पिछले कुछ वर्षों में कई राष्ट्रीय स्तर की फिल्में बिहार के विभिन्न स्थानों पर शूट हुई हैं, जिनमें “संजू” और “गुजरात” जैसी ब्लॉकबस्टर शामिल हैं, जिन्होंने राज्य के पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डाला। इन परियोजनाओं ने स्थानीय स्तर पर अस्थायी रोजगार, होटल‑भोजन उद्योग में वृद्धि और सांस्कृतिक आदान‑प्रदान को प्रोत्साहित किया, परन्तु इनका प्रभाव अस्थायी और सीमित रहा। इस कारण, सरकार ने एक स्थायी, बहु‑उपयोगी फिल्म क्लस्टर की आवश्यकता को पहचाना, जिससे निरंतर उत्पादन, प्रशिक्षण और अनुसंधान को एक ही स्थान पर समेकित किया जा सके।
राजगीर में प्रस्तावित फिल्म सिटी का पहला चरण ५‑वर्षीय योजना के तहत १,५०० करोड़ रुपये के प्रारम्भिक निवेश से आरम्भ होगा। इस चरण में १२ बड़े‑पैमाने के साउंडस्टेज, १०० हेक्टेयर की बाहरी लोकेशन, और २५० हाउसिंग यूनिट्स का निर्माण शामिल है, जो फिल्म दलों के लिए रहने योग्य सुविधाएँ प्रदान करेंगे। पटना में स्थित सिटी में डिजिटल पोस्ट‑प्रोडक्शन हब, वीएफएक्स स्टूडियो और एआई‑आधारित संपादन उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिससे तकनीकी रूप से उन्नत सेवाएँ उपलब्ध होंगी। बांका में प्राकृतिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए आउटडोर सेट, जल निकाय और ऐतिहासिक स्थल पुनर्निर्माण की योजना बनाई गई है, जिससे विभिन्न शैलियों की फिल्में आसानी से निर्मित की जा सकें।
इन तीन शहरों में एकीकृत रूप से कार्य करने वाले फिल्म हब का लक्ष्य वर्ष २०२८ तक कम से कम १०० राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्म परियोजनाओं को आकर्षित करना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने निजी निवेशकों, बहुराष्ट्रीय मीडिया समूहों और भारतीय फिल्म उद्योग के प्रमुख उत्पादन गृहों को साझेदारी की पेशकश की है। इसके अलावा, फिल्म सिटी के भीतर एक शैक्षणिक संस्थान स्थापित किया जाएगा, जहाँ तकनीकी प्रशिक्षण, स्क्रिप्ट लेखन और प्रबंधन पाठ्यक्रमों को आधुनिक मानकों के अनुसार चलाया जाएगा। यह पहल स्थानीय युवा वर्ग को रोजगार योग्य कौशल प्रदान करने के साथ-साथ उद्योग के दीर्घकालिक विकास में योगदान देगी।
बिहार के वित्तीय मंत्री ने इस परियोजना को राज्य के वार्षिक बजट में प्राथमिकता दी है और कहा कि फिल्म सिटी से उत्पन्न होने वाले राजस्व को प्रत्यक्ष कर आय, पर्यटन कर और विदेशी निवेश के माध्यम से राज्य के वित्तीय तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। इसके साथ ही, राज्य के उद्योग विभाग ने फिल्म सिटी के लिए विशेष आर्थिक ज़ोन (SEZ) की घोषणा की है, जिससे आयात‑निर्यात सुविधा, कर छूट और सरल लाइसेंसिंग प्रक्रिया उपलब्ध होगी। इस कदम से निवेशकों को नियामकीय बाधाओं से मुक्त कर तेजी से विकास की राह मिल सकेगी।
राजगीर में निर्माण कार्य प्रारम्भ होने पर स्थानीय व्यापारियों और श्रमिकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई छोटे उद्यमियों ने बताया कि फिल्म सिटी के निर्माण से उनके व्यवसाय में बढ़ोतरी की संभावना है, विशेषकर होटलों, रेस्टोरेंट, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प के बाजार में। पटना के व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने कहा कि शहर की बुनियादी सुविधाएँ, जैसे हवाई अड्डा और रेल नेटवर्क, पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर कनेक्टेड हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं के लिए लॉजिस्टिक लाभ साकार होगा। वहीं, बांका के सामाजिक समूह ने पर्यावरणीय संरक्षण के प्रति आशंकाएँ जताते हुए कहा कि निर्माण प्रक्रिया में सतत विकास के मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए।
Updated: September 9, 2026
Bihar’s ₹6,000‑crore film‑city gamble could turn the state into a low‑cost, high‑tech production hub, forcing Bollywood’s traditional centers to share the spotlight.
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