पिछले कुछ दशकों में बिहार को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक समारोहों के कारण देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में स्थान मिला है। विशेषकर छठ और दिवाली का मिलन, जो सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, इस क्षेत्र में बड़ी भीड़ को आकर्षित करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में इन त्योहारी सीजन में प्रवासियों की संख्या में 30 % से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस प्रवृत्ति के साथ ही, रेलवे और हवाई अड्डा संचालन में भी निरंतर सुधार की आवश्यकता महसूस की गई है।
परंतु, इन परिवर्तनों के साथ ही टिकट उपलब्धता की समस्या भी बढ़ी है। भारतीय रेलवे ने कहा है कि छठ‑दिवाली सीजन की मांग को पूरा करने के लिये अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था कर रहा है, परन्तु मौजूदा बुकिंग सिस्टम में तकनीकी बाधाएं और बुकिंग विंडो की सीमित अवधि ने यात्रियों को परेशानी में डाल दिया है। इसी तरह, कई एयरलाइनों ने बताया कि इस अवधि में मांग में अचानक वृद्धि के कारण सीटों की कमी हुई, जिससे किराया में दो गुना तक की बढ़ोतरी हुई।
दिल्ली‑पटना, मुंबई‑पटना, कोलकाता‑पटना जैसी प्रमुख मार्गों पर आरक्षित सीटें पहले ही समाप्त हो चुकी हैं। विशेष रूप से अमृत भारत एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस में बुकिंग समाप्त हो गई है। इन ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट की स्थिति भी गंभीर है; कई यात्रियों ने बताया कि वेटिंग लिस्ट में भी अब कोई सीट उपलब्ध नहीं है। इस कारण, यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग और परिवहन साधनों की तलाश करनी पड़ रही है।
इसी बीच, एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइनों ने दिल्ली‑पटना और कोलकाता‑पटना मार्गों पर किराया दो गुना तक बढ़ा दिया है। टिकट की कीमतें पहले की तुलना में 3,500 रुपये से 7,000 रुपये तक पहुंच गई हैं। यह वृद्धि कई यात्रियों के लिये आर्थिक बोझ बन गई है, क्योंकि कई लोग इस खर्च को वहन नहीं कर पा रहे हैं। एयरलाइन कंपनियों ने बताया कि यह बढ़ोतरी सीमित सीटों की उपलब्धता, बढ़ते ईंधन मूल्य और उच्च मांग के कारण हुई है।
रेलवे प्रशासन ने बताया कि इस सीजन के लिए अतिरिक्त थाली और एसी कोच जोड़ने की योजना है, परन्तु इन अतिरिक्त सुविधाओं के परिचालन में समय लग सकता है। साथ ही, कुछ विशेष ट्रेनें जैसे लखनऊ‑पटना और जयपुर‑पटना के लिए विशेष प्रवासियों को प्राथमिकता देने की घोषणा की गई है। लेकिन इन उपायों के बावजूद, बुकिंग की तेज़ गति के कारण कई यात्रियों को अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ रही है।
पर्यटन विभाग के प्रमुख ने कहा कि प्रवासियों की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र, बिहार सरकार ने विशेष सुरक्षा उपायों और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त कर्मियों की व्यवस्था की है। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों को आधिकारिक बुकिंग पोर्टलों का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है, ताकि काले बाजार में अतिरिक्त शुल्क का सामना न करना पड़े।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि वेटिंग लिस्ट के लिये ऑनलाइन रिफंड प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है, और बुकिंग कैंसिलेशन के बाद पुनः उपलब्ध सीटों को तुरंत बुक करने की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह के तीव्र मांग को संभालने के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रेडिक्टिव मॉडल लागू किया जाएगा।
हवाई यात्रा की लागत बढ़ने पर एयरलाइन संघ ने कहा कि वे इस अवधि में किराया स्थिर रखने के लिये वैकल्पिक योजनाएँ तैयार कर रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि कुछ घरेलू हवाईअड्डों पर अतिरिक्त फ्लाइट्स जोड़ने की संभावना है, जिससे यात्रियों को विकल्प मिल सके। साथ ही, उन्होंने यात्रियों को अग्रिम बुकिंग करने और लवचिक टिकट विकल्प चुनने की सलाह दी।
राजनीतिक दलों ने इस स्थिति पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ दी हैं। राज्य के मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि सरकार को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिये टिकट वितरण में पारदर्शिता लानी चाहिए। उन्होंने रेल एवं हवाई सेवाओं में सुधार की मांग की। वहीं, ruling party के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार ने पहले ही अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था की है और एयरलाइनों के साथ समन्वय कर किराया नियंत्रण के उपाय कर रही है।
आर्थिक विश्लेषकों ने बताया कि इस तीव्र बुक
Updated: September 8, 2026
Ticket bookings for trains and flights to Bihar have surged ahead of the Diwali‑Chhath festivities, leaving major routes fully booked and waiting lists exhausted, while airfares have nearly doubled, straining travelers’ wallets. Authorities promise extra trains, additional flights and faster refunds, but limited seats and soaring prices continue to spark commuter anxiety and political criticism.
Insight: The ticket scramble around Diwali‑Chhath reveals how cultural pilgrimages are turning into a price‑sensitive mobility crisis, exposing the gap between rising demand and an under‑scaled transport infrastructure.
Unless railways and airlines adopt dynamic capacity planning—beyond ad‑hoc extra coaches and flights—the surge
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