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बिहार में बाढ़ का कहर: 13 जिलों में 27 लाख लोग प्रभावित, CM सम्राट चौधरी ने कम्युनिटी किचन का लिया जायजा

Bihar Flood Update 2026: बिहार में नदियों के लगातार उफान के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में करीब 27 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को वैशाली और भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों के लिए चलाए जा रहे कम्युनिटी किचन और राहत व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने और संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।

190 कम्युनिटी किचन, 1,429 नावें राहत कार्य में तैनात

बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में 190 कम्युनिटी किचन संचालित किए जा रहे हैं। वहीं राहत एवं बचाव अभियान के लिए 1,429 नावों को लगाया गया है। सरकार का जोर प्रभावित परिवारों को समय पर भोजन, सुरक्षित स्थान और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने पर है। मुख्यमंत्री ने राहत केंद्रों की व्यवस्था का जायजा लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

वैशाली और भागलपुर में CM ने देखा राहत इंतजाम

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी वैशाली और भागलपुर में कम्युनिटी किचन का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों को तटबंधों की लगातार निगरानी करने और कमजोर व संवेदनशील स्थानों पर विशेष नजर रखने को कहा गया। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि किसी भी आपात स्थिति में बचाव दल और आवश्यक संसाधन तुरंत मौके पर पहुंच सकें।

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

पटना में गंगा का जलस्तर भी चिंता का कारण बना हुआ है। सोमवार सुबह 6 बजे गांधी घाट पर गंगा 50.41 मीटर के स्तर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान से 1.57 मीटर ऊपर है। गांधी घाट और हाथीदह में गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर तक पहुंचने के बाद निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार की कई प्रमुख नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक गंडक डुमरियाघाट और हाजीपुर में, कोसी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में तथा गंगा हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर है। इसके अलावा पुनपुन, बागमती और घाघरा नदी के जलस्तर पर भी प्रशासन लगातार नजर रख रहा है।

सितंबर में सामान्य से 55 फीसदी ज्यादा बारिश

बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के पीछे लगातार बारिश और नदियों में बढ़ता जलस्तर प्रमुख कारण है। अधिकारियों के अनुसार सितंबर में अब तक बिहार में 69.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 55 फीसदी अधिक है। भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ा और कई इलाकों में पानी फैल गया। प्रशासन को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

इंजीनियरों को तैयार रखने के निर्देश

बाढ़ की चुनौती को देखते हुए इंजीनियरों और संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधन तथा मशीनरी तैयार रखने को कहा गया है। तटबंधों की निगरानी के साथ-साथ कमजोर स्थानों की पहचान कर वहां तत्काल कार्रवाई की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य बाढ़ की स्थिति और बिगड़ने पर तेजी से बचाव अभियान शुरू करना है।

लोगों से नदी के पास नहीं जाने की अपील

प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से नदियों और तेज बहाव वाले पानी के नजदीक नहीं जाने की अपील की है। बढ़ते जलस्तर के बीच नदी किनारे जाना जानलेवा साबित हो सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को नदी एवं बाढ़ के पानी से दूर रखने की सलाह दी गई है।

राहत और बचाव अभियान पर सरकार का फोकस

करीब 27 लाख लोगों के प्रभावित होने के बाद राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करना है। कम्युनिटी किचन के जरिए भोजन उपलब्ध कराने के साथ नावों की मदद से प्रभावित इलाकों तक पहुंचने और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम जारी है।

बिहार में मौजूदा बाढ़ की स्थिति सिर्फ नदियों के जलस्तर बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर आबादी के प्रभावित होने के कारण यह एक व्यापक मानवीय चुनौती बन गई है। 13 जिलों में करीब 27 लाख लोगों के प्रभावित होने के बीच राहत व्यवस्था की निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण है। खासकर गंगा, गंडक और कोसी जैसी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। आने वाले दिनों में बारिश और नदी के जलस्तर की स्थिति राहत एवं बचाव अभियान की दिशा तय करेगी। सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए तटबंधों की निगरानी, भोजन की उपलब्धता और समय पर निकासी सबसे अहम प्राथमिकताएं रहेंगी।

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