लगाना और भविष्य में अनधिकृत संचालन को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था स्थापित करना शामिल है। यह कदम दिल्ली में हाल ही में एक हॉस्टल इमारत के ढहने से उत्पन्न सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं के प्रत्यक्ष उत्तर के रूप में लिया गया है।
बिहार में पिछले पाँच वर्षों में शैक्षणिक संस्थानों
के साथ-साथ कामकाजी वर्ग के लिए पीजी‑लॉज और हॉस्टलों की मांग में तीव्र वृद्धि देखी गई है। इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के प्रयास में कई निजी निवेशकों ने तेज़ी से नए ढांचे स्थापित किए, परन्तु कई मामलों में आवश्यक रजिस्टरेशन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। राज्य आवास
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 400 ऐसे संस्थानों को आधिकारिक रजिस्टर में नहीं दर्ज किया गया है, जिनमें कई पुराने इमारतों में संरचनात्मक सुरक्षा की कमी भी पाई गई है।
इन अनरजिस्टर्ड संस्थानों की स्थिति को लेकर पिछले वर्ष ही कई शिकायतें न्यायालय तक पहुंची थीं। पटना
हाई कोर्ट ने कई बार सरकार को निर्देशित किया था कि वह सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक समुचित निगरानी तंत्र स्थापित करे। कोर्ट के आदेशों के बावजूद, कई जिलों में यह समस्या बनी हुई थी, जिससे विद्यार्थियों और कामगारों दोनों को जोखिम का सामना करना पड़ रहा था। इस
संदर्भ में, सरकार ने नई मोनिटरिंग टीम का गठन किया और यह टीम विभिन्न जिलों में जाकर स्थलों की जाँच करेगी।
राज्य के उपमुख्य सचिव केएस अनुपम ने सभी जिलाधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र जारी किया, जिसमें अनरजिस्टर्ड पीजी‑लॉज, लॉज और हॉस्टलों की पूरी सूची तैयार करने, उनके सुरक्षा मानकों
का मूल्यांकन करने और उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। पत्र में यह भी कहा गया कि यदि कोई संस्थान नियमानुसार सुधार नहीं करता, तो उसे तुरंत बंद कर दिया जाएगा। साथ ही, भविष्य में ऐसे संस्थानों को पंजीकरण के बिना संचालित करने पर
कड़ी सजा का प्रावधान भी रखा गया है।
जांच टीम ने पहले ही गोरखपुर, भागलपुर, और दरभंगा जिलों में कई अनरजिस्टर्ड संस्थानों की जाँच शुरू कर दी है। टीम ने स्थानीय अधिकारियों, छात्रों और कर्मचारियों के साथ विस्तृत साक्षात्कार किए, और कई मामलों में संरचनात्मक दोष, अग्नि सुरक्षा उपायों की
कमी और अनुचित शहरी नियोजन की रिपोर्ट की। कुछ संस्थानों में वैध लाइसेंस नहीं होने के साथ ही, किराए की अत्यधिक बढ़ोतरी और असमान सेवा प्रदान करने की शिकायतें भी सामने आईं।
जांच के दौरान मिली रिपोर्टों ने यह भी उजागर किया कि कई अनरजिस्टर्ड हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं जैसे
जल आपूर्ति, स्वच्छता और विद्युत व्यवस्था की कमी है, जिससे रहने वालों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर असुरक्षित निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया था, जिससे इमारतों की संरचनात्मक स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगा है। इन सभी पहलुओं को देखते हुए, सरकार ने यह स्पष्ट किया
कि भविष्य में ऐसी लापरवाही को दोहराया नहीं जाएगा।
इन कदमों पर बिहार में शिक्षा और आवास क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कई छात्र संघों ने कहा कि यह कदम विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और अनियमित संस्थानों को समाप्त करने की दिशा में सकारात्मक
कदम है। वहीं कुछ निजी हॉस्टल मालिकों ने कहा कि अचानक लागू हुए नियमों से उनके व्यवसाय पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा और उन्हें उचित समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई संस्थानों ने पहले ही आवश्यक सुधार कर रखे थे, परन्तु उन्हें आधिकारिक मान्यता नहीं मिली।
राज्य सरकार की इस पहल पर विपक्षी दल के कुछ वरिष्ठ नेता भी टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल कोर्ट के आदेश के बाद ही आई है, और इसे सरकार की लापरवाही का परिणाम माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि भविष्य में ऐसी समस्याओं
को रोकने के लिए एक स्थायी नियामक ढांचा स्थापित किया जाए, जिससे अनधिकृत संस्थानों को शुरू से ही रोकना संभव हो।
आर्थिक दृष्टिकोण से यह कदम बिहार के आवास बाजार में एक नई दिशा तय करेगा। यदि अनरज
Updated: September 8, 2026
Summary: Bihar’s government has launched a statewide probe to shut down unregistered PG‑lodges and hostels, following a Patna High Court directive and recent safety concerns after a Delhi hostel collapse. Officials will audit roughly 400 illicit premises, enforce penalties, and set up a monitoring system, sparking mixed reactions from students, owners and opposition parties.
Bihar’s crackdown on unregistered PG‑lodges is less about revenue and more a political litmus test: the state must prove it can pre‑empt tragedies that national headlines demand, or be branded a negligent regulator.
If the new monitoring regime sticks, it could reshape the informal housing market, forcing private investors to
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