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कर्नाटक जल विभाग ने कई तालुके को गंभीर सूखे की सीमा में घोषित किया, जल वितरण योजना में पुनर्स

पहले ही सप्ताह के अंत में, कर्नाटक के जल आपूर्ति विभाग ने आधिकारिक तौर पर कहा कि राज्य के कई तालुके अब गंभीर सूखे की सीमा में आएँगे। जलवायु परिवर्तन और असमान वर्षा पैटर्न के चलते जल स्रोतों में गिरावट आई है, जिसके कारण जल आपूर्ति, कृषि उत्पादन और

ग्रामीण जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है। इस घोषणा को राज्य के जल संसाधन प्रबंधन निदेशालय (NDRF) और सूखा प्रबंधन निदेशालय (SDRF) की मानदंडों के आधार पर किया गया है। इस कदम से प्रभावित क्षेत्रों में जल वितरण योजना में पुनर्संरचना की संभावना बढ़ी है।

शरण प्रकाश पाटिल, जल

संसाधन मंत्री, ने बताया कि सूखे की सीमा तय करने के लिए NDRF‑SDRF द्वारा निर्धारित मानदंडों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तालुके की सूखा सूची में जोड़ने से पहले विस्तृत सर्वेक्षण, जल स्तर मापन और जलभंडारण क्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा। पाटिल ने यह भी

कहा कि इस प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन, जल विज्ञानियों और कृषक प्रतिनिधियों की भागीदारी अनिवार्य होगी। इससे सूखे के वास्तविक प्रभाव को समझकर समय पर राहत उपाय अपनाए जा सकेंगे।

सूखे से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बंगलूरु, बेलगाम और कोलार की कुछ तालुके शामिल हैं, जहाँ पिछले दो वर्षों

में वार्षिक औसत वर्षा में 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में कई जलाशयों का जलस्तर 20 प्रतिशत से नीचे गिर चुका है, जिससे जल की उपलब्धता घट गई है। विशेष रूप से किसान जलस्रोतों पर निर्भर रहने के कारण फसलों की पैदावार में गिरावट

और आर्थिक तनाव का सामना कर रहे हैं। स्थानीय जलस्रोतों की क्षीणता से पीने के पानी की सुरक्षा भी खतरे में पड़ी है।

सर्वेक्षण टीम ने बताया कि मौजूदा जलभंडारण सुविधाओं में रखरखाव की कमी और अनियंत्रित जल निकासी ने स्थिति को और बिगाड़ा है। तालुके स्तर पर कई जलाशयों

में अवैध जल निकासी और अतिप्रवाह के कारण क्षति हुई है, जिससे जल संग्रहण की क्षमता घट गई। जल अभिलेखों के अनुसार, इस वर्ष पहले ही 45 प्रतिशत तालुके में जलस्तर न्यूनतम मानकों से नीचे गिर गया है। इन आंकड़ों को देखते हुए, विभाग ने त्वरित कार्यवाही का आदेश

दिया है।

विभाग ने सूखे से प्रभावित तालुके में जल आपूर्ति के लिए वैकल्पिक उपायों की योजना बनाई है। इसमें वर्षा जल संचयन, छोटे जलाशयों का निर्माण और मौजूदा नहरों की मरम्मत शामिल है। साथ ही, जल वितरण में प्राथमिकता देने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे

जल का सही वितरण सुनिश्चित हो सके। इस पहल के तहत जल वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए स्थानीय स्वयंसेवी समूहों को भी शामिल किया जाएगा।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि सूखे के कारण कई गांवों में जल अभाव की स्थिति गंभीर हो गई है। कई घरों में

नल जल उपलब्ध नहीं है, जिससे लोग तालाब, कुएँ और टैंकरों पर निर्भर हैं। इससे जल की गुणवत्ता में गिरावट आई है और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ बढ़ी हैं। ग्रामीण महिलाओं को जल संग्रहण में अधिक समय बिताना पड़ रहा है, जिससे उनका कार्यभार बढ़ गया है। इस स्थिति ने

महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक भागीदारी पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।

कृषक संघों ने सूखे के कारण फसल उत्पादन में भारी गिरावट का उल्लेख किया। विशेष रूप से धान, बाजरा और गेंहू की फसलें पानी की कमी से प्रभावित हुई हैं। किसान ने बताया कि जल की कमी के कारण

बुवाई से लेकर फसल कटाई तक हर चरण में कठिनाइयाँ आती हैं। इस कारण से कई किसान अपने खेतों को बेकाबू छोड़ रहे हैं या कम उपज वाली फसलें उगा रहे हैं। इससे आय में गिरावट और ऋण बोझ में वृद्धि की संभावना बढ़ी है।

विपणन मंडियों में जल संकट

के कारण कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। कम उत्पादन के कारण फसलों की कीमतें बढ़ी हैं, जबकि उपभोक्ताओं की खरीद शक्ति घट रही है। इससे खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ा है और बाजार में असंतुलन पैदा हो रहा है। व्यापारी और उपभोक्ता दोनों ही इस स्थिति से

असंतुष्ट हैं, जिससे सामाजिक तनाव की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। आर्थिक विशेषज्ञों ने इस पर निगरानी रखने की जरूरत पर बल दिया है।

राज्य के जल प्रबंधन बोर्ड ने सूखे के आर्थिक प्रभाव का आकलन किया है। उन्होंने


Karnataka’s water department has officially declared dozens of taluks, including parts of Bengaluru, Belagavi and Kolara, to be in severe drought, citing sharp declines in rainfall and reservoir levels that are threatening irrigation, drinking water and rural livelihoods. The state will restructure supply schemes, boost rain‑water harvesting and digital monitoring, and involve local officials and farmer groups to mitigate the agricultural losses and health risks arising from the water shortfall.

Karnataka’s drought alert isn’t just a climate statistic—it signals a looming cascade where water scarcity will tighten agricultural margins, spike food prices, and deepen rural debt cycles.
If digital monitoring and community‑led water capture aren’t rolled out swiftly, the state risks converting today’s “dry” taluks

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