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बाढ़ से काठमांडू में फल‑सब्ज़ी और चीनी की कीमतें 20‑25 % बढ़ी, महंगाई तेज़ हुई

नेपाल के मध्य भाग में पिछले हफ़्ते आई भीषण बाढ़ ने देश की कृषि और व्यापारिक ढाँचे को गहरी चोट पहुंचाई है। राजधानी काठमांडू में दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में दो लगातार दिनों में 15 % से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सबसे बड़ी फल‑सब्जी बाजार कालीमाटी मंडी में टमाटर, आलू, सेब और अन्य मौसमी फसलों की कीमतें क्रमशः 20 % और 25 % तक उछल गईं।

इस मूल्य वृद्धि का प्रत्यक्ष असर आम नागरिकों की जीवन यापन लागत पर पड़ रहा है, जिससे मौजूदा आर्थिक अस्थिरता और बढ़ रही है।

बाढ़ की उत्पत्ति कई कारणों से जुड़ी है, जिनमें हिमनदी के पिघलने की तेज़ी, वर्षा‑संकुलन और अपर्याप्त जल‑प्रबंधन प्रणाली प्रमुख हैं। इस साल के मॉनसून में मानसून रेन की तीव्रता पिछले पाँच वर्षों में सबसे अधिक रही, जिससे नदियों की जलस्तर में अचानक वृद्धि हुई। बाढ़ ने प्रमुख राजमार्ग, हवाई अड्डा तथा जलमार्गों को बिखर कर क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान उत्पन्न हुआ। कृषि उत्पादन क्षेत्रों में धान, मक्का और दलहन की फसलें भी बाढ़ के पानी में डूब गईं, जिससे मौसमी उत्पादन में गिरावट आई।

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, इस बाढ़ ने 2023‑24 वित्तीय वर्ष में कृषि उत्पादन को लगभग 3 % घटाया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित 2.3 मिलियन लोग सीधे तौर पर राहत की आवश्यकता में हैं। सरकार ने तत्काल राहत कार्यों के लिए 2.5 बिलियन नेपाली रूपये की राशि आवंटित की, परन्तु वितरण और पुनर्निर्माण में कई बाधाएँ सामने आईं। इससे बाजार में उपलब्धता कम हुई और कीमतों में असमानता उत्पन्न हुई।

कालीमाटी मंडी में वस्तु आपूर्ति में कमी के कारण थोक विक्रेताओं ने मूल्य वृद्धि की घोषणा की। फल‑सब्जी की कीमतों के अलावा, मसालों, ड्राई फ्रूट्स और चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं पर भी समान प्रभाव देखा गया। चीनी की कीमतें पिछले दो दिनों में 18 % बढ़ी, जबकि मसालों की कीमतें 12 % तक ऊपर गईं। इन वस्तुओं की कीमतों में इस तरह की अचानक उछाल ने घरेलू खर्च में अभूतपूर्व दबाव बना दिया है।

आपूर्ति श्रृंखला में बाधा ने न केवल उपभोक्ता वर्ग को प्रभावित किया, बल्कि छोटे व्यापारियों और थोक विक्रेताओं की आय में भी गिरावट लाई। कई छोटे व्यापारी अपने माल को दुबारा परिवहन करने के लिए अतिरिक्त लागत उठाने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे उनके लाभ मार्जिन में कमी आई। इससे स्थानीय बाजार में वस्तुओं की उपलब्धता घटती जा रही है, और उपभोक्ताओं को दूरस्थ क्षेत्रों से महंगे सामान खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि बाढ़‑प्रेरित महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कीमत नियंत्रण आदेश जारी किए जाएंगे। साथ ही, केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीति में लचीलापन दिखाते हुए, कृषि क्षेत्र को समर्थन देने के लिए विशेष ऋण सुविधाओं की घोषणा की। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में कीमतों को स्थिर करना और किसानों को पुनरुत्थान में सहायता देना है।

बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने कहा कि बाढ़‑पीड़ित किसानों को शीघ्र ऋण वितरण और ब्याज दर में छूट देने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, सरकारी एजेंसियों ने बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में अस्थायी भंडारण सुविधाएं स्थापित करने की योजना बनायी है, जिससे फसलों को नुकसान‑रहित रूप से संग्रहित किया जा सके। इस पहल से आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की उम्मीद है।

नेत्री दल और विपक्षी दलों ने सरकार की आपदा प्रतिक्रिया की तत्परता पर सवाल उठाए। कुछ सांसदों ने कहा कि बाढ़ के कारण हुई आर्थिक क्षति को कम करने के लिए राष्ट्रीय बजट में विशेष आपदा राहत कोष स्थापित किया जाना चाहिए। वहीं, पर्यावरण समूहों ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी आपदाओं की आवृत्ति में वृद्धि हो रही है, और इसके समाधान में दीर्घकालिक जल‑प्रबंधन रणनीति आवश्यक है।

विदेशी निवेशकों ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, नेपाल में निवेश जोखिम का पुनर्मूल्यांकन किया है। एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र के कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने कहा कि बाढ़ के कारण लॉजिस्टिक लागत में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता उनके व्यापारिक योजनाओं को प्रभावित कर रही है। इस कारण, कुछ कंपनियां अपने संचालन को वैकल्पिक मार्गों पर पुनर्स्थापित करने पर विचार कर रही हैं।

 

Updated: August 28, 2026

The flood‑driven price shock is turning Nepal’s seasonal inflation into a structural one, forcing households and small traders into a de‑facto “food‑security tax” that could erode consumer confidence for months.

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