घास काटने के काम में लगे इस वृद्ध व्यक्ति की पहचान स्थानीय निवासियों ने प्रदान की। वह कई वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहा था और अक्सर अपने घर के बगल में मौजूद इस परित्यक्त खनन स्थल के किनारे घास साफ करता आया है। खनन स्थल, जो कई साल पहले बंद हो गया था, अब बेजान पानी से भर चुका है और स्थानीय लोग इसे खतरे के रूप में देखते हैं, परंतु कुछ लोग अभी भी वहाँ से कचरा निकालते या घास काटते रहते हैं।
पिछले कुछ महीनों में इस खनन स्थल में कई छोटे दुर्घटनाएं हुई थीं, लेकिन इस प्रकार की घातक घटना पहले नहीं हुई थी। स्थानीय प्रशासन ने खनन स्थल के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बार चेतावनी जारी की थी, परंतु उचित बाधा या संकेतक स्थापित नहीं किए गए थे। यह क्षेत्र अब भी कई ग्रामीणों के लिए दैनिक कार्यस्थल बनकर रहा है, जिससे इस प्रकार की घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।
घटनास्थल पर पहुंचने वाले पुलिस अधिकारी और स्थानीय बचाव दल ने बताया कि जब उन्होंने घास काटते हुए व्यक्ति को देखा, तो वह अचानक जल में गिर गया। तत्पश्चात कई लोग तुरंत मदद के लिए इकट्ठा हो गए और पास के एक नाव के सहारे जल में प्रवेश कर शारीरिक रूप से उसे बाहर निकालने की कोशिश की, परंतु बहुत देर हो चुकी थी। बचाव दल ने तुरंत डाइविंग उपकरण और रेस्क्यू बॉइट का उपयोग किया, लेकिन सभी प्रयास बेकार रहे।
पोलिस ने बताया कि उन्होंने तत्काल घटना स्थल की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक अस्थायी बाधा स्थापित की है और खनन स्थल के जलस्तर को कम करने के लिए जल निकासी का काम शुरू किया गया है। इसके अलावा, पुलिस ने स्थानीय प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस प्रकार के खतरनाक क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया जाए और चेतावनी संकेत स्थापित किए जाएँ। अभी तक इस मामले में कोई आपराधिक लापरवाही सिद्ध नहीं हुई है, परंतु जांच जारी है।
विरोधी दल के कई सदस्य और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में परित्यक्त खनन स्थलों को लेकर सुरक्षा उपायों की कमी एक गंभीर समस्या है, और स्थानीय प्रशासन को तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। कुछ नागरिक संगठनों ने पहले भी इस मुद्दे को उठाया था, परंतु अब इस त्रासदी ने उन्हें अधिक सक्रिय बना दिया है।
आँखों में आँसू भर कर ग्रामीणों ने कहा कि वह वृद्ध व्यक्ति बहुत ही सहायक और सुदृढ़ स्वभाव का था, जो अपने घर के कामकाज में मदद करता था। कई लोग उसकी मदद के लिए उसके साथ काम करते थे और वह अपने छोटे-छोटे व्यापार में भी सहयोगी था। उसकी अचानक मृत्यु ने पूरे गांव में शोक की लहर ला दी है, और कई लोग उसकी याद में सामुदायिक पूजा आयोजित कर रहे हैं।
पड़ोस के कुछ बुजुर्गों ने कहा कि वह हमेशा जल निकासी की समस्या से जूझते रहे थे, परंतु वह कभी शिकायत नहीं करते। उन्होंने बताया कि कई बार उन्होंने खनन स्थल के पास की गड्ढे में पानी भरने की समस्या को लेकर स्थानीय अधिकारियों को लिखित शिकायतें भी भेजी थीं, परंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। यह घटना अब उनके लिये एक चेतावनी बन गई है कि ऐसी अनदेखी स्थितियां फिर कभी नहीं होनी चाहिए।
राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे इस मामले की गहन जांच करेंगे और भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिये उचित कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में परित्यक्त खनन स्थलों की सुरक्षा के लिये विशेष दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे और स्थानीय प्रशासन को उनका पालन अनिवार्य किया जाएगा। इसके अलावा, वृद्ध लोगों की सुरक्षा के लिये विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाएगा।
केरल के मुख्य मंत्री ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि सरकार इस प्रकार की खतरनाक स्थितियों को तुरंत समाप्त करने के लिये सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
A senior resident in Angamaly, Kerala, drowned after slipping into an abandoned mining pit while trimming grass near his home, prompting a police FIR and rescue attempts that proved futile. Authorities have sealed the site, begun water drainage, and vowed stricter safety measures for hazardous former mines.
The tragedy exposes a systemic blind‑spot: abandoned mines are treated as peripheral lands, not as public‑safety hazards, allowing daily chores to become lethal. Unless policymakers turn these “ghost” sites into officially sealed zones with enforceable signage, rural communities will keep paying the hidden cost of bureaucratic inertia
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