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विजयपुरा में लाइंस के नेतृत्व कार्यक्रम YLSC का लॉन्च, कक्षा 8-12 के छात्रों को मिलेगा 4 महीने का प्रशिक्षण

विधानसभा के युवा नेता सामाजिक परिवर्तन (Young Leaders for Social Change – YLSC) कार्यक्रम को आज विजयपुरा में औपचारिक तौर पर लॉन्च किया गया, जिसमें कक्षा आठ से बारह तक के छात्रों को चार महीने के अवधि में सामाजिक और नागरिक नेतृत्व के कौशल सिखाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम

का उद्घाटन राज्य के शिक्षा मंत्री ने किया और उपस्थित कई शैक्षणिक संस्थानों के प्रधानाचार्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी इस पहल में अपना समर्थन व्यक्त कर रहे थे। इस पहल को लोकतांत्रिक संगठनों के सहयोग से विकसित किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग को सामुदायिक मुद्दों में सक्रिय

भागीदारी के लिये तैयार करना है।

YLSC कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार, चार महीने की अवधि में छात्रों को कार्यशालाएँ, केस स्टडीज और वास्तविक परियोजनाओं के माध्यम से सामाजिक बदलाव के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जाएगा। इसमें पर्यावरण संरक्षण, शैक्षिक समानता, स्वास्थ्य जागरूकता और स्थानीय शासन में भागीदारी जैसे

विषयों को गहराई से अध्ययन किया जाएगा। प्रत्येक सत्र में विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे प्रतिभागी अपने विचारों को वास्तविक कार्य योजना में परिवर्तित कर सकें। कार्यक्रम का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शैक्षिक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि छात्रों की सीखने

की प्रक्रिया व्यवस्थित और प्रभावी हो।

इस पहल की उत्पत्ति का इतिहास 2022 में लोकतांत्रिक संगठनों द्वारा युवा शक्ति को संगठित करने की आवश्यकता से जुड़ा है। तब से कई छोटे-छोटे कार्यशालाओं और स्थानीय स्तर के प्रोजेक्ट्स ने इस विचार को साकार किया, परंतु व्यापक स्तर पर एक सुदृढ़ और

संरचित कार्यक्रम की कमी थी। इस अंतर को भरने के लिये YLSC को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया गया। कार्यक्रम के संचालक ने कहा कि इस मॉडल को लागू करके न केवल छात्रों की नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सामाजिक समस्याओं के समाधान में नई

ऊर्जा भी प्रवाहित होगी।

लॉन्च समारोह में उपस्थित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि आज के छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का अभाव है, और ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से रूबरू कराया जा सकता है।

एक प्रमुख विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से छात्रों की आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान कौशल में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह पहल भविष्य में शैक्षणिक पाठ्यक्रम में एक अनिवार्य घटक बन सकती है।

समाजसेवी समूहों ने भी

YLSC के समर्थन में बयान जारी किया। एक प्रमुख एनजीओ के प्रवक्ता ने कहा कि युवा वर्ग को सामाजिक मुद्दों की समझ देना और उन्हें सक्रिय रूप से भागीदार बनाना अत्यावश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि कई सामाजिक समस्याओं का मूल कारण युवा वर्ग की अज्ञानता या असहभागिता है, और इस

तरह के कार्यक्रम इस खाई को पाटने में मदद करेंगे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियों के साथ मिलकर इस पहल को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

सरकार ने भी इस कार्यक्रम को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया। शिक्षा विभाग ने घोषणा की कि इस प्रकार के

प्रशिक्षण को सार्वजनिक और निजी विद्यालयों में एकीकृत किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकेंगे। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस पहल के तहत चयनित छात्रों को मान्यताप्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जो उनके शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य में सहायक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने

यह भी कहा कि इस पहल को सफल बनाने के लिये विभिन्न सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय किया जाएगा।

वाणिज्यिक संस्थानों ने भी YLSC में भागीदारी का इरादा जताया। कुछ प्रमुख कंपनियों ने अपने सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम के तहत इस पहल को वित्तीय सहयोग प्रदान करने का प्रस्ताव रखा

है। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में मार्गदर्शन देना न केवल सामाजिक हित में है, बल्कि भविष्य की कार्यशक्तियों को तैयार करने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सहयोग से कार्यक्रम की पैमाइश और सततता सुनिश्चित हो सकेगी, जैसा कि कई उद्योग विशेषज्ञों ने रेखांकित

किया है।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो YLSC कार्यक्रम का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। सामाजिक परियोजनाओं में भाग लेने वाले छात्र स्थानीय व्यवसायों के साथ सहयोग करेंगे, जिससे छोटे उद्योगों को नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। इसके अलावा, सामाजिक परिवर्तन की दिशा

Updated: September 5, 2026


The state’s education minister inaugurated the Young Leaders for Social Change (YLSC) programme in Vijaypur, a four‑month curriculum that will equip students from grades eight to twelve with civic‑leadership skills through workshops, case studies and community projects. Backed by schools, NGOs, corporate CSR and government schemes, the initiative aims to foster active participation in local issues and bolster students’ problem‑solving and critical‑thinking abilities.

Insight: The YLSC experiment could turn classrooms into incubators for grassroots activism, forcing schools to reckon with real‑world stakes rather than textbook theory. If students start delivering tangible community projects, the ripple effect may reshape how Indian education measures success—shifting the yardstick from exam scores to civic impact.

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