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तमिलनाडु सरकार ने पत्तिनापक्कम में नई विधानसभा-सचिवालय परिसर के निर्माण को सिद्धांततः मंजूरी दी; लागत 4,500 करोड़ रुपये

तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के फोरशोर एस्टेट में स्थित पत्तिनापक्कम में नई विधानसभा‑सेक्रेटेरियट कॉम्प्लेक्स के निर्माण को सिद्धांततः मंजूरी दे दी है।
इस घोषणा के बाद, 25.55 एकड़ भूमि पर एकीकृत प्रशासनिक केंद्र स्थापित करने की योजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार ने इस परियोजना को राज्य की शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाने और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्यों से जोड़ते हुए बताया है। इस निर्णय से शहर के शहरी विकास पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि इस बड़े पैमाने के निर्माण से भूमि उपयोग और ट्रैफ़िक पर नई चुनौतियाँ उत्पन्न होंगी।पत्तिनापक्कम में प्रस्तावित इस परिसर की पृष्ठभूमि 2019 में शुरू हुई जब राज्य ने राजधानी के बुनियादी ढांचे को पुनर्संरचना करने की नीति अपनाई। तब से विभिन्न सरकारी रिपोर्टों में पुराने विधानसभा भवन की क्षमताओं की कमी और सुरक्षा जोखिमों का उल्लेख किया गया था। फोरशोर एस्टेट को चुनने का कारण इस क्षेत्र की उपलब्धता, समुद्री किनारे के निकटता और मौजूदा प्रशासनिक केंद्रों से दूरी को कम करना था। इस योजना का पहला मसौदा 2022 में तैयार किया गया, जिसमें तीन मुख्य इमारतें—विधानसभा, सचिवालय और सार्वजनिक सुविधाओं का समावेश था।

वित्तीय रूपरेखा के अनुसार, इस परियोजना के लिये अनुमानित खर्च 4,500 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इसमें भूमि अधिग्रहण, निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास शामिल है। सरकार ने कहा कि इस खर्च का अधिकांश भाग राज्य बजट से और शेष पूंजी बाजार से उधार लेकर उठाया जाएगा। परियोजना को 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि प्रारंभिक चरण में 2024 में ठेकेदार को नियुक्त किया जाएगा। इस अवधि में पर्यावरणीय मंजूरी, सामाजिक प्रभाव आकलन और स्थानीय लोगों की पुनर्वास प्रक्रिया को पूरा किया जाना आवश्यक है।

पिछले दो महीनों में इस प्रस्ताव पर कई सार्वजनिक सुनवाइयाँ आयोजित की गईं। सुनवाइयों में स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और नागरिक समूहों ने भूमि उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर आपत्तियां जताईं। कुछ समूहों ने कहा कि समुद्री तट के निकट निर्माण से जलवायु परिवर्तन के जोखिम बढ़ेंगे, जबकि अन्य ने बताया कि नई इमारतों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इन सुनवाइयों के बाद, सरकार ने सभी आपत्तियों का दस्तावेजीकरण किया और आवश्यक संशोधन करने का आश्वासन दिया।

अध्यक्षीय समिति ने प्रारंभिक पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) को मंजूरी दी है, जिसमें समुद्र तट की सुरक्षा, जल निकासी प्रणाली और हरित क्षेत्र की योजना को प्रमुख माना गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा और संभावित प्रदूषण को न्यूनतम रखने के लिए तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल डिजाइन, सौर ऊर्जा उपयोग और जल पुनर्चक्रण प्रणाली को भी शामिल किया गया है।

सरकार ने इस परियोजना को राज्य के भविष्य के लिए एक रणनीतिक निवेश कहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई विधानसभा‑सेक्रेटेरियट कॉम्प्लेक्स से प्रशासनिक प्रक्रियाएँ तेज़ होंगी और जनता को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस केंद्र के निर्माण से चेन्नई के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। सरकार ने इस बात को भी दोहराया कि सभी नियामक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास योजना लागू की जाएगी।

विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताई। प्रमुख विपक्षी नेता ने कहा कि सरकार ने पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श नहीं किया और मौजूदा सार्वजनिक जमीन को निजी लाभ के लिये उपभोग कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक प्रतिष्ठा बनाना है, न कि सार्वजनिक हित। विपक्ष ने अदालत में इस फैसले को चुनौती देने की घोषणा की और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए।

समान्य जनता के बीच इस योजना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखी जा रही हैं। कई नागरिकों ने कहा कि नई इमारतों से सरकारी कार्यकुशलता बढ़ेगी और जनता को तेज़ सेवा मिलेगी। वहीं, कुछ समूहों ने पर्यावरणीय जोखिमों और स्थानीय व्यवसायों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंताएँ व्यक्त कीं।

सामाजिक मीडिया पर इस मुद्दे पर विभिन्न दृष्टिकोणों की तेज़ी से चर्चा हो रही है, जहां नागरिक अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

वित्तीय विश्लेषकों ने इस परियोजना के आर्थिक प्रभावों पर टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि 4,500 करोड़ रुपये की निवेश राशि राज्य के कुल जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देगी और निर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करेगी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिये ऋण भार को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करना आवश्यक है।


Tamil Nadu’s cabinet has cleared the 4,500‑crore Patinamakam project to house a new assembly‑secretariat complex on 25.55 acres in Chennai’s Foreshore Estate, aiming to modernise administration and spur economic growth. While the plan promises faster services and jobs, it faces opposition over land‑use, environmental concerns and the adequacy of public consultation.

The project creates a consolidated administrative hub, aiming to modernize state governance and improve service efficiency. Its scale also impacts Chennai’s urban planning, influencing land use, traffic patterns, and local infrastructure development.

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