहीं किया जा सका। अक्टूबर में उन्हें एक अज्ञात ई‑मेल मिला, जिसमें भी उनकी जान लेने की धमकी दी गई थी; उस पर भी व्यापक जांच हुई थी, परन्तु ठोस प्रमाण नहीं मिल पाया।

इस बार के पत्र में लिखित रूप में हत्या की योजना का उल्लेख है, जिससे इसे पहले की डिजिटल धमकियों से अधिक गंभीर माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने पत्र को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा, ताकि हस्तलिखित शैली, कागज का प्रकार और शर्तों से संभावित स्रोत का पता लगाया जा

सके।

पत्र की प्राप्ति के बाद गृह मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग और विशेष सुरक्षा बलों को सौंप दिया गया है, और सभी संभावित स्रोतों की जांच की जाएगी। साथ ही, मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना एजेंसियों को

सूचित कर, अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावना भी तलाशने का निर्देश दिया। पत्र की सामग्री को देखते हुए, उन्होंने इस खतरे को तुरंत कार्यवाही योग्य माना और सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्त करने का संकेत दिया।

बिहार सरकार ने भी इस घटना पर आपातकालीन बैठक बुलाई। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा

कि यदि किसी भी प्रकार की हत्या का इरादा स्पष्ट है, तो उसे रोकना राज्य की प्राथमिकता होगी। उन्होंने पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया कि पासवन की व्यक्तिगत सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जाए, साथ ही उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। इस बीच, बिहार पुलिस ने स्थानीय

स्तर पर सूचना संग्रह शुरू कर दिया, और संभावित स्थानीय स्रोतों को खोजने के लिए साक्षात्कार किए।

सीआरपीएफ (सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फोर्स) को भी इस मामले में विशेष टीम असाइन की गई है। उन्होंने बताया कि पत्र में प्रयुक्त भाषा और शैलियों के आधार पर संभावित दायरा निर्धारित करने का प्रयास

किया जा रहा है। फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, कागज की मोटाई और स्याही के विश्लेषण से यह संभावना बनी है कि पत्र किसी निजी व्यक्ति या समूह द्वारा तैयार किया गया हो सकता है, जो पासवन के राजनैतिक निर्णयों से असंतुष्ट हो।

पात्रों की प्रतिक्रिया के संदर्भ में, चिराग पासवन ने

सार्वजनिक रूप से कहा कि वे इस प्रकार की हिंसक धमकियों को अस्वीकार करते हैं और सभी कानूनी उपायों को अपनाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उन्हें कोई भी व्यक्तिगत जोखिम नहीं उठाना चाहिए, और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से इस

मुद्दे का समाधान निकाला जाएगा। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, यह दावा किया कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई न करने से लोकतंत्र के मूल सिद्धांत कमजोर होते हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने पत्रकारों से कहा कि सरकार ने पहले ही

सभी आवश्यक कदम उठाए हैं और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के उच्चतम स्तर पर लाया गया है और इसे राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखकर न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया जाएगा। विपक्षी नेता

Updated: September 2, 2026

– The threat to a senior minister underscores the need to evaluate and strengthen existing security mechanisms for public officials.
– It prompts coordination between central and state agencies, illustrating how inter‑governmental response procedures are activated in high‑risk cases.

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