Press "Enter" to skip to content

बिहार बाढ़: पप्पू यादव ने कहा ‘मैन-मेड डिजास्टर’, सरकारी भांड़ा फूटा

बिहार में लगातार बढ़ती बाढ़ की स्थिति ने राज्य के प्रमुख राजनीतिक नेताओं को भी चौंका दिया है। पूर्णिया से निर्वाचित स्वतंत्र सांसद पप्पू यादव ने इस आपदा को लेकर तीखा बयान दिया, जिसमें उन्होंने बाढ़ को “प्राकृतिक नहीं बल्कि मैन‑मेड डिजास्टर” कहा। उन्होंने सरकारी नीतियों, नदियों के तटबंधों की

बिगड़ी हालत और राहत कार्यों में संभावित भ्रष्टाचार को इस आपदा के प्रमुख कारण बताया। इस बयान के बाद विभिन्न पक्षों से प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं, जो इस संकट के प्रबंधन पर गहन प्रश्न उठाते हैं।

बिहार में बाढ़ की समस्या नई नहीं है; दशकों से नदियों के प्रवाह, जलवायु परिवर्तन

और बुनियादी ढांचे की कमी इस क्षेत्र को बार‑बार प्रभावित करती रही है। पिछले दो दशकों में गंगा, कोसी और सॉतेज जैसी प्रमुख नदियों ने बार‑बार किनारे तोड़कर आसपास के जिलों में जलभराव किया है। विशेषकर पूर्णिया, कटिहार और दरभंगा जैसे क्षेत्रों में सतही जल स्तर के बढ़ते स्तर ने

खेती, आवास और बुनियादी सेवाओं को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इन समस्याओं को लेकर कई बार सरकारी योजनाओं की घोषणा हुई, पर उनका कार्यान्वयन अक्सर अधूरा रह गया।

पप्पू यादव ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थानीय लोगों से सुनते हुए कहा कि “पानी, चारा, दूध जैसी

बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुँच नहीं बनी है”。 उन्होंने बताया कि कई गांवों में जलस्तर इतना ऊँचा हो गया है कि लोग अपने घरों से बाहर निकल ही नहीं पा रहे हैं। साथ ही, बाढ़ के कारण खेतों में फसलें नष्ट हो गईं, जिससे किसानों की आय पर भारी प्रभाव पड़ा

है। इन बातों के साथ ही उन्होंने स्थानीय प्रशासन की सहायता प्रणाली की कमी को भी उजागर किया, जिससे राहत कार्य में देरी और अकार्यक्षमता का आभास हुआ।

संबंधित प्राधिकरण ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत राहत कार्यों को तेज करने का आदेश दिया। जिला स्तर पर जल निकासी

के लिए अतिरिक्त पंप स्थापित किए गए और एरियल सपोर्ट के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचाई गई। हालांकि, कई स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि इन उपायों में समय की कमी और संसाधनों की अपर्याप्तता ने राहत कार्य को बाधित किया है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में सड़क

बंधी होने के कारण राफ़्ट और हेलीकॉप्टर के अलावा अन्य साधनों का उपयोग सीमित रहा।

बिहार सरकार ने बाढ़ के कारण हुए नुकसान की अनुमानित राशि का हवाला देते हुए कहा कि यह साल के पहले ही 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का आकलन किया गया है। राज्य के जल संसाधन

विभाग ने तटबंधों की वर्तमान स्थिति का सर्वेक्षण किया और बताया कि कई पुराने बांध और तटबंध अब अपनी डिजाइन क्षमता से नीचे काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन संरचनाओं का पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण तत्काल प्राथमिकता है, परंतु इसके लिए वित्तीय संसाधनों की कमी एक बड़ी बाधा है।

इस संदर्भ में सरकार ने केन्द्र सरकार से अतिरिक्त बजट सहायता का अनुरोध किया है।

पप्पू यादव की इस टिप्पणी पर केंद्रीय जल मंत्रालय ने त्वरित प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन एक संयुक्त प्रयास है और सरकार सभी स्तरों पर समन्वित कार्य कर रही है। उन्होंने

यह भी कहा कि बाढ़ रोकथाम के लिए जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। साथ ही, केंद्र ने पहले ही बिहार को आपातकालीन वित्तीय सहायता प्रदान की है और अगले महीने तक अतिरिक्त संसाधन भेजने का वचन दिया है। इस प्रकार, केंद्र-राज्य

सहयोग के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास जारी है।

विपक्षी दलों ने पप्पू यादव के बयान को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ दर्ज करायीं। कुछ नेताओं ने कहा कि यह बयान “सही समय पर सही मुद्दे को उठाता है” और सरकार को जवाबदेह ठहराने की जरूरत है। वहीं कुछ ने

इस बयान को “राजनीतिक हंगामा” कहा, यह कहते हुए कि बाढ़ का कारण केवल प्राकृतिक कारक ही हैं और मानव निर्मित त्रुटियों का प्रमाण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। इन विरोधी विचारों ने राजनीतिक विमर्श को और तीखा कर दिया है, जिससे सार्वजनिक चर्चा में विभिन्न दृष्टिकोणों का समावेश

हुआ है।

सामाजिक संगठनों ने भी राहत कार्य में अपनी भूमिका को उजागर किया। कई एनजीओ ने जल निकासी, साफ‑सफाई और खाद्य वितरण के लिए स्वयंसेवकों का समूह तैयार किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता के साथ

Updated: September 5, 2026

Bihar’s recurring floods are morphing from a climate‑driven calamity into a political fault line, where accusations of “man‑made disaster” could force the state to overhaul its embankment policies or face a credibility crisis.
If the central‑state partnership stalls on funding, the growing public distrust may push grassroots

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from बिहार ब्रेकिंग न्यूज़More posts in बिहार ब्रेकिंग न्यूज़ »

Be First to Comment

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *