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महाराष्ट्र: छह विभागों में भर्ती प्रणाली की पुनर्गठना के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के छह विभागों में भर्ती परीक्षा प्रणाली को पुनः संरचना देने के उद्देश्य से एक उच्च‑स्तरीय कार्यसमिति का गठन किया है। यह समिति मौजूदा प्रक्रिया का विस्तृत परीक्षण करेगी, छात्रों व परीक्षार्थियों की राय लेगी और संभावित कमियों की पहचान कर सुधारात्मक कदमों का

प्रस्ताव रखेगी। इस पहल को सरकार ने शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में पारदर्शिता और न्यायसंगतता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता के रूप में प्रस्तुत किया है, जबकि कई पक्षों ने इसे लंबी अवधि के सुधारों की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना है।

पिछले कुछ वर्षों में

महाराष्ट्र में विभिन्न सरकारी पदों की भर्ती परीक्षा में धारा‑भंग, प्रश्न‑पत्र में त्रुटि और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कई आरोप सामने आए हैं। 2021 में महाराष्ट्र सार्वजनिक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित परीक्षा में प्रश्न‑पत्र में तकनीकी त्रुटियों के कारण पुनः परीक्षा आयोजित करनी पड़ी,

जिससे लाखों अभ्यर्थियों को अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ा। इसी तरह 2022 में पुलिस भर्ती परीक्षा में चयन मानदंडों में अस्पष्टता के कारण कई सामाजिक समूहों ने न्यायालय में याचिका दायर की। इन घटनाओं ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से उजागर किया।

इस

पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने कार्यसमिति के सदस्यों में प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, रोजगार विशेषज्ञों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया है। समिति के प्रमुख सदस्य के रूप में अनुभवी प्रशासक और पूर्व MPSC अधिकारी को नियुक्त किया गया है, जबकि युवा वर्ग

की आवाज़ सुनने के लिए विभिन्न कॉलेजों और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी संस्थानों से प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यसमिति को तीन महीने की समयसीमा दी गई है, जिसके भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को प्रस्तुत करनी है।

कार्यसमिति ने पहले चरण में मौजूदा भर्ती परीक्षा

मॉडल की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। इसमें प्रश्न‑पत्र निर्माण, उत्तर मूल्यांकन, परिणाम प्रकाशन तथा अभ्यर्थियों के शिकायत निपटान तंत्र की जांच शामिल है। समिति ने यह भी तय किया है कि सभी प्रमुख विभागों—जैसे पुलिस, वन सेवा, आयुक्तालय एवं विभिन्न प्रशासनिक पदों—की भर्ती प्रक्रियाओं को समान

मानकों पर लाया जाए। इस चरण में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रियाओं और पेपर‑लेस मूल्यांकन प्रणाली को भी प्रमुखता दी जा रही है।

दूसरे चरण में समिति ने छात्रों और अभ्यर्थियों से प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित किया है। ऑनलाइन सर्वेक्षण, फोकस‑ग्रुप चर्चा और व्यक्तिगत साक्षात्कार के

माध्यम से विभिन्न वर्गों की समस्याओं को समझा जा रहा है। इस प्रक्रिया में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों, विशेष रूप से पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की आवाज़ को विशेष महत्व दिया गया है। समिति ने कहा है कि इन प्रतिपुष्टियों के बिना कोई ठोस

सुधार योजना बनाना असंभव होगा, इसलिए सभी हितधारकों की भागीदारी अनिवार्य है।

तीसरे चरण में समिति ने अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सफल भर्ती मॉडल की तुलना करने का काम शुरू किया है। इस संदर्भ में उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के सिविल सर्विस परीक्षा, ऑस्ट्रेलिया की सार्वजनिक सेवा

चयन प्रक्रिया और भारत के अन्य राज्यों की नवाचारी पहल का अध्ययन किया है। इन मॉडलों से प्राप्त सीख को महाराष्ट्र की विशेष सामाजिक‑आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही, तकनीकी सहयोग के लिए कुछ प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी प्रस्तावित किया

गया है।

सप्ताह के मध्य में कार्यसमिति ने प्रारंभिक रिपोर्ट का मसौदा तैयार किया, जिसमें प्रमुख मुद्दों की सूची और संभावित सुधारात्मक उपायों का विवरण दिया गया है। इस मसौदे में परीक्षा प्रश्न‑पत्र की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की स्थापना, ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली

के लिए ब्लॉकचेन‑आधारित सुरक्षा तंत्र, तथा परिणाम प्रकाशन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सार्वजनिक डैशबोर्ड शामिल है। इन प्रस्तावों को आगे विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

इन विकासों पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने‑अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं। राज्य सरकार की गठबंधन पार्टी ने

इस पहल को सामाजिक न्याय और युवाओं के रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में सराहा, जबकि विपक्षी दल ने कहा कि कार्यसमिति का गठन केवल शब्दों तक सीमित रह सकता है और वास्तविक बदलाव के लिए स्पष्ट समयसीमा और कार्यान्वयन की आवश्यकता है। कुछ विपक्षी नेताओं


महाराष्ट्र सरकार ने भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो प्राथमिक प्रतिवेदन में तकनीकी सुधारों के प्रस्ताव लेकर आई है। यह प्रक्रिया पूर्व वर्षों की मनमानियों को दूर करते हुए सैद्धांतिक मॉडलों और छात्र प्रतिपुष्टियों पर आधारित व्यापक पुनर्गठन की नींव रचती है।

TheMaharashtra government constituted a high-level committee to restructure recruitment exams across six departments.
This addresses past allegations of transparency issues and aims to standardize selection processes for public service roles.

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