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भारत ने दशकों की रक्षा कूटनीति रोडमैप जारी किया: स्वदेशी विकास, वैश्विक साझेदारियाँ और 30 % घरेलू उत्पादन लक्ष्य निर्धारित

भारत ने अगले दस वर्षों के लिए एक विस्तृत रक्षा कूटनीति रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसमें आत्मनिर्भरता और वैश्विक साझेदारियों को प्रमुख तत्व के रूप में रखा गया है।
रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को ‘रक्षा’ नामक दस्तावेज़ जारी किया, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के नए मॉडल की रूपरेखा दी गई है। इस रोडमैप में रणनीतिक संरेखण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, और संयुक्त उत्पादन के प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट किया गया है, जिससे भारतीय रक्षा उद्योग का विकास तेज़ी से होगा।पिछले दो दशकों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में निर्यात और आयात दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है, परन्तु आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति धीमी रही थी। 2020 में लॉन्च किए गए ‘अडवांस्ड डिफेन्स इनीशिएटिव’ के तहत कई परियोजनाओं को शुरू किया गया, लेकिन बजट सीमाएँ और तकनीकी निर्भरता प्रमुख चुनौतियाँ बनी रहीं। इस नई नीति का उद्देश्य उन बाधाओं को दूर करना और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देना है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस रोडमैप में तीन स्तंभ निर्धारित किए गए हैं: स्वदेशी विकास, रणनीतिक सहयोग, और क्षमतावृद्धि। स्वदेशी विकास में हथियार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एआई‑आधारित समाधान का घरेलू निर्माण शामिल है। रणनीतिक सहयोग में संयुक्त अभ्यास, तकनीकी साझेदारी और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर समन्वित नीति निर्माण पर बल दिया गया है। क्षमतावृद्धि के तहत मौजूदा बलों की आधुनिकता और नई इकाइयों का गठन प्रमुख है।

दस्तावेज़ में विशेष रूप से यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, और जापान के साथ सहयोग को गहरा करने का संकेत दिया गया है। इन देशों के साथ संयुक्त उत्पादन और अनुसंधान परियोजनाएँ शुरू करने की योजना है, जिससे तकनीकी अंतर को पाटा जा सके। साथ ही, दक्षिण एशिया में साझेदारियों को मजबूत करने के लिए भारत ने ऑस्ट्रेलिया और इज़राइल के साथ नई समझौतों की रूपरेखा भी तैयार की है।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अगले पाँच वर्षों में भारत 30 % तक अपने रक्षा उपकरणों को घरेलू रूप से निर्मित करने का लक्ष्य रखता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन संस्थान (NDPA) को सशक्त किया जाएगा और निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने के लिए नीति ढांचे में सुधार किया जाएगा। विशेष आर्थिक ज़ोन और तकनीकी उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए कर छूट जैसी सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी।

अंतिम चरण में, भारत ने अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग और एयरोस्पेस क्षेत्रों में प्रवेश करने की योजना बनाई है, जिससे रक्षा निर्यात के नए बाजार खुलेँ। इस दिशा में, भारत ने पहले ही दक्षिण पूर्व एशिया के साथ दो द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए हैं, जो एंटी‑टेरररिस्ट उपकरण और समुद्री निगरानी प्रणाली के निर्यात को बढ़ावा देंगे।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस रोडमैप को राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए कहा कि यह न केवल रक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करेगा, बल्कि आर्थिक विकास को भी गति देगा। उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत रक्षा उद्योग में निवेश 2025 तक दो गुना हो सकता है, जिससे हजारों रोजगार सृजित होंगे।

विदेशी नीति विभाग के माननीय सचिव ने इस कदम को भारत की वैश्विक भूमिका के परिवर्तन के रूप में सराहा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को संतुलित करना भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देगा।

अमेरिकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने भारत के इस कदम को “एक सकारात्मक विकास” कहा और कहा कि संयुक्त अभ्यास और तकनीकी साझा करने के माध्यम से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में संयुक्त प्रोजेक्ट्स के तहत एआई‑आधारित रक्षा प्रणालियों का विकास हो सकता है।

रूस के विदेश मंत्रालय ने इस दस्तावेज़ को “रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मविश्वास की पुष्टि” के रूप में उल्लेख किया, परन्तु उन्होंने कहा कि किसी भी दोध्रुवीय रणनीति में संतुलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने भारत को अपने पारंपरिक सहयोगी के रूप में देखते हुए नई साझेदारियों के साथ सामरिक संतुलन बनाए रखने की अपील की।

आंतरिक आर्थिक विश्लेषकों ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में निवेश से भारत की निर्यात आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि भारत 2030 तक 20 % तक रक्षा निर्यात को बढ़ा लेता है, तो यह राष्ट्रीय व्यापार संतुलन को सकारात्मक रूप में प्रभावित करेगा। साथ ही, इस कदम से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन भी बढ़ेगी।

 


India unveiled a decade-long defence diplomacy roadmap prioritising indigenisation alongside deeper strategic ties with global partners like the US, EU, and Japan. The plan aims to boost domestic manufacturing to 30% within five years while accelerating exports to transform the sector into an economic growth driver.

Insight: India’s new defence‑diplomacy playbook signals a shift from pure self‑reliance to a hybrid model where foreign tech partnerships become a catalyst for a domestic industrial boom. If the roadmap delivers on its joint‑production promises, the sector could morph into a high‑growth export engine,

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