होगा। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने इस कदम को “मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के साथ-साथ कर्मचारियों के जीवनमान को उन्नत करने” के उद्देश्य से पेश किया है, जिससे डॉक्टरों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन की संभावना है।
वर्तमान में बिहार में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों
में चिकित्सकीय स्टाफ के वेतन पर कई बार चर्चा और विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पिछले पाँच वर्षों में, मौजूदा मानदेय में केवल मामूली वृद्धि हुई थी, जबकि महंगाई और जीवनयापन की लागत में लगातार वृद्धि देखी गई है। कई चिकित्सकों ने कहा था कि वेतन में
पर्याप्त सुधार न होने से उच्च कुशल डॉक्टरों का पलायन बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
इन पृष्ठभूमि को देखते हुए, सरकार ने पहले भी विभिन्न चरणों में वेतन वृद्धि की घोषणा की थी, परन्तु
उन घोषणाओं का कार्यान्वयन अक्सर देर से या अधूरा रह गया। 2022 में एक अस्थायी वृद्धि की घोषणा हुई थी, लेकिन वह केवल कुछ विशेष वर्गों तक सीमित रही। इस बार के संशोधित मानदेय में सभी संविदा वर्गों को समान स्तर पर उठाने का प्रयास किया
गया है, जिससे पिछले असमानताओं को समाप्त करने की आशा जताई जा रही है।
नए आदेश के अनुसार, संविदा प्राध्यापक का मासिक वेतन 2.07 लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे वह पिछले वेतन से लगभग 35 प्रतिशत अधिक होगा। यह वृद्धि उन शिक्षकों के लिए है
जो विशेष रूप से स्नातकोत्तर तथा डॉ. डिग्री के पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं। इस वर्ग में अनुभव और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर वेतन में अंतर नहीं रखा गया, जिससे सभी प्राध्यापकों को समान स्तर का वेतन मिलेगा।
सह‑प्राध्यापक वर्ग को 1.55 लाख रुपये का मासिक मानदेय प्रदान
किया गया है। इस स्तर पर कार्यरत अधिकांश शिक्षकों को पहले 1.2 लाख रुपये मिलते थे, इसलिए इस नई दर से उनका आय स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा। सहायक प्राध्यापक, जो आमतौर पर लेबोरेटरी और प्रैक्टिकल सत्रों की देखरेख करते हैं, को 1.35 लाख रुपये का वेतन मिलेगा,
जो पिछले 1.0 लाख रुपये से लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि है।
सिनियर रेजिडेंट का मानदेय 80 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.05 लाख रुपये किया गया है। यह वर्ग उन डॉक्टरों को सम्मिलित करता है जो पोस्ट‑ग्रेजुएट प्रशिक्षण के अंतिम चरण में होते हैं और अक्सर बंधक कार्यभार संभालते
हैं। जूनियर रेजिडेंट, जो प्रशिक्षण के शुरुआती चरण में होते हैं, उनका वेतन 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 92 हजार रुपये किया गया है। यह वृद्धि उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाते हुए प्रशिक्षण के दौरान उत्पन्न अतिरिक्त खर्चों को कम करने में मदद करेगी।
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वेतन आदेश पर विभिन्न पेशेवर संघों ने मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बायो‑मैडिकल इंजीनियरिंग एसोसिएशन ने कहा कि वेतन वृद्धि सराहनीय है, परन्तु उन्होंने यह भी नोट किया कि मानदेय में वृद्धि के साथ ही कार्यभार में वृद्धि नहीं होनी चाहिए। भारतीय डॉक्टर एसोसिएशन (आईडीडी) ने
इस कदम को “कर्मचारी संतुष्टि एवं रिटेंशन की दिशा में सकारात्मक कदम” कहा, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में और अधिक आर्थिक प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी।
वहीं, कुछ प्राध्यापक संघों ने कहा कि नई मानदेय दरें अभी भी राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं, और
वेतन में इस स्तर की वृद्धि के बावजूद, महँगी जीवनयापन लागत को देखते हुए अभी भी कई डॉक्टर अतिरिक्त आय के स्रोतों पर निर्भर हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वेतन वृद्धि के साथ ही आवासीय सुविधाएँ, मेडिकल बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा उपायों को
भी सुदृढ़ किया जाए।
राजनीतिक दृष्टिकोण से इस निर्णय को बिहार के स्वास्थ्य नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। राज्य सरकार ने इसे “स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश” के रूप में पेश किया है, जिससे आगामी चुनावों में यह मुद्दा लाभदायक हो
Updated: September 8, 2026
The revised salary structure standardises pay for contract medical faculty and residents, addressing longstanding remuneration gaps.
Higher wages aim to improve staff retention and support the quality of medical education and healthcare delivery in the state.
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