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उपमुख्यमंत्री के घर के सामने 3,284 जूनियर असिस्टेंट टाइपिस्ट पदों की भर्ती में देरी को लेकर हजारों अभ्यर्थियों ने विरोध किया.

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के निवास के सामने आज हजारों सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी इकट्ठा हुए, जो जूनियर असिस्टेंट टाइपिस्ट के 3,284 पदों की भर्ती में हो रही देरी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि चयन प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब से

उनके करियर और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री से तत्काल भर्ती प्रक्रिया को तेज़ करने तथा पारदर्शी चयन मानदंड लागू करने की मांग की। यह विरोध सोमवार को सुबह से ही शुरू हुआ और कई घंटे तक जारी रहा।

भर्ती का मामला पहले इस वर्ष

के शुरुआती महीनों में शुरू हुआ था, जब राज्य सरकार ने जूनियर असिस्टेंट टाइपिस्ट पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे। कुल 1.2 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिससे चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर दस्तावेज़ी जाँच, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार शामिल थे। प्रारंभिक योजना के अनुसार,

चयन प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर समाप्त कर सभी पदों को भरने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, विभिन्न कारणों से यह समयसीमा बार-बार बढ़ी, जिससे अभ्यर्थियों में असंतोष उत्पन्न हुआ।

वर्तमान में भर्ती प्रक्रिया में कई चरणों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता बताई जा रही है। राज्य सरकार ने

पहले दो चरणों—आवेदन सत्यापन और लिखित परीक्षा—को पूरा कर लिया था, परंतु साक्षात्कार और अंतिम मेरिट सूची जारी करने में देर हो रही है। आधिकारिक कारण के रूप में तकनीकी glitches, अभ्यर्थी डेटा का बड़े पैमाने पर सत्यापन, और चयन समिति में बदलाव को बताया गया है। इन कारणों

को लेकर कई विशेषज्ञों ने प्रक्रिया की जटिलता और प्रशासनिक अकार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने विभिन्न साधनों से अपने असंतोष को व्यक्त किया। उन्होंने ध्वनि व्यवस्था, पोस्टर, और बड़े पैनल पर लिखित मांगें रखी। कई ने उपमुख्यमंत्री के घर के बाहर जलापूर्ति के लिए जल

टैंकों का उपयोग किया, जिससे सुरक्षा कर्मियों को अतिरिक्त तनाव का सामना करना पड़ा। पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नियंत्रित रखने के लिए न्यूनतम बल प्रयोग किया, लेकिन कुछ क्षेत्रों में छोटी-छोटी झड़पें भी हुईं। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे आगे भी इस मुद्दे को उठाते रहेंगे जब तक

उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।

उपमुख्यमंत्री ने बाद में एक संक्षिप्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी के लिए खेद व्यक्त किया गया है और शीघ्रता से समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज़ी कार्य और साक्षात्कार जल्द से

जल्द पूरा किया जाएगा, तथा अंतिम चयन सूची को दो हफ्तों के भीतर सार्वजनिक किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने अभ्यर्थियों से धैर्य रखने की अपील की और कहा कि प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

राज्य सरकार ने इस मुद्दे को हल करने

के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें प्रमुख अधिकारी, मानव संसाधन विशेषज्ञ और तकनीकी सलाहकार शामिल हैं। समिति को अगले पाँच दिनों में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, जिसमें प्रक्रिया में हुए विलंब के कारण, सुधारात्मक कदम और नई समयसीमा का विवरण

होगा। इस रिपोर्ट को उपमुख्यमंत्री के कार्यालय में भेजा जाएगा और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने कहा कि यह कदम अभ्यर्थियों के भरोसे को पुनः स्थापित करने के लिए आवश्यक है।

संबंधित विभाग ने भी इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि भर्ती

प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर ले जाकर पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि आगामी साक्षात्कार ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जाएगा, जिससे समय और लागत दोनों में बचत होगी। विभाग ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की पक्षपात या अनियमितता नहीं होगी और सभी

मानक प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। इस दिशा में किए जाने वाले कदमों से अभ्यर्थियों को आशा है कि प्रक्रिया तेज़ और निष्पक्ष होगी।

पिछले कुछ हफ़्तों में इस भर्ती के संबंध में कई सामाजिक संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने भी अपने-अपने बयानों के माध्यम से समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने

कहा कि नौकरियों का अभाव और भर्ती में अनिश्चितता युवाओं की आर्थिक स्थिति को अस्थिर कर रही है। इन संगठनों ने सरकार से अपील की कि वे भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता दें और भविष्य में ऐसी देरी को रोकने के लिए संरचनात्मक सुधार करें। उनके अनुसार, रोजगार के

Updated: September 2, 2026

The protest highlights widespread concern over delays in filling 3,284 junior assistant typist positions, affecting job seekers’ career prospects.
The government’s formation of a special committee and promised timeline aim to accelerate and increase transparency in the recruitment process.

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