राशन कार्ड योजना का मूल उद्देश्य 2023‑24 वित्त वर्ष में 1.1 करोड़ नए लाभार्थियों को जोड़ना था, जिससे ग्रामीण एवं शहरी गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को सस्ती खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इस योजना को लागू करने के लिए बिहार राज्य आपूर्ति सेवा संघ (BASA) को अतिरिक्त मानदंडों और सुविधाओं की आवश्यकता थी, क्योंकि मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ पहले से ही भारी था।
बिहार सरकार ने 2022 में नई डिजिटल प्रणाली लांच की, जो राष्ट्रीय डेटाबेस के साथ एकीकृत थी, और इसके तहत प्रत्येक परिवार को एक अद्वितीय पहचान अंक (UID) के साथ रजिस्टर किया गया। इस प्रक्रिया में कई बार डाटा त्रुटियों, सत्यापन में देरी और स्थानीय स्तर पर तकनीकी अड़चनें सामने आईं, जिससे लाभार्थियों के बीच असंतोष बढ़ा। इन चुनौतियों को देखते हुए संघ ने अपने प्रतिनिधियों के साथ मिलकर मांगें रखी, जिनमें पदोन्नति‑पे लेवल, अतिरिक्त भत्ते और कार्यभार में कमी शामिल थी।
संघ के अध्यक्ष श्री राम मिश्रा ने बताया कि संघ ने कई हफ्तों तक चर्चा के बाद अपने सदस्यों को सामूहिक अवकाश की घोषणा की थी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार की ओर से उचित समाधान नहीं मिला तो कार्रवाई जारी रहेगी। इस दौरान कई आपूर्ति ऑफिसर अपने कार्यस्थलों पर प्रदर्शन कर रहे थे, जबकि स्थानीय मीडिया ने इस मुद्दे को व्यापक रूप से उठाया।
संकट के मध्य में, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने एक विशेष बैठक बुलाई, जिसमें राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, संघ के प्रतिनिधि और कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञ उपस्थित थे। बैठक में संघ ने अपने दावों को सूचीबद्ध किया, जिनमें सॉलिडिटी में वृद्धि, प्रमोशन‑पे स्केल की पुनरावृत्ति और कार्यस्थल सुविधाओं में सुधार प्रमुख थे। विभाग ने इन बिंदुओं पर विस्तृत विचार किया और जल्द ही कुछ मांगों को मान्य करने का आश्वासन दिया।
विभाग ने कहा कि नई योजना के कार्यान्वयन में तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अतिरिक्त स्टाफ की भर्ती को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, उन्होंने बताया कि वर्तमान में 11 लाख नए कार्डों को सक्रिय करने के लिए आवश्यक बजट का एक हिस्सा पहले ही आवंटित किया जा चुका है, और शेष राशि अगले वित्तीय वर्ष में जारी की जाएगी। इन सबके बीच, विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी विवादों को रोकने के लिए नियमित संवाद मंच स्थापित किया जाएगा।
संघ के प्रतिनिधियों ने विभाग के इस उत्तर को स्वीकार किया और कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है, परन्तु उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि आगे की प्रक्रियाएँ समय पर नहीं पूरी हुईं तो फिर से आंदोलन की संभावना बनी रहेगी। कई ऑफिसरों ने व्यक्तिगत रूप से मीडिया को बताया कि वे अब अपने कर्तव्यों को पूर्ण निष्ठा से निभाने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि उनके काम को उचित मान्यता और वित्तीय सुरक्षा मिले।
राज्य सरकार की ओर से, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि राशन कार्ड योजना बिहार के सामाजिक सुरक्षा तंत्र की रीढ़ है और इस योजना को सुगमता से चलाने के लिए सभी हितधारकों के साथ सहयोग आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार संघ की मांगों को गंभीरता से लेगी और शीघ्र ही एक कार्यवाही योजना तैयार करेगी।
केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय ने भी इस विकास पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कई राज्यों में समान समस्याएँ उत्पन्न हुई थीं, और समाधान के रूप में तकनीकी उन्नयन और कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन पैकेज प्रदान किए जा रहे हैं। इस प्रकार, बिहार की स्थिति को राष्ट्रीय नीतियों के साथ संरेखित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने इस मुद्दे पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ ने कहा कि सरकार द्वारा कर्मचारियों की मांगों को मान्य करना सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जबकि अन्य ने चेतावनी दी कि यदि कार्यान्वयन में देरी हुई तो लाभार्थियों को अस्थायी रूप से कष्ट सहना पड़ेगा। कई NGOs ने कहा कि नई डिजिटल प्रणाली के
Bihar’s plan to add 11 lakh new ration cards has been kept on track after the Food & Consumer Protection Department accepted key demands from the state supply union, withdrawing a planned strike. The agreement, which includes staffing and pay concessions, aims to smooth rollout and prevent future disruptions to the welfare scheme.
Bihar’s rapid ration‑card rollout shows that social safety nets only succeed when workers feel valued—otherwise, a well‑meaning policy can stall. By conceding to staff demands, the state signals a shift toward a more collaborative governance model that may set a precedent for other states juggling welfare expansion and workforce welfare.
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