परिचालन स्तर पर योजना के तहत अगले पांच वर्षों में पाँच नई द्विपक्षीय रक्षा समझौते किए जाने का लक्ष्य निर्धारित है। इन समझौतों में प्रमुखता से संयुक्त समुद्री सुरक्षा अभ्यास, एंटी‑साइबर ऑपरेशन और अंतरिक्ष रक्षा पर सहयोग शामिल होगा। साथ ही, ‘रक्षा’ ढाँचा मौजूदा संयुक्त सैन्य अभ्यासों को दो गुना करने का प्रस्ताव रखता है, जिससे भारतीय सैनिकों को विविध भू-राजनीतिक परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता विकसित हो सके।
सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार के तहत भारत ने विदेशी सैन्य अकादमियों में भारतीय अधिकारियों की संख्या को दोगुना करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, भारतीय सेना के युवा सैनिकों के लिए विदेशी शैक्षिक संस्थानों में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए एक विशेष स्कॉलरशिप योजना भी शुरू की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल विकास और तकनीकी अद्यतन को सुदृढ़ करना है।
‘रक्षा’ ढाँचा न केवल सैन्य सहयोग को बल्कि रक्षा उद्योग के विनिर्माण और निर्यात को भी प्रोत्साहित करेगा। इस दिशा में रक्षा उत्पादन के लिए विदेशी निवेश को आकर्षित करने, संयुक्त प्रौद्योगिकी विकास परियोजनाओं को शुरू करने और रक्षा एक्सपो में भारत की भागीदारी को बढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी। इस योजना के अनुसार, अगले दशक में रक्षा निर्यात को वर्तमान के दो गुना तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
रक्षा मंत्रालय ने इस योजना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘रक्षा’ एक सतत, पारदर्शी और सहयोगी दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है, जिससे भारत को वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया जा सके। विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि यह ढाँचा भारत की विदेश नीति के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। दोनों मंत्रालयों ने योजना के कार्यान्वयन में समय‑समय पर प्रगति रिपोर्ट जारी करने का आश्वासन दिया।
दूसरे पक्ष के प्रमुख देशों ने इस घोषणा पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। अमेरिकी रक्षा प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारत के साथ गहरी रक्षा साझेदारी क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को मजबूत करेगी। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री ने उल्लेख किया कि ‘रक्षा’ योजना में प्रस्तावित संयुक्त समुद्री अभ्यास दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देगा। जापान ने भी कहा कि इस पहल से एशिया‑प्रशांत में सामरिक संतुलन स्थापित होगा और क्षेत्रीय चुनौतियों का सामूहिक समाधान संभव होगा।
विपक्षी देशों की ओर से भी इस योजना को लेकर सतर्कता बढ़ी है। चीन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि किसी भी बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन को क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने का जोखिम हो सकता है और सभी पक्षों को संवाद के माध्यम से समस्याओं को सुलझाने की अपील की।
Updated: September 3, 2026
भारत की ‘रक्षा’ योजना सिर्फ औपचारिक सहयोग नहीं, बल्कि तेज‑प्रतिक्रिया क्षमता को दिखाने वाला एक रणनीतिक सिग्नल है—जिससे चीन‑संबंधी तनाव में भारत को अधिक माने जाने वाला क्षेत्रीय शमनकर्ता बनना है।
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