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शिक्षक दिवस पर कन्नगी नगर के मुफ्त ट्यूशन केंद्रों की पहल, पढ़ाई के साथ योग-सिलम्बम और कबड्डी की ट्रेनिंग शुरू

चन्नई के कन्नगी नगर में शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर स्थानीय मुफ्त ट्यूशन केंद्रों ने शैक्षणिक मदद के साथ सामाजिक सहारा भी प्रदान कर अपने कार्यक्षेत्र को विस्तृत किया है।
इस क्षेत्र में 25 से अधिक केंद्रों ने न केवल अतिरिक्त पाठ्यक्रम पढ़ाए हैं, बल्कि सिलम्बम, योग और कबड्डी जैसी शारीरिक गतिविधियों को भी शामिल किया है, जिससे बच्चों को स्कूल के बाद सुरक्षित और सक्रिय वातावरण मिलता है।कन्नगी नगर, जो चन्नई के दक्षिणी भाग में स्थित एक मध्यम आय वर्ग का बस्ती है, यहाँ के कई परिवारों के लिए शिक्षा की पहुँच अभी भी सीमित रही है। पिछले दशकों में सरकारी स्कूलों की भीड़भाड़ और अपर्याप्त संसाधन बच्चों के सीखने में बाधा बनते रहे। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए स्थानीय गैर‑सरकारी संगठनों ने मुफ्त ट्यूशन की पहल की, जिसका उद्देश्य शैक्षिक अंतर को कम करना था।

पहली बार 1998 में स्थापित हुआ यह नेटवर्क, प्रारम्भ में केवल गणित और विज्ञान जैसे मुख्य विषयों पर केंद्रित था। समय के साथ, अभिभावकों और बच्चों की मांगों के अनुसार, इसने भाषा, कंप्यूटर और जीवन कौशल जैसी विविध कक्षाएँ जोड़ लीं। अब तक इस नेटवर्क ने लगभग 12,000 से अधिक छात्रों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता प्रदान की है, जिसके परिणामस्वरूप कई परीक्षाओं में उनकी अंकसूची में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।

शिक्षक दिवस के समारोह में इस नेटवर्क के संस्थापकों ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने 15 अतिरिक्त केंद्रों की शुरुआत की है, जिससे लाभार्थियों की संख्या में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन केंद्रों में अनुभवी शिक्षकों और स्वयंसेवकों ने नि:शुल्क पाठ्यक्रम चलाए, जबकि स्थानीय उद्यमियों ने खेल और योग सत्रों के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान किए।

सिलम्बम, एक पारम्परिक तमिल मार्शल आर्ट, को विशेष रूप से युवा लड़कों को शारीरिक दृढ़ता और अनुशासन सिखाने के लिए शामिल किया गया। योग सत्रों का लक्ष्य छात्रों में तनाव कम करना और शारीरिक लचीलापन बढ़ाना है, जबकि कबड्डी ने टीम भावना और सामुदायिक बंधन को मजबूत किया। इन गतिविधियों को स्थानीय विद्यालयों के साथ तालमेल में आयोजित किया गया, जिससे शैक्षणिक और खेल दोनों क्षेत्रों में समन्वय स्थापित हुआ।

सभी केंद्रों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है। प्रत्येक कक्षा में न्यूनतम 20 छात्रों की सीमा रखी गई है, और सभी शिक्षकों को प्रथम उपचार प्रमाणपत्र और बैकग्राउंड चेक से गुजरना अनिवार्य है। इस व्यवस्था ने अभिभावकों में विश्वास बढ़ाया है, जिससे उन्होंने अपने बच्चों को इन केंद्रों में छोड़ने में अधिक सहजता महसूस की।

केंद्रीय शैक्षणिक बोर्ड (CBSE) के चेयरमैन ने इस पहल की सराहना की, यह कहा कि मुफ्त ट्यूशन केंद्र छात्रों के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे मॉडल को अन्य शहरों में दोहराने की आवश्यकता है, ताकि शैक्षिक असमानता को राष्ट्रीय स्तर पर कम किया जा सके।

स्थानीय नगरपालिका के प्रमुख ने बताया कि इस पहल से नगर की सामाजिक स्थिरता में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल के बाद सुरक्षित स्थान प्रदान करना, नशे और बुरे प्रभावों से बचाने में मददगार रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह आश्वासन दिया कि भविष्य में इस नेटवर्क को और आर्थिक समर्थन प्रदान किया जाएगा।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की सामुदायिक पहल आर्थिक रूप से भी लाभदायक साबित हो रही है। बच्चों के अतिरिक्त शिक्षा से कौशल में सुधार होता है, जिससे उनकी भविष्य की रोजगार संभावनाएं बढ़ती हैं। इस कारण, स्थानीय कंपनियों ने भी इस नेटवर्क को प्रायोजित करने की इच्छा जताई है, जिससे सामाजिक उत्तरदायित्व को पूरा किया जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों ने इस कदम को सरकार की शिक्षा नीति के साथ सामंजस्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मुफ्त ट्यूशन केंद्रों का विस्तार, राष्ट्रीय स्तर पर ‘सभी के लिए शिक्षा’ लक्ष्य को साकार करने में मदद कर सकता है। हालांकि, वे यह भी चेतावनी देते हैं कि सतत फंडिंग और निगरानी के बिना यह मॉडल दीर्घकालिक रूप से सफल नहीं हो पाएगा।

सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस पहल ने बच्चों में आत्मविश्वास और सामाजिक कौशल को बढ़ावा दिया है। अभिभावक सर्वेक्षण में बताया गया कि उनके बच्चों का स्कूल में प्रदर्शन बेहतर हुआ है और वे अधिक सहयोगी बन गए हैं। इस प्रकार, ट्यूशन केंद्रों ने शैक्षिक सहायता के साथ एक सामुदायिक हब का काम भी किया है।

शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. अजय वर्मा ने कहा कि कन्नगी नगर का मॉडल सीखने के पर्यावरण को पुनर्परिभाषित कर रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि खेल, योग और कला को पाठ्यक्रम में शामिल करने से संज्ञानात्मक विकास तेज़ होता है। वर्मा ने यह भी सुझाव दिया कि इस मॉडल को अन्य शहरी क्षेत्रों में लागू करने से शैक्षणिक अंतर को घटाने में मदद मिल सकती है।

Updated: September 3, 2026


Local free‑tution centres in Chennai’s Kannagi Nagar expanded on Teacher’s Day, adding 15 new sites and a mix of yoga, Silambam and kabaddi to serve over 12,000 students and boost post‑school safety. The initiative, praised by officials and educators, is credited with improving academic scores, fostering community ties and prompting calls for wider replication.

The expanded free‑tutoring network adds academic support and structured physical activities, increasing student participation and safety after school.
Its growth, with a 30 % rise in beneficiaries, aims to narrow educational gaps in a low‑income Chennai locality.

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