पिछले दशक में बिहार ने विभिन्न केंद्र और राज्य योजनाओं के तहत विद्युत बुनियादी ढाँचे में सुधार किया, परन्तु विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। 2015 में शुरू हुए “बिहार बिजली सुधार योजना” ने 12,000 किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनों की स्थापना की, फिर भी औद्योगिक पार्कों और एग्री‑प्रोसेसिंग यूनिटों को निरंतर पावर सप्लाई नहीं मिल पाई। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए नई निवेश योजना को “बिजली को विकास की धुरी” बनाने की दृष्टि से देखा जा रहा है।
निवेश योजना के तहत पहली चरण में 15 गिगावॉट की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ने की योजना है, जिसमें दो नई थर्मल पावर प्लांट (एक 2,500 मेगावॉट और दूसरा 3,000 मेगावॉट) और पांच सोलर एवं पवन ऊर्जा केंद्र शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, मौजूदा 9,000 किमी ट्रांसमिशन लाइनें आधुनिकीकरण एवं 30,000 किमी नई वितरण नेटवर्क स्थापित करने के लिए वित्तीय संसाधन निर्धारित किए गए हैं। इस चरण को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे राज्य के औद्योगिक क्षेत्र को निरंतर और स्थिर पावर मिल सके।
सरकार ने इस योजना को वित्तीय रूप से साकार करने के लिए विभिन्न स्रोतों का उपयोग करने का इरादा व्यक्त किया है। राज्य बजट के अतिरिक्त, केंद्र सरकार के “ऊर्जा दक्षता मिशन” के तहत मिलने वाले अनुदान, निजी क्षेत्र के PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल और अंतरराष्ट्रीय बैंकों के ऋणों को मिलाकर कुल निवेश को पूरा किया जाएगा। इस प्रकार, सार्वजनिक‑निजी सहयोग की भूमिका को प्रमुखता दी गई है, जिससे प्रोजेक्ट की समयबद्धता और कार्यक्षमता में सुधार की अपेक्षा है।
मुख्य घटनाक्रम के अनुसार, योजना के कार्यान्वयन के लिए विशेष “बिजली विकास बोर्ड” का गठन किया गया है, जिसमें उद्योग, ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इस बोर्ड को हर छह महीने में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी और किसी भी बाधा का समाधान त्वरित रूप से निकालना होगा। इसके अतिरिक्त, राज्य के 12 मुख्य जिलों में “स्मार्ट ग्रिड” परियोजना शुरू की जाएगी, जिससे ऊर्जा खपत की वास्तविक समय में निगरानी और लोड मैनेजमेंट संभव हो सके।
इस योजना पर उद्योग जगत ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। बिहार के प्रमुख उद्योग संघ “बिहार उद्योग मंडल” ने कहा कि निरंतर पावर सप्लाई के बिना निवेश की गति धीमी रहेगी और नई योजना से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। वहीं, कुछ छोटे एवं मध्यम उद्यमियों ने यह आशंका व्यक्त की कि बड़ी थर्मल परियोजनाओं के कारण पर्यावरणीय प्रभाव बढ़ेगा और लागत में वृद्धि हो सकती है। इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।
राज्य के प्रमुख राजनेताओं ने भी इस निवेश योजना का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “बिजली ही विकास का मूलभूत स्तंभ है, और इस योजना से बिहार को औद्योगिक मानचित्र में नई ऊँचाइयों पर ले जाया जाएगा।
Bihar’s ₹1.38 lakh‑crore power push could finally turn chronic load‑shedding into a growth catalyst, unlocking industrial sites that have long been starved of reliable electricity.
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