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आठ परिषद ने राज्य सरकार के उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगें को हटाने की मांग के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर व्यापक सड़क बंदी का ऐलान किया

मणिपुर के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित लीअंगमाई गांव में 13 मई को छह नागरिकों के अपहरण और हत्या की घटना के बाद, संयुक्त नगा परिषद (United Naga Council) ने राज्य सरकार के उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगें को हटाने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। इस मांग के साथ परिषद ने राष्ट्रीय

राजमार्ग 2 (NH‑2) पर व्यापक सड़क बंदी का इरादा घोषित किया है, जिससे इस क्षेत्र की आवागमन और वस्तु परिवहन पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है। इस कदम को स्थानीय प्रशासन ने गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में पहचाना है।

संयुक्त नगा परिषद, जो मणिपुर के नगा समुदायों के कई प्रमुख संगठनों

को एकत्रित करती है, का गठन 1998 में हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य नगा जातीय समूहों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हितों की रक्षा करना है। पिछले दो दशकों में इस परिषद ने कई बार असंतोष व्यक्त किया है, विशेषकर जब स्थानीय प्रशासन की नीतियों को नगा समुदायों के प्रति अनादरपूर्ण माना गया। इस

बार की मांग का मूल कारण 13 मई को हुए अत्याचार के पीछे जिम्मेदार व्यक्तियों को तत्काल कड़ी सजा देना और राज्य सरकार को जवाबदेह ठहराना है।

लीअंगमाई में हुई हिंसा के पीछे नगा संगठनों और कुछ स्थानीय मिलिशिया समूहों के बीच पुराने संघर्ष का इतिहास है। 2010 के दशक में भी इसी

क्षेत्र में कई बार सशस्त्र टकराव हुए थे, जिनमें नागरिकों की हताहत भी हुई। यह घटना न केवल नगा समुदाय के भीतर बल्कि मणिपुर के अन्य जनजातीय समूहों में भी तनाव की स्थिति उत्पन्न कर रही है। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में व्यापक जांच की घोषणा की थी, परंतु अभी तक कोई ठोस

निष्कर्ष नहीं निकले हैं, जिससे पीड़ित परिवारों में निराशा की लहर तेज हो गई है।

संघीय सरकार ने इस घटना पर तुरंत टिप्पणी की, कहा कि कोई भी हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच में पूरी तरह सहयोग दिया जाएगा। केंद्र के गृह मंत्रालय ने मणिपुर में सुरक्षा बलों को बढ़ाने का

निर्देश दिया, जबकि राज्य सरकार ने इस बात को दोहराया कि वह कानूनी प्रक्रिया के अनुसार न्याय दिलाने के लिए तत्पर है। इन बयानों के बावजूद, नगा परिषद ने कहा कि मौजूदा उपायों से उनका भरोसा नहीं जीत पाए हैं और अब उन्हें सख्त कदम उठाने पड़ेगा।

परिषद के प्रमुख ने एक प्रेस

कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग पर 48 घंटे की बंदी का प्रस्ताव रखा है, जिससे राजमार्ग पर सभी वाहनों को रोकना होगा। उन्होंने कहा, “जब तक हमारे लोग सुरक्षित नहीं होते और न्याय नहीं मिलता, तब तक हम इस तरह के उपायों से पीछे नहीं हटेंगे।” इस घोषणा के बाद, कई लॉजिस्टिक

कंपनियों ने अपने मार्गों को बदलने की सूचना दी, और स्थानीय व्यापारियों ने संभावित नुकसान के बारे में चिंता जताई।

राज्य पुलिस ने इस सड़क बंदी को रोकने के लिए विशेष बलों की तैनाती की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी अवैध रूप से राजमार्ग पर बाधा डालता है तो

सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने स्थानीय प्रशासन को अनुरोध किया कि वह प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि किसी भी आपदा या चिकित्सा आपातकाल में देरी न हो।

उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगें ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि “हमारी सरकार सभी नागरिकों के जीवन

और संपत्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है” और उन्होंने स्वयं को इस मामले में सीधे शामिल होने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिषद के कोई भी सदस्य हिंसात्मक कार्य करेंगे तो उन्हें कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। इस बयान के बाद, कई नगा युवा समूहों ने सोशल मीडिया

पर सरकार की नीतियों को आलोचना की, लेकिन साथ ही उन्होंने शांतिपूर्ण समाधान की भी अपील की।

पड़ोसी राज्य असम ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की। असम की मुख्यमंत्री ने कहा कि “राज्य के बीच आपसी सहयोग से ही इस तरह के संघर्ष को रोका जा सकता है” और उन्होंने मणिपुर

सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की। राष्ट्रीय स्तर पर कई माननीय सांसदों ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि “कानून के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” और उन्होंने संसद में इस विषय पर विशेष सत्र का प्रस्ताव रखा है।

आर्थिक दृष्टिकोण से, राष्ट्रीय राजमार्ग 2 के बंद होने से क्षेत्रीय

व्यापार में 30 प्रतिशत तक की हानि का अनुमान लगाया गया है। कई छोटे व्यवसायी और किसान इस बाधा से अपनी उपज को बाजार तक पहुँचाने में कठिनाई का सामना करेंगे। इसके अलावा, परिवहन लागत में वृद्धि और देरी के कारण वस्तुओं की कीमतों में


The United Naga Council is demanding the removal of Manipur’s deputy chief minister and justice for six civilians abducted and killed in Liangmai, threatening a 48‑hour blockade of National Highway 2 that could cripple regional traffic and trade. State and central authorities have pledged heightened security and legal action, but the council says only a decisive response will end the standoff.

The Naga Council’s road blockade is less a protest over a single crime and more a warning that lingering tribal‑militia rivalries can quickly cripple regional supply chains, forcing the state to choose between heavy‑handed security sweeps and genuine reconciliation. If the government fails to deliver swift, credible justice,

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