प्रमुख बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में रासुवा के बड़बड़ बस्ती, नुवाकोट के किल्ली, और हिल्पुर के कई छोटे-छोटे गाँव शामिल हैं। इन स्थानों पर सड़कों का कटाव, पुलों का ध्वस्त होना और संचार नेटवर्क का टूटना प्रमुख समस्याएँ बन गईं। बचाव दलों को टेढ़ी-मेढ़ी पहाड़ियों और बंजर भूभाग में सापेक्षिक रूप से कम समय में पहुंचना पड़ा। बाढ़ के कारण कई जलाशय और जलमार्ग भी बदल गए, जिससे आगे की खोज और बचाव कार्य और जटिल हो गया।
सुरक्षा बलों की संयुक्त कमान ने तत्काल 12 एंटी-टेरर टीमों को आपातकालीन मोड में डालते हुए, हवाई ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से सटीक स्थान निर्धारण किया। सेना, पुलिस, और नेपाल रेड क्रॉस ने मिलकर 150 से अधिक बचाव ऑपरेशन शुरू किए। जल निकासी के लिए टैंक और पंप स्थापित किए गए, जबकि बचाए गए लोगों को अस्थायी शेल्टर में रखा गया। इसके अलावा, स्थानीय स्वयंसेवक और NGOs ने आपूर्ति, दवाइयाँ और भोजन प्रदान कर राहत कार्य में सहयोग दिया।
बाढ़ के बाद प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई पर भी बड़ा असर पड़ा। कई बच्चों को अब अस्थायी शैक्षणिक केंद्रों में ही पढ़ना पड़ रहा है, जहाँ बुनियादी सुविधाएँ भी सीमित हैं। शिक्षा विभाग ने त्वरित रूप से मोबाइल क्लासरूम तैनात करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि प्रभावित बच्चों की पढ़ाई में रुकावट न आए। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़-जनित जलजन्य रोगों के प्रकोप को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान तेज़ी से चलाया।
रासुवा और नुवाकोट में स्थानीय समुदायों ने बाढ़ के कारण उत्पन्न आर्थिक नुकसान को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। कृषि, पर्यटन और छोटे व्यापार पर हुए नुकसान ने कई परिवारों को गरीबी की कगार पर धकेल दिया है। कई किसान अपने फ़सल नुकसान के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि पर्यटन व्यवसायियों को अब अपने मौसमी आय में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों ने सरकार से तत्काल आर्थिक सहायता और पुनर्वास योजना की मांग की।
रासुवा के जिला अधिकारी ने कहा कि बचाव कार्य में अब तक 1,282 मृतकों की पुष्टि हुई है, जबकि 600 से अधिक बच्चों को अभी भी खोजा जाना बाकी है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से तत्काल 50 करोड़ रूपए की सहायता जारी की है। सुरक्षा बलों की कमान ने आगे की खोज में सभी उपलब्ध संसाधनों को जुटाने का आश्वासन दिया।
नुवाकोट के मेयर ने स्थानीय प्रशासन को बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण कार्य तेज़ी से करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जलरोधी बुनियादी ढाँचा, सड़क निर्माण, और पुलों की मरम्मत को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, मेयर ने प्रभावित परिवारों को पुनर्वास के तहत आवासीय सहायता प्रदान करने की योजना की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की आपदाओं से बचने के लिए भविष्य में अधिक सटीक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली स्थापित की जाएगी।
Severe flash floods in Nepal’s Rasuwa and Nuwakot hills have left over 1,280 dead and more than 600 children missing, prompting a massive joint rescue operation for nearly 4,800 presumed lost. The disaster has razed villages, displaced thousands, crippled infrastructure and schools, and sparked urgent calls for relief funds, reconstruction and better forecasting.
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