विकास परियोजनाओं को HUDCO से दीर्घकालिक टर्म लोन मिलेगा। यह पहल बिहार के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने और रोजगार सृजन को तेज करने के लिये महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बिहार ने पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के
लिये कई नीति सुधार लागू किए हैं, जिनमें एकीकृत औद्योगिक नीति, भूमि उपलब्धता में सुविधा और कर छूट शामिल हैं। इन उपायों ने राज्य को ‘Make in India’ अभियान के तहत प्राथमिक स्थान दिलाया है, परंतु बुनियादी ढाँचा अभाव अभी भी बाधा बन रहा
था। HUDCO के साथ इस प्रकार का वित्तीय समझौता पहले जुलाई में शहरी बुनियादी ढाँचे के लिये 1 लाख करोड़ रुपये के टर्म लोन के बाद आया, जो राज्य की विकास योजनाओं को पूँजी उपलब्धता से सुदृढ़ करता है।
HUDCO ने औद्योगिक पार्कों के
विकास के लिये विशेष रूप से 5 ग्राम से 50 ग्राम तक के आकार के इकाईयों को लक्षित किया है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यम (SME) को फंडिंग में आसानी होगी। साथ ही, जमीन अधिग्रहण, सड़क, जल और ऊर्जा आपूर्ति जैसी पूरक बुनियादी सुविधाओं के लिये
भी लोन प्रदान किया जाएगा। इस पहल का प्राथमिक लक्ष्य उत्पादन क्षमता में 30 % तक वृद्धि और नई नौकरियों का सृजन है, जिसका अनुमान वर्तमान में 1.2 मिलियन रोजगार के आसपास लगाया गया है।
समझौते के बाद, HUDCO ने अपने शेयर बाजार में सकारात्मक
प्रतिक्रिया देखी, जहाँ शेयर मूल्य में 4 % की वृद्धि दर्ज हुई। वित्तीय विश्लेषकों ने इसे HUDCO की राजस्व वृद्धि की दिशा में एक मजबूत संकेत माना है। बिहार सरकार के उद्योग मंत्री ने कहा कि इस फंडिंग से राज्य के मौजूदा औद्योगिक पार्कों का
आधुनिकीकरण होगा और नई परियोजनाओं को तेज गति मिलेगी। राज्य के प्रमुख व्यावसायिक समूहों ने भी इस कदम को निवेश के लिये अनुकूल माहौल के रूप में सराहा।
बिहार के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र जैसे पटना, बिहार शरीफ, भागलपुर और मुजफरपुर में इस फंडिंग
के अंतर्गत कई नए प्रोजेक्ट की योजना बनाई गई है। इन क्षेत्रों में टेक्सटाइल, एग्रो‑प्रोसेसिंग, फॉरेस्ट्री, एयरोस्पेस और सूचना प्रौद्योगिकी के लिये क्लस्टर बनाये जाने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि अगले दो वर्षों में 12 नए औद्योगिक पार्कों की स्थापना होगी,
जिसमें प्रत्येक पार्क की औसत निवेश राशि 800 करोड़ रुपये होगी।
HUDCO के प्रमुख अधिकारी ने कहा कि लोन की अवधि 7‑10 साल होगी, जिसमें प्रारंभिक ब्याज दर 7‑8 % के बीच तय की जाएगी। लोन के पुनर्भुगतान में राजस्व‑आधारित मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे
प्रोजेक्ट की आर्थिक स्थिरता को सुनिश्चित किया जा सके। इस वित्तीय ढाँचा से न केवल निजी निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा, बल्कि सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) मॉडल को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।
राजनीतिक दायरे में, बिहार सरकार ने इस समझौते को अपने विकास
एजेंडे का मुख्य भाग बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फंडिंग से राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। विपक्षी दलों ने इस पहल को सराहते हुए कहा कि यह राज्य के रोजगार संकट
को कम करने में मदद करेगा, परंतु उन्होंने पारदर्शिता और ऋण पुनर्भुगतान की योजना पर अधिक चर्चा की मांग की।
आर्थिक प्रभाव के लिहाज़ से, इस फंडिंग के कारण राज्य की कुल निवेश में 5‑6 % की वृद्धि की आशा है। यह वृद्धि राज्य
के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वार्षिक 0.8 % से 1 % तक योगदान दे सकती है। साथ ही, औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण निर्यात में भी सुधार की संभावना है, जिससे बिहार को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बेहतर स्थिति मिल सकती है।
Updated: September 3, 2026
The ₹25,000 crore agreement secures long-term financing for Bihar’s industrial and urban infrastructure projects.
These funds aim to establish new industrial parks and support small and medium enterprises.
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