कहा कि जनता के अधिकारों से जुड़े राजस्व कार्यों में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और फर्जी दस्तावेज़ों के निर्माण में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश उन क्षेत्रों में कार्यवाही को गति देने की आशा रखता है जहाँ कई मामलों का बकाया कई वर्षों से
बना हुआ था।
बिहार में भूमि‑सेवा का इतिहास दशकों से जटिल विवादों और देरी से जुड़ा रहा है, विशेषकर बेगूसराय, मधुबनी और जमुई अंचलों में। पिछले पाँच वर्षों में इन क्षेत्रों में भूमि‑जमाबंदी से संबंधित मामलों की संख्या में 40 % की वृद्धि देखी गई थी, जबकि दाखिल‑खारिज के मामलों की लंबी सूचियाँ सरकारी दफ्तरों
में धूल जमा रही थीं। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए विभाग ने इस वर्ष के प्रारंभ में एक विशेष कार्यदल बनाया था, परन्तु प्रारम्भिक प्रयासों के बावजूद कई मामलों में आगे की प्रगति नहीं हो पाई थी। इन समस्याओं का मूल कारण दस्तावेज़ीकरण में त्रुटियाँ, अभिलेखों का अपूर्ण होना और स्थानीय स्तर पर
अनियमितताओं को लेकर अक्सर देरी होती थी।
बैठक के दौरान अंचल अधिकारियों ने प्रस्तुत किए गये आँकड़ों को विस्तार से बताया। बेगूसराय में केवल पाँच महीने में 2 500 से अधिक जमाबंदी के आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 1 800 को तुरंत मंजूरी दी गई और शेष 700 को फाइलों की जाँच‑परख के बाद ही
अंतिम रूप दिया गया। मधुबनी में सरकारी जमीन की जाँच के लिये विशेष टीम बनाई गई थी, जिसने पहले ही 350 एकड़ जमीन पर अनधिकृत कब्ज़ा दर्ज किया और उन्हें रद्द कर दिया। जमुई में नामांतरण के मामलों में पिछले साल की तुलना में 30 % की गिरावट आई, जो विभाग की तेज़ी से
कार्यवाही का संकेत माना गया। इन आँकड़ों के साथ सचिव ने स्पष्ट किया कि सभी अंचलों को समान मानक पर काम करना होगा।
जमाबंदी सुधार की प्रक्रिया में कई नई तकनीकी उपायों को अपनाया गया, जैसे कि डिजिटल रेज़िस्ट्री और GPS‑आधारित मानचित्रण। इन उपकरणों की मदद से भूमि के वास्तविक आकार और सीमाओं को
सटीक रूप से दर्ज किया गया, जिससे फर्जी दस्तावेज़ों की सम्भावना कम हुई। साथ ही, दस्तावेज़ों की सत्यापन प्रक्रिया में दो‑स्तरीय जांच लागू की गई, जिसमें स्थानीय तहसील अधिकारी और राज्य‑स्तर पर विशेष निरीक्षक दोनों की मंजूरी अनिवार्य है। इस कदम से दस्तावेज़ों में संशोधन या गड़बड़ी का जोखिम न्यूनतम रहने की उम्मीद
की जा रही है।
फर्जी दस्तावेज़ों के मामलों में विशेष रूप से कड़ी कार्रवाई का इशारा दिया गया। सचिव ने कहा कि जिन कर्मचारियों या बाहरी एजेंसियों को इन दस्तावेज़ों की आपूर्ति में भागीदारी सिद्ध होगी, उनके खिलाफ तुरंत निलंबन, सेवा‑मुक्ति और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दिशा में विभाग ने पहले से ही
एक आंतरिक जाँच इकाई गठित की हुई है, जिसने अब तक 12 ऐसे मामलों की पहचान की है और सम्बंधित व्यक्तियों को सस्पेंड कर दिया है। यह कदम स्थानीय जनता को आश्वस्त करने के साथ‑साथ विभाग की विश्वसनीयता को भी पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।
बैठक में उपस्थित अंचल सचिवों ने भी अपने‑अपने क्षेत्रों
में हुई प्रगति और चुनौतियों को साझा किया। बेगूसराय के आयुक्त ने बताया कि जमीन‑जाँच के दौरान कई अनधिकृत संरचनाएँ ध्वस्त कर दी गईं और जमीन को पुनः सार्वजनिक उपयोग के लिये उपलब्ध कराया गया। मधुबनी के अंचल अधिकारी ने कहा कि सरकारी जमीन की जाँच में स्थानीय किसानों की सक्रिय भागीदारी हुई,
जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी। जमुई के अंचल अधिकारी ने उल्लेख किया कि नामांतरण के लिये ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को लागू किया गया, जिससे लोगों को व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में जाना नहीं पड़ रहा। इन सबको मिलाकर विभाग ने एक समग्र सुधार योजना तैयार की है।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इस निर्णय
की सराहना की, परन्तु कुछ प्रश्न उठाए। स्थानीय किसान संघ के प्रमुख ने कहा कि फर्जी दस्तावेज़ों के मामलों में दण्ड के साथ-साथ पुनरावृत्ति को रोकने हेतु जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में रहने वाले व्यापारियों ने उल्लेख किया कि तेज़ी से जमाबंदी प्रक्रिया से उनका निवेश सुरक्षित रहेगा और
विकास के नए अवसर पैदा होंगे। इन विविध प्रतिक्रियाओं ने यह स्पष्ट किया कि नीति‑निर्माण में सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों ने इस कदम को बिहार सरकार की प्रशासनिक सुधार दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि भूमि‑सेवा में दक्षता बढ़ाने से
Updated: September 10, 2026
Bihar’s crackdown on phantom land records isn’t just bureaucratic housekeeping—it signals a political gamble that faster, tech‑driven titles could convert long‑standing agrarian grievances into new voter capital.
If the digital registry and punitive bans hold, the state may finally turn land‑service bottlenecks from
Be First to Comment