बिहार के मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2023 में राज्य के औसत वर्षा मानक से 40 % तक कमी दर्ज की गई। पिछले दो दशकों में इस महीने की औसत वर्षा 120 मिमी थी, जबकि इस वर्ष यह केवल 70 मिमी रही। स्थानीय जलस्रोतों में वर्षा की कमी के बावजूद, नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता गया। यह स्थिति विशेषज्ञों को यह प्रश्न उठाने पर मजबूर कर रही है कि नदियों में इतना पानी कहां से आ रहा है।
वर्षा की कमी के बावजूद नदियों में जलस्तर में वृद्धि का मुख्य कारण उत्तर में स्थित नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में हुई तीव्र वर्षा है। नेपाल के मौसम विभाग के आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले दो हफ्तों में हिमालयी प्रदेशों में 250 मिमी से अधिक वर्षा हुई। इस बारिश ने कई पर्वतीय नदियों की धारा को बढ़ा दिया, जिससे जल निकायों में जल प्रवाह तेज़ हुआ। यह अतिरिक्त जल प्रवाह भारतीय सीमा के पार बहकर गंगा-गंडक जलसंधि में प्रवेश कर रहा है।
नेपाल में हुई तेज़ बरसात के साथ ही कई स्थानों पर फ्लैश फ्लड की घटनाएँ रिपोर्ट हुईं। हिमालयी बर्फबारी और तेज़ पिघलाव ने पहाड़ी इलाकों में जलसंकट को तीव्र किया। इन जलस्रोतों से निकलती बाढ़ की लहरें भारत की सीमा के निकट स्थित नदी प्रणालियों में मिल गईं। इस प्रक्रिया में जल के प्रवाह की गति और मात्रा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। परिणामस्वरूप, बिहार की नदियों का जलस्तर अचानक से बढ़ा।
भारतीय जलवायु विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष नेपाल में हुई भारी वर्षा ने गंगा के प्रमुख उपनदियों—जैसे कि कोसी, सोन और बागमती—में जलस्तर को 1.5 से 2 मेटर तक बढ़ा दिया। इन नदियों का जलस्तर बहते समय बाढ़ के जोखिम को बढ़ाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ जलनिकासी की व्यवस्था कमजोर है। इस कारण बिहार के कई जिलों में बाढ़ चेतावनी जारी की गई है।
सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाढ़ प्रबंधन प्राधिकरण को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने क्षेत्रीय आपातकालीन योजनाओं को सक्रिय कर दिया। जलस्रोत प्रबंधन विभाग ने बाढ़ नियंत्रण के लिए जलाशयों के जल स्तर को समायोजित करने का आदेश दिया। साथ ही, स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निकासी और राहत कार्यों को तेज़ करने का निर्देश जारी किया।
बिहार के मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति को लेकर आश्वासन दिया, कहा कि राज्य सरकार सभी आवश्यक उपायों को लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि जल निकासी के लिए नई नहरों का निर्माण और मौजूदा जलाशयों की सफाई को प्राथमिकता दी जाएगी। इस बीच, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित रोगों के प्रकोप को रोकने के लिए चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।
केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय ने भी इस बाढ़ की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नेपाल की भारी वर्षा के कारण नदियों में जलस्तर बढ़ा है, जिससे भारत में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच जल संसाधन प्रबंधन के लिए नियमित संवाद आवश्यक है। केंद्र सरकार ने अतिरिक्त राहत पैकेज और आपातकालीन सहायता प्रदान करने का वचन दिया।
नेपाल के जलवायु विभाग के प्रमुख ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फ पिघलने की प्रक्रिया भी तेज़ हुई, जिससे नदियों में जल प्रवाह में अचानक वृद्धि हुई। उन्होंने उल्लेख किया कि इस प्रकार की जलवायु घटनाएँ कई वर्षों में कम देखी गई हैं, और भविष्य में इनकी आवृत्ति बढ़ सकती है। उन्होंने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने और सामुदायिक चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
स्थानीय किसानों और व्यापारियों ने बाढ़ के कारण आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया है। कई कृषि क्षेत्रों में फसल क्षति और जमीनी बुनियादी ढांचे की हानि का जोखिम बढ़ा है। व्यापारी संघों ने कहा
Updated: September 4, 2026
Despite a 40 % drop in August rainfall, Bihar’s rivers surged to historic highs as heavy monsoon rains in Nepal and the Himalayas fed the Ganga‑Gandak system, prompting flood alerts across the state. Authorities have mobilised emergency resources, upgraded dam releases and vowed new drainage works while urging cross‑border water‑management cooperation.
Bihar’s paradox of record‑high river levels amid a 40 % dip in local rainfall signals a climate shift where trans‑border watershed dynamics, not regional monsoons, will dictate flood risk.
If bilateral water‑sharing and real‑time mountain‑to‑plains monitoring aren’t
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