कर्मचारियों में आश्चर्य की लहर दौड़ गई। इस घटना को लेकर टॉवर के प्रबंधन ने तुरंत जांच शुरू कर दी है, जबकि श्रम संघों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
एफिल टॉवर, जो विश्वभर में फ्रांस के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में जाना जाता है, पर अक्सर
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय delegations को स्वागत समारोह आयोजित करने के लिये उपयोग किया जाता है। इस बार भारत से आए हिन्दू प्रतिनिधिमंडल को टॉवर के शीर्ष स्तर पर एक विशेष कार्यक्रम में भाग लेने का निमंत्रण दिया गया था। कार्यक्रम के दौरान, टॉवर के कुछ कार्यस्थलों पर मौजूद महिलाओं से
कहा गया कि वे अपने स्थान छोड़ दें, ताकि पुरुष प्रतिनिधियों को वही जगह मिल सके। यह निर्देश टॉवर के सुरक्षा दल ने दिया, लेकिन इस पर कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में टॉवर के भीतर कार्यरत कर्मचारियों की विविधता शामिल है। टॉवर के आधी
से अधिक स्टाफ महिलाओं से बना है, जो विभिन्न विभागों में कार्य करती हैं। इस प्रकार की कार्यस्थल विभाजन की मांग पहले कभी नहीं देखी गई थी, जिससे कर्मचारियों में भ्रम और असहजता उत्पन्न हुई। स्थानीय श्रम संघ, विशेषकर महिला अधिकार समूह, ने तुरंत इस निर्णय को अनैतिक और
लैंगिक भेदभावपूर्ण कहा, और टॉवर के प्रबंधन को स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगते हुए सार्वजनिक विरोध का आह्वान किया।
जांच के शुरुआती चरण में टॉवर की सुरक्षा टीम ने कहा कि यह आदेश केवल एक अस्थायी व्यवस्था था, जिसका उद्देश्य कार्यक्रम के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करना था। उन्होंने यह भी
बताया कि महिला कर्मचारियों को बाद में वैकल्पिक कार्यस्थलों पर पुनर्स्थापित किया जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया की अस्पष्टता और समय सीमा के अभाव ने कर्मचारियों को अनिश्चित स्थिति में डाल दिया। टॉवर के प्रबंधन ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था को भविष्य में दोहराने से बचा जाएगा और
सभी कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा।
श्रम संघ की प्रतिनिधि डियान डावोइन ने रिपोर्टर को बताया कि “जब हमारे सदस्यों से कहा गया कि उन्हें अपने कार्यस्थल छोड़ना है, तो उन्होंने तुरंत विरोध किया। यह न केवल लैंगिक समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि कार्यस्थल में
सुरक्षा और सम्मान के मूल सिद्धांतों को भी उल्लंघन करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि कई महिलाओं ने इस आदेश के बाद अपने काम से जुड़ी दस्तावेज़ और व्यक्तिगत वस्तुएँ छोड़ दीं, जिससे उनके व्यक्तिगत अधिकारों पर प्रश्न उठे।
एफिल टॉवर की स्थानीय प्रबंधन समिति ने इस घटना
के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। समिति के प्रमुख ने कहा कि “हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करेंगे। टॉवर का उद्देश्य सभी के लिए सुरक्षित और समान माहौल प्रदान करना है, और हम इस दिशा में कदम उठाएंगे।” उन्होंने
यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की कोई भी लैंगिक भेदभावपूर्ण नीति टॉवर की मूल नीति के विरुद्ध है और तुरंत समाप्त की जाएगी।
भारत की दूतावास ने इस घटना पर अपनी चिंता व्यक्त की और टॉवर के प्रबंधन से स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगा। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा
कि “हिंदू प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य सांस्कृतिक आदान‑प्रदान को बढ़ावा देना है, न कि लैंगिक असमानता को बढ़ावा देना। हम फ्रांसीसी अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि वे इस मुद्दे को शीघ्र और न्यायसंगत रूप से सुलझाएँ।” इस पर टॉवर की ओर से उत्तर आया कि सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को
समान सम्मान दिया जाता है, और इस घटना को “अस्थायी असुविधा” के रूप में बताया गया।
फ्रांस के श्रम मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “हम इस प्रकार की किसी भी लैंगिक भेदभावपूर्ण प्रथा को कड़ी नज़र से देखेंगे। टॉवर जैसी सार्वजनिक संस्थाओं को
सभी कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान करना अनिवार्य है।” उन्होंने टॉवर के प्रबंधन को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी, और यदि आवश्यक हो तो कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
टॉवर के स्थानीय पर्यटकों ने भी इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ
Updated: September 7, 2026
An Indian Hindu delegation’s visit to the Eiffel Tower sparked a controversy after female staff were ordered to vacate work areas for male participants, prompting outrage from labor unions and gender‑rights groups. Tower management has launched an inquiry, vowed to scrap the discriminatory practice and faced pressure from French authorities and India’s embassy for a swift resolution.
The Eiffel Tower’s hasty gender‑segregation exposes how cultural diplomacy can clash with entrenched French labor norms, turning a symbolic gesture into a flashpoint for rights activism. It signals that any soft‑power outreach must now reckon with Europe’s zero‑tolerance stance on workplace discrimination, or
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