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पटना के पास बनेगा नया मेगा सिटी, 66 लाख लोगों के लिए 1.8 लाख एकड़ में पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप

पटना के पास पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में एक नया शहरी प्रकल्प आधिकारिक रूप से घोषित किया गया है। राज्य सरकार ने इस योजना के विस्तृत स्वरूप को प्रकाशित किया, जिसमें 66 लाख निवासियों को समायोजित करने हेतु 1.8 लाख एकड़ जमीन पर एक विशाल शहर का निर्माण प्रस्तावित है।
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यह नई नगरी वर्तमान पटना नगर सीमाओं से लगभग डेढ़ गुना अधिक क्षेत्रफल वाली होगी और इसका लक्ष्य जनसंख्या विस्फोट, बुनियादी ढांचा अभाव और आवासीय दबाव को कम करना है। योजना पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए 30 सितंबर तक की समयसीमा निर्धारित की गई है।बिहार सरकार ने इस परियोजना को 2027‑2032 की अवधि में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें प्रथम चरण में 15 लाख निवासियों के लिए आवास, जल‑विद्युत, स्वास्थ्य और शैक्षिक सुविधाएँ स्थापित की जाएँगी।
योजना के तहत 15 ग्राम, 45 बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स और कई औद्योगिक क्लस्टर बनाये जाने की रूपरेखा है। इस प्रकल्प की कुल लागत अनुमानित 3.5 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और राज्य की पूँजी निवेश दोनों का योगदान रहेगा।पिछले कुछ दशकों में पटना में तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और सीमित शहरी भूमि ने कई सामाजिक‑आर्थिक चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं। 2021‑22 के आँकड़ों के अनुसार, पटना का शहरी जनसंख्या वृद्धि दर 4.6 % थी, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक थी।
इससे आवासीय कीमतों में वृद्धि, किफ़ायती आवास की कमी और बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ा। इस संदर्भ में पाटलिपुत्र टाउनशिप को एक वैकल्पिक केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।परियोजना के मुख्य घटकों में एकीकृत जल‑स्वच्छता प्रणाली, 10 गिगावॉट की सौर ऊर्जा उत्पादन इकाई, और 150 किलोमीटर लंबी जल-परिवहन नेटवर्क शामिल है। साथ ही, 5 गिगाबिट फ़ाइबर‑ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित की जाएगी।

शहरी नियोजन में हरित क्षेत्रों को 30 % तक बढ़ाने की योजना है, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता को बल मिलता है।

प्रमुख घटनाक्रमों में 12 जुलाई को पटना महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMGDA) ने टाउनशिप के लिए विस्तृत ज़ोनिंग प्लान प्रस्तुत किया। इस प्लान में रेज़िडेंशियल, कमर्शियल, औद्योगिक और विशेष आर्थिक क्षेत्र को स्पष्ट रूप से विभाजित किया गया है। साथ ही, 15 अक्टूबर को राज्य के वित्त विभाग ने इस प्रकल्प के लिए 1,200 करोड़ रुपये की प्रारंभिक अनुदान स्वीकृति दे दी। इस चरण में प्राथमिक बुनियादी ढाँचा जैसे सड़क, जलापूर्ति और बिजली ग्रिड की शुरुआत होगी।

पिछले महीने, पटना के नगर निगम के अध्यक्ष ने टाउनशिप के सामाजिक लाभों पर प्रकाश डाला, कहा कि यह परियोजना शहरी प्रवास को नियंत्रित करने और ग्रामीण‑शहरी अंतर को घटाने में सहायक होगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि नई नगर योजना में किफ़ायती आवास इकाइयों को 40 % तक प्राथमिकता दी गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को भी लाभ मिलेगा।

टाउनशिप के विकास में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए राज्य ने 30 वर्ष की लीज़ योजना और विशेष कर रियायतों की घोषणा की है। इस पहल से बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों और औद्योगिक समूहों ने अपना रुचि जताई है। हालांकि, कुछ पर्यावरणीय संगठनों ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) पर सवाल उठाए हैं, विशेषकर जल स्रोतों और वन क्षेत्रों के संभावित नुकसान को लेकर।

राजनीतिक स्तर पर, मुख्यमंत्री ने इस प्रकल्प को बिहार के समग्र आर्थिक विकास का प्रतीक कहा, और कहा कि यह नई शहरी इकाई रोजगार सृजन, उद्योग विकास और राजस्व वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

Bihar has announced the Patliputra Satellite Township, a sprawling 1.8‑ lakh‑acre city to house up to 6.6 million people and ease Patna’s housing crunch, with a target completion by 2032 and an estimated cost of ₹3.5 trillion. The plan, backed by state and central funds, earmarks extensive infrastructure—from solar power and fiber‑optic internet to water transport and green spaces—while inviting private investment despite lingering environmental concerns.

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