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IMD ने 9-15 सितंबर तक भारी बारिश, तूफान और विजली की चेतावनी जारी की; कई राज्यों में सतर्कता

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 9‑15 सितंबर के लिये एक विस्तृत साप्ताहिक मौसम अलर्ट जारी किया है, जिसमें पूर्वी, मध्य, उत्तर‑पूर्व, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के कई हिस्सों में लगातार बरसात, आंधी‑तूफ़ान और विजली की संभावना बताई गई है। विभाग के अनुसार इस सप्ताह के अंत तक ओडिशा, छत्तीसगढ़, दिल्ली,

हरियाणा और पंजाब सहित कई प्रमुख राज्य तेज़ वर्षा से ग्रस्त हो सकते हैं, जिससे जल‑संकट, कृषि उत्पादन और जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका है। इस चेतावनी को ध्यान में रखते हुए विभिन्न राज्य प्रशासन ने पूर्व सतर्कता उपायों की घोषणा की है, जबकि नागरिकों को सावधानी बरतने का

निर्देश दिया गया है।

पिछले दो दशकों में भारतीय उपमहाद्वीप में मौसमी बदलावों ने कई बार तीव्र वर्षा की घटनाओं को जन्म दिया है, विशेषकर मानसून के देर‑शुरू होने या देर‑समाप्त होने के समय। 2020‑21 के मानसून में ओडिशा और छत्तीसगढ़ में अत्यधिक बारिश ने जल‑संकट और कृषि नुकसान

का पैमाना बढ़ा था। वैज्ञानिकों ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण इन क्षेत्रों में वर्षा की तीव्रता में वृद्धि हो रही है, जिससे मौसमी पैटर्न में अस्थिरता उत्पन्न हो रही है। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए IMD का साप्ताहिक अलर्ट न केवल मौसमी अनुमान बल्कि संभावित आपदा‑प्रबंधन रणनीति का

भी हिस्सा माना जाता है।

IMD ने इस सप्ताह के लिये अपने 5‑स्तरीय चेतावनी मानक के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों को ‘हैवी टू एक्सट्रीम’ (भारी से अत्यधिक) बारिश की श्रेणी में वर्गीकृत किया है। ओडिशा में 10 सितंबर को ‘कैल क़ा मौसम’ के रूप में अत्यधिक बारिश की संभावना है, जहाँ

स्थानीय स्तर पर 100 mm से अधिक वर्षा दर्ज होने की संभावना है। छत्तीसगढ़ में 12 सितंबर को भी समान स्तर की भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है, जिससे कई नदियों के जलस्तर में तेज़ वृद्धि हो सकती है। इसी बीच, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 14‑15 सितंबर को तेज़ वर्षा के

साथ-साथ संभावित बाढ़ की चेतावनी दी गई है, जो शहरी क्षेत्रों में जल‑निकासी को प्रभावित कर सकती है।

इन चेतावनियों के तहत, ओडिशा के राज्य सरकार ने पूर्व‑निर्धारित आपातकालीन उपायों को सक्रिय किया है, जिसमें जल निकासी प्रणाली की जाँच, बाढ़‑रोकथाम बुनियादी ढांचे की मजबूती और आपातकालीन राहत दलों

की तैनाती शामिल है। छत्तीसगढ़ में भी जल‑स्रोत प्रबंधन विभाग ने जल‑भंडारण और बाढ़‑प्रबंधन के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली में जल निकासी प्राधिकरण ने पिछले वर्ष की तुलना में अधिक जल‑निकासी क्षमता सुनिश्चित करने हेतु अतिरिक्त पंप और एम्बुलेंस तैनात करने की योजना बनाई है।

इसी दौरान, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने सभी संबंधित राज्य सरकारों से संभावित आपदा‑प्रबंधन योजना को अद्यतन करने का आग्रह किया है। विभाग ने बताया कि साप्ताहिक मौसम अलर्ट के साथ, स्थानीय स्तर पर चेतावनी प्रणाली को सक्रिय किया जाएगा, जिससे नागरिकों को समय पर सूचित किया जा

सके। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित रोगों के प्रसार को रोकने हेतु स्वच्छता और जल‑सुरक्षा उपायों पर बल दिया है।

विपरीत पक्षों की प्रतिक्रियाओं में, कई किसान संघों ने कहा है कि लगातार बारिश से फसल नुकसान के डर से वे पहले से ही आर्थिक तनाव में हैं।

ओडिशा के कुछ किसान समूह ने विशेष रूप से धान की फसल के लिए अतिरिक्त सिंचाई और जल‑निकासी उपायों की मांग की है। छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग ने किसानों को अतिरिक्त बीमा कवरेज और रेन‑फ़ेयर सहायता प्रदान करने का वादा किया है, जिससे संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

धारा-प्रधान नगरपालिकाओं ने भी जल‑निकासी की समस्या को लेकर चिंताएँ व्यक्त की हैं। दिल्ली के कुछ वार्ड में जल‑जाम की रिपोर्टों के कारण ट्रैफ़िक जाम और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने की आशंका है। हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में जल‑भरण के कारण खेतों में जल‑रोकटोक की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती

हैं, जिससे खेती की उपज पर असर पड़ सकता है। इन समस्याओं को हल करने हेतु स्थानीय प्रशासन ने अल्पकालिक उपायों के साथ दीर्घकालिक जल‑प्रबंधन योजना का प्रस्ताव रखा है।

राजनीतिक स्तर पर, विपक्षी दलों ने मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से अधिक

वित्तीय सहायता की माँग की है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढाँचे के अभाव के कारण कई ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के बाद पुनःस्थापना में देरी होती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होता है। केंद्र सरकार की ओर से, जल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा कि मौसमी आपदाओं से

Updated: September 9, 2026

The IMD’s weekly alert highlights potential heavy rainfall across multiple Indian states, informing authorities and citizens of possible flooding, water‑supply disruptions, and impacts on agriculture and public health. It enables timely emergency preparedness and resource allocation.

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