पिछले महीने में मांझी को हल्के सिर दर्द और थकान की शिकायतें थीं, जिसके बाद उन्हें एक निजी क्लिनिक में जांच के लिए भेजा गया था। प्रारंभिक रक्त परीक्षण में प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य सीमा से नीचे पाई गई, जिससे डॉक्टरों ने उन्हें एंटीकोआग्युलेंट दवाओं से बचने की सलाह दी। इस दौरान, उनके परिवार ने एक विस्तृत चिकित्सा रिपोर्ट तैयार कर, राज्य के स्वास्थ्य विभाग को भेजी, जिसमें आगे की जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया।
22 अगस्त को मांझी को अत्यधिक थकान और सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई, जिसके बाद उन्हें तुरंत दिल्ली के एम्स में ट्रांसफर किया गया। एम्स के प्रमुख ने बताया कि मांझी को आईसीयू में भर्ती किया गया है और उनका इलाज प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन तथा विशेष दवाओं से किया जा रहा है। डॉक्टरों ने कहा कि स्थिति अभी भी नाजुक है और लगातार मॉनिटरिंग की आवश्यकता है।
एम्स के आयुर्विज्ञान विभाग ने कहा कि प्लेटलेट्स की कमी रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को बाधित करती है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, उन्होंने मांझी को उच्चतम स्तर की देखभाल प्रदान करने का आश्वासन दिया। अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि मांझी को आजीवन रक्त जांच और प्लेटलेट समर्थन की आवश्यकता हो सकती है, जिससे उनके स्वास्थ्य को स्थिर करने में समय लग सकता है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में, मांझी की बीमारी ने राज्य में विभिन्न दलों के बीच तीव्र चर्चा को जन्म दिया है। विपक्षी दल ने इस अवसर का उपयोग कर राज्य सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर करने की कोशिश की है, जबकि शासक दल ने मांझी के स्वास्थ्य के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सरकारी समर्थन की पुष्टि की है। कई नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मांझी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं, साथ ही इस घटना को राजनीतिक प्रयोगशाला के रूप में नहीं देखना चाहते।
बिहार के मुख्यमंत्री ने मांझी को निजी तौर पर फोन कर, उनके स्वास्थ्य में सुधार की कामना व्यक्त की और बताया कि राज्य सरकार सभी आवश्यक सहयोग प्रदान करने को तैयार है। वहीं, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मांझी की स्थिति को लेकर सरकार ने सभी आवश्यक संसाधनों को जुटाया है और एम्स के डॉक्टरों के साथ मिलकर उपचार योजना तैयार की गई है।
बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने मांझी के स्वास्थ्य के प्रति गहरा दुख जताते हुए कहा कि उनका इलाज शीघ्र हो, यह प्रदेश की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मांझी जैसे अनुभवी नेताओं की अनुपस्थिति में सामाजिक कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है, जिससे जनता को प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
दूसरी ओर, कई सामाजिक संगठनों ने मांझी के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है, यह मानते हुए कि उच्चतम स्तर की चिकित्सा देखभाल अत्यधिक खर्चीली होती है। इस पर स्थानीय व्यापार संघों ने भी समर्थन व्यक्त किया और कहा कि यदि आवश्यक हो तो वे भी दान देने को तैयार हैं।
आर्थिक दृष्टिकोण से मांझी की बीमारी का असर स्पष्ट है। वह कई सामाजिक कल्याण योजनाओं के प्रमुख हैं, जिनके संचालन में उनके निरंतर योगदान की अपेक्षा रहती है। उनकी अनुपस्थिति से इन योजनाओं की कार्यवाही में विलंब हो सकता है, जिससे लाभार्थियों को असुविधा हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में त्वरित प्रशासनिक उपाय आवश्यक हैं, ताकि योजना कार्य में कोई कमी न आए।
सामाजिक प्रभाव की बात करें तो मांझी का नाम बिहार में सामाजिक समन्वय और विकास कार्यों से जुड़ा है। उनका स्वास्थ्य संकट स्थानीय समुदायों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ वे सक्रिय रूप से कार्य करते हैं। इस कारण कई सामाजिक समूहों ने उनके स्वास्थ्य की प्रगति पर नियमित अपडेट की माँग की है, जिससे जनता में भरोसा बना रहे।
Bihar stalwart Jitan Ram Manjhi has been shifted to AIIMS Delhi’s ICU after a sharp drop in his platelet count raised serious bleeding risks, prompting intensive transfusion treatment. His deteriorating health has sparked political debate and concern over the impact on regional welfare programmes and leadership continuity.
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