विपक्षी गठबंधन, जिसमें बांग्लादेश राष्ट्रीय कांग्रेस (BNP) और जामायिका दल (Jatiya Oikya Front) शामिल हैं, ने सरकार के इस कदम की सराहना की और इसे राष्ट्रीय हितों के अनुरूप कहा। उन्होंने कहा कि मक्का पेक्ट में शामिल होना देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा और विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा। विपक्ष ने यह भी संकेत दिया कि इस समझौते से बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक प्रभावशाली बनाकर आर्थिक विकास में सहायक भूमिका मिल सकती है।
दूसरी ओर, कुछ विपक्षी नेताओं ने इस गठबंधन में संभावित जोखिमों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि मक्का पेक्ट के कुछ सदस्य देशों के बीच चल रहे अंतरराष्ट्रीय विवाद, विशेषकर मध्य पूर्व में तनाव, बांग्लादेश को अप्रत्याशित दांव पर ला सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने संसद से विस्तृत जांच और बहु पक्षीय संवाद की मांग की, ताकि कोई भी समझौता राष्ट्रीय संप्रभुता को बाधित न करे।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने मक्का पेक्ट के सभी सदस्यों के साथ विस्तृत कूटनीतिक वार्ता की है और इस गठबंधन के तहत बांग्लादेश को प्राप्त होने वाले लाभों का स्पष्ट मूल्यांकन किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि मक्का पेक्ट के प्रमुख सदस्य जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने बांग्लादेश को उन्नत हथियार प्रणाली, रक्षा प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता का प्रस्ताव दिया है।
वित्त मंत्रालय ने इस समझौते के आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मक्का पेक्ट के सदस्य देशों से मिलने वाली तकनीकी सहायता और निवेश बांग्लादेश की रक्षा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि अगले पाँच वर्षों में रक्षा खर्च में 15% की वृद्धि हो सकती है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
बाहरी विश्लेषकों ने इस विकास को दक्षिण एशिया की सुरक्षा संरचना में संभावित बदलाव के रूप में देखा है। कई अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का मक्का पेक्ट में शामिल होना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को पुनः परिभाषित कर सकता है, विशेषकर भारत और चीन के बीच के प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में। उन्होंने कहा कि यह कदम बांग्लादेश को दोधारी तलवार की तरह उपयोगी हो सकता है, जहाँ वह अपने रक्षा क्षमताओं को बढ़ाते हुए कूटनीतिक रूप से अधिक लचीलापन प्राप्त करेगा।
Bangladesh’s government signalled a favourable outlook on joining the Makkah Pact, outlining a phased MOU‑to‑joint‑operations plan that prioritises national security and parliamentary oversight. While opposition parties welcome the potential boost in defence capabilities and investment, some warn that ties to Middle‑East members could entangle Dhaka in wider geopolitical risks.
Bangladesh’s tentative entry into the Makkah Pact signals a strategic pivot toward a multilateral security web that could let Dhaka extract tech and investment while keeping diplomatic cards open for both India and China.