बिहार सरकार ने पिछले दो वर्षों में ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे की योजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए विशेष समिति गठित की। इस समिति ने भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और वित्तीय मॉडल पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर पाँच प्रमुख कॉरिडोर तय किए गए। बक्सर‑भागलपुर, आमस‑दरभंगा, पटना‑पूर्णिया, रक्सौल‑हल्दिया और गोरखपुर‑सिलीगुड़ी मार्गों को आर्थिक‑समीक्षा में उच्चतम प्राथमिकता मिली, क्योंकि ये मार्ग कृषि, उद्योग और पर्यटन क्षेत्रों को जोड़ते हैं।
पिछले वर्ष के अंत में केंद्र सरकार ने इन पाँच एक्सप्रेसवे के लिए कुल 12 बिलियन रुपये की प्रारंभिक सहायता मंजूर की, जिससे भूमि अधिग्रहण और प्रारम्भिक निर्माण कार्य तेज़ी से शुरू हो सके। पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) के तहत विभिन्न नदियों और जलस्रोतों के पार होने वाले हिस्सों को विशेष ध्यान में रखा गया, और आवश्यक प्रतिकूल प्रभाव शमन उपायों को अनिवार्य किया गया। इस प्रक्रिया में स्थानीय सामाजिक समूहों और ग्राम पंचायतों से नियमित परामर्श सत्र भी आयोजित किए गए।
बक्सर‑भागलपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में अब तक 45 किलोमीटर का खनन कार्य पूरा हो चुका है, और मुख्य पुलों की नींव रखी जा चुकी है। इस मार्ग के आधिकारिक उद्घाटन समारोह में राज्य के मुख्य मंत्री ने कहा कि यह धारा कृषि उत्पादन को बाजार तक तेज़ी से पहुँचाने में सहायक होगी। साथ ही, इस पुल पर स्थापित इलेक्ट्रिक लाइटिंग और सॉलर पैनल से ऊर्जा की बचत के साथ पर्यावरणीय मित्रता भी सुनिश्चित होगी।
आमस‑दरभंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण स्थल पर अब तक 30 किलोमीटर का बुनियादी काम समाप्त हो चुका है; यहाँ पर विशेष रूप से जल निकासी प्रणाली को आधुनिक मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इस मार्ग के माध्यम से दरभंगा के औद्योगिक पार्क को राष्ट्रीय बाजारों से सीधा संपर्क मिलेगा, जिससे निवेश आकर्षण बढ़ेगा। निर्माण टीम ने कहा कि अगले दो साल में इस खंड को पूरा कर ट्रैफिक परीक्षण शुरू किया जाएगा।
पटना‑पूर्णिया एक्सप्रेसवे का काम प्रारम्भिक चरण में है, जहाँ अभी तक भूमि अधिग्रहण का 55 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस मार्ग पर दो प्रमुख नहरों को पार करने वाले बड़े पुलों के डिजाइन में आधुनिक कॉंक्रिट तकनीक अपनाई गई है। स्थानीय निवासियों के साथ कई बार बैठकें आयोजित की गईं, जिसमें उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास की गारंटी दी गई।
रक्सौल‑हल्दिया एक्सप्रेसवे के निर्माण में विशेष ध्यान जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने पर दिया गया है; इस मार्ग पर सभी निर्माण सामग्री स्थानीय स्रोतों से प्राप्त की जा रही है, जिससे कार्बन फुटप्रिंट घटेगा। इस परियोजना की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र निरीक्षण बोर्ड गठित किया गया है, जो हर तिमाही में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
गोरखपुर‑सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के हिस्से के रूप में एक लंबी टनल का निर्माण भी योजना में शामिल है, जो पहाड़ी भूभाग को पार करेगा। इस टनल के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी सहायता ली जा रही है, जिससे सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जा सके। टनल के भीतर वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास प्रणाली को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
इन सभी परियोजनाओं पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया मिली है; मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज़ करने के साथ ही स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है। दूसरी ओर, राज्य के प्रमुख व्यापार संघों ने इन एक्सप्रेसवे को “बिहार की आर्थिक धड़कन” कहकर समर्थन व्यक्त किया। कई सामाजिक संगठनों ने पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर चेतावनी दी, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उचित पर्यावरणीय शमन उपायों से यह योजना सफल हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि इन एक्सप्रेसवे का पूर्णता बिहार को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में एक प्रमुख कड़ी बना देगी, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होगी। आर्थिक दृष्टिकोण से, यह परियोजना रोजगार सृजन, लॉजिस्टिक लागत में कमी और कृषि उत्पादों की निर्यात क्षमता को बढ़ाने में सहायक होगी। सामाजिक रूप से, तेज़ सड़कों के कारण ग्रामीण इलाकों में शहरी सुविधाओं की पहुँच आसान होगी, जिससे ग्रामीण‑शहरी अंतर
Updated: September 7, 2026
Five greenfield expressways spanning Bihar—from Buxar‑Bhagalpur to Gorakhpur‑Siliguri—are slated for 120 km/h operation by 2028, with central funding of ₹12 billion accelerating land acquisition and early works. Officials say the high‑speed corridors will cut travel times, boost logistics and link agricultural, industrial and tourism hubs, while incorporating local consultations, eco‑mitigation measures and modern construction techniques.
– The expressways will cut travel time for freight and passengers, improving logistics efficiency across key agricultural, industrial and tourism corridors.
– Faster connectivity is expected to lower transport costs and support economic activity in the linked regions.
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