सौर परियोजनाओं के विकास में बिहार ने कई बड़े भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। 2024 के पहले छमाही में राज्य ने 2 GW स्थापित सौर क्षमता में 1.3 GW का जोड़ किया, जिससे कुल स्थापित क्षमता 3.5 GW तक पहुँच गई। इसके अतिरिक्त, राज्य ने 500 MW के बड़े पैमाने पर फोटovoltaic पार्कों के लिए निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिये विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया है। इन पहलों में जलवायु‑अनुकूल तकनीक, मॉड्यूलर बैटरियों और ग्रिड‑स्टेबलाइजेशन समाधान शामिल हैं, जो ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे।
सौर ऊर्जा के अलावा, बिहार ने पवन और बायोमास ऊर्जा में भी निवेश बढ़ाया है। 2023 में 1 GW पवन क्षमता स्थापित करने की योजना थी, लेकिन भूमि उपलब्धता और स्थानीय विरोध के कारण यह लक्ष्य अधूरा रह गया। अब राज्य सरकार ने छोटे‑पैमाने पर सामुदायिक पवन टरबाइन स्थापित करने की दिशा में कार्यवाही तेज़ की है। बायोमास के क्षेत्र में कृषि अपशिष्ट को ईंधन में बदलने वाले प्लांटों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे ग्रामीण आय में सुधार की संभावना भी बनती है।
मुख्य आर्थिक चुनौतियों में निवेश की उच्च लागत और वित्तीय जोखिम प्रमुख हैं। 24 GW नवीकरणीय क्षमता के लिये अनुमानित खर्च ₹1.38 लाख करोड़ है, जो राज्य के बजट में बड़ा भार डालता है। इस वित्तीय बोझ को कम करने के लिये बिहार ने केंद्रीय सरकार के साथ विशेष ग्रांट और ऋण सुविधाओं के लिये बातचीत शुरू की है। साथ ही, राज्य ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से हरे बंधकों (green bonds) के जारी करने की संभावना पर विचार किया है, जिससे निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके।
बिजली खरीद की कीमत में कमी लाने के लिये सौर ऊर्जा को प्राथमिकता देने का आर्थिक तर्क भी मजबूत है। सौर पैनल की लागत पिछले पाँच वर्षों में 60 % तक घट गई है, जिससे परियोजनाओं का प्रतिफल समय कम हो गया है। ऊर्जा भंडारण तकनीक के विकास के साथ, सौर ऊर्जा को दिन के समय के बाद भी निरंतर उपयोग में लाया जा सकेगा, जिससे पीक‑लोड पर निर्भरता कम होगी। इस दृष्टिकोण से उपभोक्ताओं को कम विद्युत शुल्क और बेहतर आपूर्ति की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने इस योजना की कार्यान्वयन के लिये विशेष प्राधिकरण का गठन किया है, जिसमें ऊर्जा विभाग, वित्त विभाग और उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने योजना के लिये स्पष्ट समय‑सीमा और माइलस्टोन निर्धारित किए हैं, जिससे प्रगति का निरंतर मूल्यांकन हो सके। इस प्राधिकरण ने पहले ही कई टेंडर जारी किए हैं, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भाग लेने का अवसर दिया गया है।
केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री ने इस पहल पर सकारात्मक टिप्पणी की है, कहा कि बिहार का लक्ष्य भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी इस दिशा में वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन प्रदान करने के लिये तैयार है। वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और रोजगार सृजन में भी मददगार होगी।
The plan aims to boost Bihar’s power supply reliability by adding 24 GW of renewable capacity, primarily solar, and 6 GWh of storage. Achieving this target is intended to lower electricity procurement costs and reduce dependence on fossil fuels.
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