इससे पहले के महीनों में, नेपाल सरकार ने जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण के लिए परियोजनाएँ शुरू की थीं, जैसे कि पर्वतीय नदियों के लिए बाँध और नालियाँ। परंतु, इन परियोजनाओं का सही तरीके से निर्माण और रखरखाव नहीं होने के कारण बाढ़ के समय वे विफल हो रही हैं।
बाढ़ के पहले घंटे ही पानी ने गंगा नदी के किनारे से आगे बढ़कर चितवन के ग्रामीण इलाकों में प्रवेश किया। जल स्तर 3.5 मीटर तक पहुँच गया और हजारों घरों को नष्ट कर दिया। एक बार पानी ने मवेशियों और घरेलू पशुओं को भी निगल लिया।
अगले दो घंटे में बाढ़ ने न केवल आवासों को डुबोया, बल्कि परिवहन मार्गों को भी बंद कर दिया। मुख्य राजमार्ग 4 और 5 पर पानी के कारण ट्रैफ़िक रुक गया। स्थानीय पुलिस ने आपातकालीन टॉर्च और रोबोटिक डिवाइस के साथ सहायता कार्य शुरू किया, परंतु संसाधनों की कमी थी।
सुरक्षा विभाग ने एक आपातकालीन कार्य बल गठित किया और मोर्चरी हाउस से अस्थायी शवगृह बनाए, ताकि बाढ़ में मारे गए लोगों का निपटारा किया जा सके। स्थानीय अस्पतालों में भी गंभीर मामलों के लिए बिस्तर भर गए, जिससे चिकित्सा आपूर्ति पर दबाव पड़ा।
श्रीमती सुमन थापा, जो चितवन के एक गांव में रहती हैं, ने बताया कि बाढ़ के दौरान उन्होंने अपनी 70 वर्षीय दादी को बचाने के लिए दो घंटे तक पानी से लड़ाई की। मुझे लगा कि मैं कुछ नहीं कर सकती, पर फिर भी मैंने उन्हें बचाया, उन्होंने कहा।
सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि बाढ़ के बाद कई लोग अपने घरों को छोड़कर शहरों में शरण ले रहे हैं। वर्तमान में लगभग 4,500 परिवारों को अस्थायी शिविरों में आवास मिला है, लेकिन भोजन और साफ पानी की कमी जारी है।
कृषि विभाग के मुताबिक, बाढ़ ने क्षेत्रीय फसल उत्पादन पर भारी असर डाला है। लगभग 10,000 हेक्टेयर फ़सलें जल से प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इस स्थिति में, सरकार ने कृषि सहायता के लिए 50 करोड़ रुपये का अनुदान घोषित किया है।
राजनीतिक दलों ने बाढ़ प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेता महेश वर्मा ने कहा, यह सरकार की बाढ़ प्रबंधन में विफलता का स्पष्ट संकेत है। हमें तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए। सरकार ने कहा कि वे बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष कार्य बल बना रहे हैं।
अर्थशास्त्री पंडित अजय सिंह ने विश्लेषण किया कि बाढ़ से व्यापार और पर्यटन पर भी प्रभाव पड़ेगा। इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाएँ आर्थिक वृद्धि को बाधित करती हैं और निवेशकों के भरोसे को चोट पहुँचाती हैं, उन्होंने कहा।
सामाजिक कार्यकर्ता ने चेतावनी दी कि बाढ़ के बाद होने वाली बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं के लिए पर्याप्त तैयारी की ज़रूरत है। वे कहते हैं, हमारे स्वास्थ्य केंद्रों को अभी भी बेहतर सुविधाएँ चाहिए।
मौसम विज्ञानी डॉ. आरती शर्मा ने भविष्यवाणी की कि आने वाले हफ्तों में वर्षा जारी रहने की संभावना है। उन्होंने कहा, अगर जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखें तो ऐसे बाढ़ के प्रकोप बढ़ते रहेंगे।
अंततः, विशेषज्ञों का अनुमान है कि नेपाल सरकार को जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में निवेश बढ़ाना होगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता और तकनीकी सहयोग की ज़रूरत पड़ेगी। अगर इस दिशा में त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इसी तरह के प्रकोप और भी गंभीर हो सकते हैं।
The flood exposes a chronic neglect of infrastructure that turns weather warnings into lost lives—when the rivers rise, the systems that should hold them back crumble first.
If Nepal truly wants resilient communities, it must move from ad‑hoc emergency shelters to a permanent, data‑driven water‑management plan backed
Be First to Comment