परियोजना के प्रमुख चरणों में पहले 30 बसों का पायलट रोल‑आउट किया गया, जिसे दिल्ली‑केसरी एयरोड्रॉप नेटवर्क के साथ तुलनात्मक रूप से सफल बताया गया। पायलट चरण में यात्रियों के प्रतिकूल प्रभावों को न्यूनतम करने के लिये रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया, जिससे रूट पर ट्रैफ़िक जाम और ऊर्जा खपत दोनों को नियंत्रित किया जा सके।
अब नई 114 बसें चार मुख्य मॉडलों में विभाजित होंगी: 12 मीटर की फुल‑साइज़ बसें, 9 मीटर की कम्पैक्ट बसें, हाई‑ड्यूटी बसें और शहरी कम्यूटर्स के लिये विशेष डिजाइन की गई माइक्रो‑बसें। प्रत्येक वाहन में 300 kWh की लिथियम‑आयन बैटरी लगी होगी, जो एक चार्ज पर 250 किलोमीटर तक चल सकती है, और तेज़ चार्जिंग तकनीक से 45 मिनट में 80 % चार्ज हासिल किया जा सकेगा।
परिचालन की तैयारी के तहत 120 किलोवॉट के चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें दो‑तरफा फास्ट चार्जिंग और स्वचालित बैटरी‑स्वैपिंग सुविधा होगी। इन स्टेशनों को मुख्य बस स्टॉप, डिपो और प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों के निकट स्थापित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा अवधि से बचा जा सके।
राज्य के परिवहन मंत्री ने इस विकास को बिहार को हरित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम कहा, और कहा कि यह योजना रोजगार सृजन और स्थानीय उद्योगों को भी समर्थन देगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में 2,500 से अधिक रोजगार सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े होंगे, जिसमें तकनीकी, मेंटेनेंस और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के क्षेत्र शामिल हैं।
बिहार में इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत पर स्थानीय बस ऑपरेटर संघ ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, लेकिन उन्होंने कुछ बिंदुओं पर आशंका जताई। उन्होंने कहा कि चार्जिंग सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता और बैटरी जीवनकाल को लेकर स्पष्ट नीति आवश्यक है, तथा ऑपरेटर्स को उचित टैरिफ़ मॉडल और रख‑रखाव समर्थन मिलने चाहिए।
बिजली वितरण कंपनी भी इस पहल के समर्थन में अपने नेटवर्क को अपग्रेड करने की योजना बना रही है, जिसमें रूट‑विशिष्ट सबस्टेशन और स्मार्ट ग्रिड तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और लोड‑शेडिंग मैकेनिज्म को ध्यान में रखते हुए नई योजना को लागू किया जाएगा, जिससे बिजली कटौती के जोखिम को न्यूनतम रखा जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इलेक्ट्रिक बस योजना बिहार सरकार की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करती है और केंद्र‑राज्य सहयोग को भी बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि यदि इस योजना को समय पर पूरा किया गया तो यह राज्य के विकास मॉडल में एक नई मिसाल स्थापित करेगा, जिससे अन्य राज्यों को भी समान पहल करने का प्रेरणा स्रोत मिलेगा।
आर्थिक दृष्टिकोण से इस पहल का प्रभाव कई स्तरों पर देखा जा रहा है। प्रथम, ईंधन लागत में कमी से सार्वजनिक परिवहन के किराया पर स्थिरता बनी रहेगी, जिससे कम आय वाले वर्ग को लाभ होगा। द्वितीय, स्थानीय निर्माण और बैटरियों की असेंबली में निवेश से औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे राज्य की जीडीपी में योगदान बढ़ेगा। तृतीय, कार्बन उत्सर्जन में कमी से स्वास्थ्य खर्चों में भी गिरावट की संभावना है।
Bihar’s 114‑bus electric rollout could become a template for “green growth” in India, turning climate ambition into a regional jobs engine and a low‑cost mobility lifeline for the poor.
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