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1 अक्टूबर से बिहार में 6 महीने से राशन न लेने वाले राशन कार्ड अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जाएंगे

बिहार सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 से उन राशन कार्डधारकों के कार्ड अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का निर्णय ले लिया है, जो पिछले छः महीनों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत किसी भी रेशन की प्राप्ति नहीं कर पाए हैं।
यह कदम केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (CFPD) के साथ हुई दिल्ली की बैठक के बाद अपनाया गया, जिसका उद्देश्य ‘साइलेंट कार्डधारकों’ की पहचान कर अनियमितताओं को रोकना है। विभाग ने कहा है कि इस नियम के तहत कार्डधारकों को 21 सितंबर तक अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आख़िरी अवसर मिलेगा, इसके बाद ब्लॉकिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी।पिछले दो वर्षों में बिहार में PDS के माध्यम से वितरित हो रहे अनाज की मात्रा में असमानता और धोखाधड़ी की घटनाएँ बढ़ी हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कई कार्डधारकों द्वारा अपने कार्ड को दूसरों को सौंपना या फर्जी दस्तावेज़ प्रस्तुत करना आम हो गया था। इस संदर्भ में राज्य ने 2024 में एक विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसमें लगभग 12 प्रतिशत कार्डधारकों ने लगातार छह महीने तक कोई रेशन नहीं लिया था, जिन्हें ‘साइलेंट कार्डधारक’ कहा गया।

सर्वेक्षण के परिणामस्वरूप राज्य ने इस समस्या को हल करने के लिए कई उपायों की रूपरेखा तैयार की। पहले चरण में, सभी ब्लॉक होने वाले कार्डधारकों को स्थानीय पंजीकरण कार्यालयों में जाकर अपने कार्ड की वैधता की पुष्टि करनी होगी। इसके अलावा, उन कार्डधारकों को विशेष सहायता प्रदान करने के लिए सामाजिक कल्याण विभाग ने एक शॉर्टकट प्रक्रिया बनायी है, जिससे वे अपने दस्तावेज़ों को ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के तहत, यदि कोई कार्डधारक वैध कारण से रेशन नहीं ले सका—जैसे बीमारी, स्थानांतरण या प्राकृतिक आपदा—तो उसे पुनः सक्रिय किया जा सकेगा।

1 अक्टूबर से लागू होने वाली नई नीति के तहत, प्रत्येक ब्लॉक किए जाने वाले कार्डधारक को उनके नजदीकी PDS दुकान से एक सूचना पत्र प्राप्त होगा। इस पत्र में ब्लॉकिंग की तिथि, कारण और पुनः सक्रिय करने की प्रक्रिया का विस्तृत विवरण होगा। सूचना में यह भी कहा गया है कि यदि कार्डधारक निर्धारित समय में आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं करता, तो कार्ड को 30 दिनों की अवधि के लिए अस्थायी रूप से निलंबित किया जाएगा। यह कदम अनावश्यक रेशन चोरी को रोकने और सच्चे लाभार्थियों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग ने बताया कि ब्लॉकिंग प्रक्रिया के बाद, सभी प्रभावित कार्डधारकों को एक हेल्पलाइन नंबर प्रदान किया गया है, जहाँ वे अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। इस हेल्पलाइन पर प्रशिक्षित कर्मी कार्डधारकों की पूछताछ का उत्तर देंगे और आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची प्रदान करेंगे। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर एक विशेष टीम गठित की गई है, जो कार्डधारकों के घर जाकर व्यक्तिगत रूप से सहायता प्रदान करेगी, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

पिछले कुछ महीनों में कई स्थानीय एनजीओ और सामाजिक कार्यकर्ता इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि यह नीतिगत बदलाव पंजीकृत लाभार्थियों को सच्ची मदद पहुँचाने में सहायक होगा। कुछ सामाजिक संगठनों ने कहा है कि ब्लॉकिंग के बाद, उन्हें ग्रामीण इलाकों में अधिक सक्रिय होना पड़ेगा, ताकि वे कार्डधारकों को पुनः सक्रिय करने की प्रक्रिया में सहयोग कर सकें। उन्होंने यह भी आशा जताई कि इस कदम से भविष्य में PDS प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा और वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

ब्लॉकिंग नीति पर विभिन्न राजनैतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रही हैं। बिहार के प्रमुख विपक्षी दल ने इसे ‘भ्रष्टाचार विरोधी कदम’ कहा, जबकि कुछ राजनैतिक गठबंधन ने इस नीति को ‘अधिकारियों की अति‑सुरक्षा’ का आरोप लगाया। सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि यह कदम केवल उन लोगों को लक्षित करता है जो अनियमित रूप से सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं, और इस प्रक्रिया में सभी कार्डधारकों को न्यायसंगत अवसर दिया जाएगा।

कृषि मंत्री ने इस निर्णय को “समान वितरण” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, यह कहते हुए कि अब प्रत्येक कार्डधारक को उसके अधिकार के अनुसार रेशन मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ब्लॉकिंग के बाद, राज्य सरकार उन क्षेत्रों में अतिरिक्त रेशन स्टॉक उपलब्ध कराएगी, जहाँ कार्डधारकों की संख्या अधिक है, ताकि किसी भी आपूर्ति की कमी न हो। इसी दौरान, राज्य के वित्त विभाग ने बताया कि इस नीति के लागू होने से अनुमानित रूप से 15 करोड़ रुपए की बचत होगी, जो अन्य सामाजिक योजनाओं में पुनः निवेश की जाएगी।

आर्थिक विश्लेषकों ने इस नीति के संभावित प्रभावों पर चर्चा की। कई विश्लेषकों का मानना है कि ब्लॉकिंग से न केवल भ्रष्टाचार में कमी आएगी, बल्कि राज्य को वित्तीय स्थिरता भी प्राप्त होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस नीति को प्रभावी रूप से लागू किया गया, तो अगले दो वर्षों में PDS की कुल लागत में 8-10 प्रतिशत की कमी देखी जा सकती है।

Updated: September 8, 2026


Bihar will temporarily block ration cards that haven’t collected any PDS grain for six straight months, giving owners a deadline of September 21 to verify their eligibility before the October 1 shutdown. The move, aimed at curbing fraud and saving an estimated ₹15 crore, includes an online appeal process, helpline support and district‑level assistance to reinstate genuine beneficiaries.

Blocking “silent” ration cards could turn Bihar’s leaky PDS into a self‑cleansing system, forcing chronic non‑users to either prove genuine need or lose benefits altogether.
If the enforcement holds, the resulting savings may become a fiscal lever, allowing the state to redirect funds into more targeted welfare schemes

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