की खाड़ी में बन रहा कम दबाव का क्षेत्र है, जो मध्य भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है। विभाग ने कहा है कि इस अवधि में हल्की से मध्यम और कुछ क्षेत्रों में तेज़ बारिश की संभावना है, जिससे कृषि, जलसंधारण और लोकल यात्रा पर असर पड़
सकता है।
पिछले दो हफ्तों में मध्य प्रदेश ने अनियमित बवंडर और तेज़ हवाओं के साथ कई बार वर्षा का सामना किया है। मई‑जून के बीच के मानसूनी वर्षा के बाद, इस साल की बरसात का पैटर्न अपेक्षाकृत असामान्य दिख रहा है। विशेषकर पश्चिमी और मध्य भागों में
पिछले कुछ दिनों में तापमान में गिरावट और नमी में वृद्धि दर्ज की गई थी, जिससे जलवायु मॉडल में अनिश्चितता बढ़ी। इन परिस्थितियों को देखते हुए, IMD ने पहले ही मौसमी बुलेटिन जारी कर विस्तृत जानकारी प्रदान की थी, जिसमें प्रदेश के 31 जिलों को विभिन्न स्तरों की बरसात
के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव क्षेत्र, जिसे अक्सर ‘लो प्रेशर एरिया’ कहा जाता है, एशिया के बड़े हिस्से में मौसमी परिवर्तन लाता है। यह प्रणाली, जब पश्चिमी भारत की ओर बढ़ती है, तो वायुमंडलीय दबाव में असंतुलन उत्पन्न
करती है, जिससे गरज-चमक के साथ तेज़ बारिश के संकेत मिलते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वर्ष इस क्षेत्र का विस्तार और गति पिछले वर्षों से अधिक है, जिससे मध्य भारत में लगातार वर्षा की संभावना बढ़ रही है। इस परिदृश्य में, मौसमी पूर्वानुमान अधिक सटीकता से
तैयार करने के लिए नवीनतम उपग्रह डेटा और रडार इमेजरी का उपयोग किया जा रहा है।
10 सितंबर की सुबह से ही, इंदौर, उज्जैन और भोपाल के आसपास हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। दोपहर तक गरज के साथ तेज़ बारिश ने कई क्षेत्रों में जल स्तर को बढ़ा दिया।
विशेषकर बघा, रेतुंगपुर और राजनांदगांव में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी। इन जिलों में स्थानीय प्रशासन ने जल निकासी कार्य तेज़ कर दिया और सड़क बंदी तथा बाढ़ जोखिम को कम करने के उपाय अपनाए। साथ ही, कृषि विभाग
ने किसानों को फसल की सुरक्षा के लिए तुरंत उपाय करने की सलाह दी।
11 सितंबर को भी समान मौसमी स्थिति जारी रही। इस दिन बायनर, बालाघाट और नंदगांव में गरज के साथ भारी बारिश हुई, जिससे कुछ क्षेत्रों में अस्थायी जलस्तर वृद्धि हुई। कई स्थानीय सड़कों पर जलभराव
के कारण आवागमन में बाधा उत्पन्न हुई, और कुछ स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर देना पड़ा। इस बीच, जल प्रबंधन विभाग ने जलाशयों में जल स्तर की निगरानी तेज़ कर दी और बाढ़ के संभावित जोखिम को देखते हुए अल्पकालिक राहत उपाय लागू किए।
12 सितंबर को
भी मौसम विभाग ने चेतावनी जारी रखी कि तेज़ हवाओं और गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। इस दिन भी बाग़ा, कोटा और देवरिया क्षेत्रों में बारिश के कारण कृषि कार्य में बाधा आई। कई किसानों ने फसल की रक्षा के लिए बाढ़-रोधी उपाय अपनाए, जबकि
कुछ क्षेत्रों में जल संचयन के लिए नई तालाबों का निर्माण किया गया। स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित कर नागरिकों को तुरंत सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।
इन घटनाओं पर राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम विज्ञान विभाग के
साथ मिलकर बारिश के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जलसंकट की स्थिति में जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन राहत कार्य को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, उन्होंने स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को आदेश दिया कि वे जलस्तर की
नियमित जांच करें और किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत उपाय करें।
केंद्र सरकार ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। मौसम विज्ञान विभाग के मुख्य मौसम विज्ञानी ने कहा कि बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव क्षेत्र एक सामान्य मौसमी प्रवृ
Updated: September 9, 2026
The IMD’s warning highlights a low‑pressure system over the Bay of Bengal that is expected to sustain thunderstorm activity and moderate to heavy rain across central Madhya Pradesh on Sept 10‑12.
Continued precipitation may affect agricultural operations, water‑resource management and local travel, prompting authorities to monitor flood risk and issue precautionary measures.
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