उसी दौरान, भारत के उत्तर प्रदेश में गंडक नदी का जलस्तर भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने बताया कि बाढ़ के कारण नदी की धारा तेज़ हो गई और कई बैंकों में टूट-फूट हुई। इस जलवृद्धि ने कई गांवों को प्रभावित किया, जहाँ घरों और कृषि भूमि को नुकसान पहुँचा। विशेषकर कुशीनगर, गण्डकी क्षेत्र के कई हिस्सों में जलरोधी बुनियादी संरचनाओं की कमी के कारण बाढ़ के प्रभाव को अधिक महसूस किया गया। इन परिस्थितियों में नदी के प्रवाह में अचानक बदलाव ने लाशों के बहाव को संभव बनाया।
शुक्रवार सुबह, कुशीनगर के खड्डा इलाके के मदनपुर‑सुकरौली क्षेत्र में बैराज के पियर नंबर‑3 के पास SDRF की निगरानी टीम ने तीन शवों को नदी में तैरते देखा। टीम ने तुरंत उन्हें बरामद किया और पहचान के लिए स्थानीय अस्पताल में भेजा। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि ये शव संभवतः बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों से बहकर आए हैं। स्थानीय पुलिस ने शवों के मूल स्थान का पता लगाने के लिए फोरेंसिक टीम को तैनात किया है और यह भी पुष्टि की है कि शवों पर कोई हिंसा या अपराध संकेत नहीं दिखा।
नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस विकास पर आश्चर्य और चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नेपाल‑भारत जलसंधि के तहत दोनों देशों को आपदा‑प्रबंधन में सहयोग बढ़ाना चाहिए। नेपाल के पर्यावरण मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “बाढ़ के कारण उत्पन्न जलधारा की गति और दिशा का पूर्वानुमान करना कठिन है, परन्तु इस तरह की घटनाएँ सीमा पार आपसी सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।” उन्होंने भारत को अनुरोध किया कि जल संसाधन साझा करने और बाढ़ चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए तत्काल कदम उठाए।
भारत सरकार ने भी इस घटना पर शीघ्र प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि SDRF और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने कहा कि लाशों की पहचान के बाद उनके परिवारों को उचित सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत कार्य जारी रहेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जलप्रबंधन प्रणालियों को मजबूत किया जाएगा।
कुशीनगर के स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित कई गांवों में अभी भी जल‑संकट बना हुआ है। स्थानीय लोग जलस्रोतों तक पहुंचने के लिए कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और कई घरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। जिला प्रशासन ने अस्थायी शिविर स्थापित कर विस्थापित लोगों को भोजन, जल तथा चिकित्सा सहायता प्रदान की है। साथ ही, उन्होंने नदी के किनारे सुरक्षा उपायों को बढ़ाने और भविष्य में ऐसे बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में सुदृढ़ बुनियादी ढांचा निर्माण का आदेश दिया है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, इस घटना ने भारत‑नेपाल संबंधों में जल‑संधि के महत्व को दोबारा सामने लाया है। दोनों देशों के बीच जल‑संधि 1954 में स्थापित हुई थी, जो गंडक नदी सहित कई जलधाराओं के साझा उपयोग को नियंत्रित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बाढ़‑प्रभावित स्थितियों में जल‑संधि के प्रावधानों का पुनरावलोकन आवश्यक हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच जल‑प्रबंधन के लिए अधिक पारदर्शी और त्वरित तंत्र स्थापित हो सके।
Updated: August 29, 2026
Severe floods in Nepal swept three bodies downstream to Uttar Pradesh’s Gandak River, where they were recovered in Kushinagar, underscoring the cross‑border impact of the disaster and prompting calls for tighter India‑Nepal water‑management cooperation.
The incident highlights gaps in flood‑response infrastructure, intensifies humanitarian needs in the affected districts, and fuels debate over revising the 1954 water‑sharing treaty to better handle future joint emergencies.
The discovery of bodies drifting from Nepal to India underscores how fragile cross‑border water agreements are when nature flouts their limits—forcing both nations to rethink shared flood‑early‑warning systems.
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