इन क्षेत्रों में दो‑तरफा समझौतों और संयुक्त उद्यमों ने भारतीय उद्योग को नई तकनीक और पूंजी तक पहुंच प्रदान की, जिससे निर्यात‑आधारित उत्पादन में तेजी आई।
वर्तमान वैश्विक आर्थिक माहौल में कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को धीमी गति, महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला विघटन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में भारत की 7.8 प्रतिशत की तेज़ी ने नीतिगत स्थिरता और बाजार के विश्वास को दर्शाया। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च में वृद्धि, साथ ही कृषि क्षेत्र में बेहतर उत्पादन ने समग्र आर्थिक परिदृश्य को सहारा दिया। सरकार द्वारा लागू किए गए कर सुधार और वित्तीय प्रोत्साहन भी इस वृद्धि में सहायक रहे।
पहली तिमाही की आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण और सेवाओं के क्षेत्र में क्रमशः 8.2 और 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यह दर्शाता है कि उत्पादन और सेवा दोनों क्षेत्रों ने निर्यात एवं घरेलू मांग के दोहरे समर्थन से गति प्राप्त की। साथ ही, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने निवेशक विश्वास को सुदृढ़ किया। इस अवधि में निर्यात में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी और आयात में 9 प्रतिशत की गिरावट ने व्यापार संतुलन को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
आर्थिक वृद्धि के साथ ही रोजगार सृजन में भी सुधार देखा गया। औद्योगिक क्षेत्रों में नई नौकरियों का सृजन और सेवा क्षेत्र में विविध रोजगार अवसरों ने बेरोजगारी दर को घटाने में मदद की। सरकार ने विशेष रूप से युवा और महिलाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम तेज़ी से लागू किए, जिससे श्रम शक्ति की उत्पादकता बढ़ी। इन उपायों को देखते हुए, कई राज्य सरकारों ने भी निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक ज़ोन स्थापित किए।
गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे औद्योगिक केंद्रों में नई फैक्ट्रियों की स्थापना और विस्तार ने आर्थिक विस्तार को और तेज़ किया। इन राज्यों ने निवेशकों को अनुकूल नीतियों, कर छूट और बुनियादी ढांचा समर्थन के साथ आकर्षित किया। इस प्रवृत्ति ने न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाई, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक असंतुलन को भी कम किया। इसके अतिरिक्त, छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को वित्तीय सहायता और बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए नई योजनाएं शुरू की गईं।
अमित शाह ने कहा कि रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग ने न केवल सुरक्षा को सुदृढ़ किया, बल्कि उच्च-तकनीकी उद्योगों को भी प्रोत्साहन दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने कई देशों के साथ रक्षा उत्पादन में साझेदारी की है, जिससे स्थानीय निर्माताओं को विश्व स्तरीय तकनीक और अनुसंधान तक पहुंच मिली। इस प्रकार के सहयोग ने निर्यात में वृद्धि और आयात पर निर्भरता को घटाने में मदद की।
ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत ने विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लागू की गईं, जिससे सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। सरकार ने विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उत्पादन में सहयोग किया, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता दोनों को लाभ मिला। इन कदमों ने आर्थिक वृद्धि के साथ सतत विकास को भी सुनिश्चित किया।
वित्तीय बाजारों ने भी इस आर्थिक गति को सकारात्मक रूप में अभिव्यक्त किया। स्टॉक एक्सचेंज में प्रमुख इंडेक्स में स्थिर उछाल देखी गई, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा।
Updated: September 7, 2026
India’s economy logged a robust 7.8% GDP growth in Q1 FY24, driven by strong manufacturing, services and a 15.6% surge in foreign direct investment, despite global headwinds. Strategic partnerships in defence, technology, energy and infrastructure, along with targeted policy reforms, have boosted exports, curbed imports and helped create jobs across the country.
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