वर्तमान बाढ़ में 11 जिलों—पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल—के 70 प्रखंडों की 368 ग्राम पंचायतें प्रभावित हैं। जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कई क्षेत्रों में 10 फीट से अधिक जल स्तर दर्ज किया गया है, जिससे बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त और आवासीय क्षेत्र डूबे हुए हैं। कई पुलों और सड़कों को जल बहाव के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
प्रशासन ने आपातकालीन राहत केंद्र स्थापित कर प्रभावित लोगों को अस्थायी आश्रय, भोजन और चिकित्सा सहायता प्रदान की है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और भारतीय सेना को तैनात कर बचाव कार्य तेज़ किया। साथ ही, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईटी) के विशेषज्ञों को बाढ़ प्रबंधन के लिए तकनीकी सलाह देने हेतु बुलाया गया। स्थानीय स्वयंसेवी समूहों ने भी राहत सामग्री का वितरण शुरू कर दिया।
बिहार के मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति को “अत्यंत गंभीर” कह कर सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वयित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को तत्काल सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। राष्ट्रीय मौसम विभाग ने आगामी दो हफ्तों में और भी भारी वर्षा की संभावना की चेतावनी जारी की, जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। इस बीच, जल प्रबंधन के लिए अतिरिक्त जलाशयों और बांधों का निर्माण भी चर्चा में आया है।
विपक्षी दलों ने सरकार की बाढ़ रोकथाम नीति की कमी पर सवाल उठाए। राज्य के कई विधायक और सांसद ने कहा कि पूर्व में तैयार की गई बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को लागू नहीं किया गया, जिससे आज की त्रासदी हुई। कुछ कांग्रेस नेता ने केंद्रीय सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन की मांग की। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने स्थानीय प्रशासन को जल निकासी के लिए आवश्यक उपकरण तेज़ी से उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
वाणिज्यिक वर्ग ने भी बाढ़ के आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता जताई। कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों को जल क्षति के कारण उत्पादन में बाधा का सामना करना पड़ा। कृषि क्षेत्र में फसल नुकसान का अनुमान 15 करोड़ रुपये से अधिक है, जिससे किसान वर्ग पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। बैंकिंग संस्थानों ने प्रभावित किसानों को ऋण पुनर्भुगतान में छूट देने का प्रस्ताव रखा है। इस बीच, उद्योग संघों ने बुनियादी ढाँचे की मरम्मत के लिए शीघ्र कार्यवाही की अपील की।
सामाजिक संगठनों ने प्रभावित परिवारों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है। कई एनजीओ ने बाढ़ पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष शिविर स्थापित कर पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जलशोधन इकाइयों की कमी के कारण जलजनित रोगों के बढ़ते मामलों की चिंता भी जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित रोगों के रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान तेज़ किया है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस बाढ़ को जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने कहा कि जलवायु जोखिम प्रबंधन में निवेश की कमी ही ऐसी आपदाओं की मुख्य वजह है। विश्व बैंकर ने बिहार को जल प्रबंधन परियोजनाओं के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करने की पेशकश की है।
The flood’s scale lays bare how Bihar’s decades‑long neglect of climate‑smart infrastructure turns every heavier monsoon into a humanitarian crisis, not just a weather event. If the state finally channels the promised international financing into resilient water‑management systems.
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